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विद्यार्थियों को शासन स्तर से ही दिलाई जाए ड्रेस
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
Updated Thu, 15 Jun 2017 11:46 PM IST
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उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने गुरुवार को डीएमको सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को निशुल्क ड्रेस वितरण के लिए प्रति छात्र तय की गई राशि को लेकर निराशा व्यक्त की गई और छात्र छात्राओं को शासन स्तर से ही ड्रेस उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि ड्रेस वितरण के लिए विभाग द्वारा प्रति छात्र 200 रुपये की दर से धनराशि का निर्धारण किया गया है। इतनी कम धनराशि में कपड़ा खरीद कर उसे सिलवाकर गुणवत्ता पूर्ण ड्रेस दिया जाना अत्यंत दुष्कर कार्य है। पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 11 से 14 साल तक के बालक बालिकाएं पढ़ती हैं, उनके लिए भी 200 रुपये प्रति ड्रेस के हिसबा से धन निर्धारित किया गया है।
जबकि मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को 100 ग्राम प्रति छात्र तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को 150 ग्राम प्रति छात्र खाद्यान्न निर्धारित है और कन्वर्जन कॉस्ट में भी इसी प्रकार का अंतर है, लेकिन ड्रेस वितरण के लिए आवंटित राशि में इस अंतर का ध्यान नहीं रखा गया है। इस विसंगति को दूर किए जाने की आवश्यकता है।
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ड्रेस खरीद प्रक्रिया को संपादित करने के लिए घटित होने वाली क्रय समिति में सचिव के रूप में नामित होने के कारण शिक्षक पर तमाम तरह के आक्षेप लगाए जाते हैं और इन्हीं आक्षेपों के कारण उच्चाधिकारियों द्वारा शिक्षकों का उत्पीडन भी किया जाता है। मांग की गई कि जिस प्रकार शासन द्वारा बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, बैग आदि उपलब्ध कराई जाती हैं, उसी प्रकार बच्चों को ड्रेस शासन स्तर से उपलब्ध कराई जाएं।
इस मौके पर मंडलीय महामंत्री रमेश चौधरी, जिला महामंत्री श्रीकृष्ण उपाध्याय, गिरेंद्र सिंह, पवन कुमार, राकेश कुमार निमेश, सोहन सिंह, युवराज सिंह, त्रिलोकीनाथ, संजीव सेंगर, गिर्राज किशोर, देवकी नंदन, मृदुल शर्मा, केरम सिंह, राकेश कुमार, शशि यादव, तेजवीर सिंह, रूद्रप्रकाश गुप्ता आदि थे।
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जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि ड्रेस वितरण के लिए विभाग द्वारा प्रति छात्र 200 रुपये की दर से धनराशि का निर्धारण किया गया है। इतनी कम धनराशि में कपड़ा खरीद कर उसे सिलवाकर गुणवत्ता पूर्ण ड्रेस दिया जाना अत्यंत दुष्कर कार्य है। पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 11 से 14 साल तक के बालक बालिकाएं पढ़ती हैं, उनके लिए भी 200 रुपये प्रति ड्रेस के हिसबा से धन निर्धारित किया गया है।
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जबकि मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को 100 ग्राम प्रति छात्र तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को 150 ग्राम प्रति छात्र खाद्यान्न निर्धारित है और कन्वर्जन कॉस्ट में भी इसी प्रकार का अंतर है, लेकिन ड्रेस वितरण के लिए आवंटित राशि में इस अंतर का ध्यान नहीं रखा गया है। इस विसंगति को दूर किए जाने की आवश्यकता है।
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ड्रेस खरीद प्रक्रिया को संपादित करने के लिए घटित होने वाली क्रय समिति में सचिव के रूप में नामित होने के कारण शिक्षक पर तमाम तरह के आक्षेप लगाए जाते हैं और इन्हीं आक्षेपों के कारण उच्चाधिकारियों द्वारा शिक्षकों का उत्पीडन भी किया जाता है। मांग की गई कि जिस प्रकार शासन द्वारा बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, बैग आदि उपलब्ध कराई जाती हैं, उसी प्रकार बच्चों को ड्रेस शासन स्तर से उपलब्ध कराई जाएं।
इस मौके पर मंडलीय महामंत्री रमेश चौधरी, जिला महामंत्री श्रीकृष्ण उपाध्याय, गिरेंद्र सिंह, पवन कुमार, राकेश कुमार निमेश, सोहन सिंह, युवराज सिंह, त्रिलोकीनाथ, संजीव सेंगर, गिर्राज किशोर, देवकी नंदन, मृदुल शर्मा, केरम सिंह, राकेश कुमार, शशि यादव, तेजवीर सिंह, रूद्रप्रकाश गुप्ता आदि थे।