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डस्टबिन घोटाले में सासनी ब्लॉक सबसे आगे
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:32 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले में इन-दिनों घोटालों के खुलासे का सिलसिला चल रहा है। यहां जिला पंचायतराज विभाग डस्टबिन घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। जिले के सासनी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा डस्टबिन की खरीद हुई है। हालांकि अन्य ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में खरीद की गई है, लेकिन अन्य ब्लॉकों में दो या तीन ग्राम पंचायतें हैं।
यहां सासनी ब्लॉक की करीब 35 ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद में गड़बड़ी सामने आई है। अब जांच अधिकारी इस घोटाले के हर पहलू की जांच करने में जुटे हुए हैं। वही इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अधिकारियों से संपर्क साधे हुए हैं।
यहां शौचालय की वास्तविक से तीन गुना ज्यादा कीमत में डस्टबिन की खरीद हुई है। यह मामला उस समय खुलकर आया, जब एक शिकायतकर्ता ने इस मामले की शिकायत डीएम डॉ. रमाशंकर मौर्य से की। उन्होंने इस मामले में गंभीरता बरतते हुए तुरंत जांच बैठा दी। जांच के लिए पीडी चंद्रशेखर शुक्ला को नामित किया गया। इस मामले की जांच में यह भी सामने आया कि एक ही फर्म के द्वारा ज्यादातर डस्टबिन की खरीद की गई है।
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इससे यह साफ हो गया है कि डस्टबिन खरीद में शासन के आदेशों की अनदेखी कर कमीशन का खेल चला है। वहीं घोटाले में फंसे अधिकारी और कर्मचारी अपनी गर्दन बचाने के लिए उच्चाधिकारियों औरजनप्रतिनिधियों से संपर्क साधने में जुट गए है। जांच अधिकारी चंद्रशेखर शुक्ला के अनुसार जांच के दायरे में आने वाले सभी अधिकारियों से लिखित में जबाव लिया जा रहा है। इसके आधार पर जांच रिपोर्ट जल्द ही डीएम को सौंप दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर शिकायत नहीं आती तो शायद यह घोटाला बड़े पैमाने पर हो सकता था। फिलहाल डस्टबिन की खरीद खुद अधिकारियों द्वारा रोक दी गई है।
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हाथरस। जिले में इन-दिनों घोटालों के खुलासे का सिलसिला चल रहा है। यहां जिला पंचायतराज विभाग डस्टबिन घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। जिले के सासनी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा डस्टबिन की खरीद हुई है। हालांकि अन्य ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में खरीद की गई है, लेकिन अन्य ब्लॉकों में दो या तीन ग्राम पंचायतें हैं।
यहां सासनी ब्लॉक की करीब 35 ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद में गड़बड़ी सामने आई है। अब जांच अधिकारी इस घोटाले के हर पहलू की जांच करने में जुटे हुए हैं। वही इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अधिकारियों से संपर्क साधे हुए हैं।
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यहां शौचालय की वास्तविक से तीन गुना ज्यादा कीमत में डस्टबिन की खरीद हुई है। यह मामला उस समय खुलकर आया, जब एक शिकायतकर्ता ने इस मामले की शिकायत डीएम डॉ. रमाशंकर मौर्य से की। उन्होंने इस मामले में गंभीरता बरतते हुए तुरंत जांच बैठा दी। जांच के लिए पीडी चंद्रशेखर शुक्ला को नामित किया गया। इस मामले की जांच में यह भी सामने आया कि एक ही फर्म के द्वारा ज्यादातर डस्टबिन की खरीद की गई है।
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इससे यह साफ हो गया है कि डस्टबिन खरीद में शासन के आदेशों की अनदेखी कर कमीशन का खेल चला है। वहीं घोटाले में फंसे अधिकारी और कर्मचारी अपनी गर्दन बचाने के लिए उच्चाधिकारियों औरजनप्रतिनिधियों से संपर्क साधने में जुट गए है। जांच अधिकारी चंद्रशेखर शुक्ला के अनुसार जांच के दायरे में आने वाले सभी अधिकारियों से लिखित में जबाव लिया जा रहा है। इसके आधार पर जांच रिपोर्ट जल्द ही डीएम को सौंप दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर शिकायत नहीं आती तो शायद यह घोटाला बड़े पैमाने पर हो सकता था। फिलहाल डस्टबिन की खरीद खुद अधिकारियों द्वारा रोक दी गई है।