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Hathras News: 29 स्कूलों के 2920 बच्चे भूख से बिलबिलाए
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सादाबाद के वार्ड नंबर 16 स्थित प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन वितरित न होने से भूखे बैठे ब
- फोटो : Samvad
ब्लॉक सादाबाद में मिड डे मील वितरण की व्यवस्था चरमरा गई है। मंगलवार को ब्लॉक के 29 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 2920 बच्चों को निर्धारित भोजन नहीं मिल सका, जिससे विद्यालयों में बच्चे पूरे दिन भूख से परेशान रहे।
विभागीय जानकारी के अनुसार हाल ही में सादाबाद ब्लॉक में मिड डे मील वितरण की जिम्मेदारी श्री बालाजी सामाजिक विकास समिति को दी गई है। संस्था एक मई से इसका विवरण करेगी। इसी बदलाव के चलते वितरण व्यवस्था अचानक ठप हो गई। जिला स्तर से भी मिड डे मील वितरण का किसी प्रकार का वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ा।
मंगलवार को विद्यालयों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे भोजन के इंतजार में दिनभर बैठे रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर खाली पेट ही घर लौटना पड़ा। अभिभावकों और ग्रामीणों में इस मामले को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि बच्चों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अभिभावकों ने दोषी लोगों पर कार्यवाही करने की मांग की है।
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भोजन की आपूर्ति करने वाली एनजीओ के बदले जाने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। जिस नई एनजीओ को वितरण की जिम्मेदारी सौंप गई है, उससे जब बात की गई तो बताया गया कि वह एक मई से वितरण शुरू करेगी। सूचना न मिलने की वजह से कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की जा सकी।
पूनम चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी, सादाबाद।
सुबह स्कूल आए थे, सोचा था कि खाना मिलेगा, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी कुछ नहीं मिला।
-सोहित, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर-16
घर से खाना नहीं लाए थे, क्योंकि स्कूल में मिलने वाला था, लेकिन भूखे ही रहना पड़ा। बहुत उलझन भी हुई।
-गुन्नू, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर-3
भूख लग रही थी, सर से पूछा भी था, मालूम पड़ा कि खाना नहीं आया है। इसके बाद पूरे दिन भूखे रहना पड़ा।
-लक्षमी, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नं 3।
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विभागीय जानकारी के अनुसार हाल ही में सादाबाद ब्लॉक में मिड डे मील वितरण की जिम्मेदारी श्री बालाजी सामाजिक विकास समिति को दी गई है। संस्था एक मई से इसका विवरण करेगी। इसी बदलाव के चलते वितरण व्यवस्था अचानक ठप हो गई। जिला स्तर से भी मिड डे मील वितरण का किसी प्रकार का वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ा।
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मंगलवार को विद्यालयों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे भोजन के इंतजार में दिनभर बैठे रहे, लेकिन उन्हें निराश होकर खाली पेट ही घर लौटना पड़ा। अभिभावकों और ग्रामीणों में इस मामले को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि बच्चों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अभिभावकों ने दोषी लोगों पर कार्यवाही करने की मांग की है।
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भोजन की आपूर्ति करने वाली एनजीओ के बदले जाने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। जिस नई एनजीओ को वितरण की जिम्मेदारी सौंप गई है, उससे जब बात की गई तो बताया गया कि वह एक मई से वितरण शुरू करेगी। सूचना न मिलने की वजह से कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की जा सकी।
पूनम चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी, सादाबाद।
सुबह स्कूल आए थे, सोचा था कि खाना मिलेगा, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी कुछ नहीं मिला।
-सोहित, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर-16
घर से खाना नहीं लाए थे, क्योंकि स्कूल में मिलने वाला था, लेकिन भूखे ही रहना पड़ा। बहुत उलझन भी हुई।
-गुन्नू, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर-3
भूख लग रही थी, सर से पूछा भी था, मालूम पड़ा कि खाना नहीं आया है। इसके बाद पूरे दिन भूखे रहना पड़ा।
-लक्षमी, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नं 3।