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गलत शैक्षिक योग्यता दर्शाने से नुकसान हो सकता है भाजपा प्रत्याशी को
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह दिलेर को नामांकन पत्र में गलत शैक्षिक योग्यता बताना महंगा पड़ सकता है। यदि वह यहां से सांसद चुने गए तो शिकायत के बाद उनकी इस आधार पर संसद सदस्यता तक जा सकती है।
भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह दिलेर ने दो साल पहले जब इगलास से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल फेल दिखाई थी। अब उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट पास दिखाई है। यदि कुछ अधिवक्ताओं की मानें तो इसका बड़ा नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि हाल में ही जांच के दौरान तो किसी ने इस पर आपत्ति नहीं उठाई, लेकिन यदि दिलेर चुनाव जीत गए और उनके किसी विरोधी ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग या हाईकोर्ट में की और दोष सिद्ध हुआ तो उनकी संसद सदस्यता तक जा सकती है। वैसे उनका यह भी कहना है कि यह प्रक्रिया काफी लंबी है। अभी तो चुनाव ही नहीं हुए हैं और चुनाव परिणाम भी नही आया है।
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वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता दिगंबर सिंह सिसौदिया का कहना कि यह झूठा शपथपत्र देना धारा 193 का अपराध है, जो दंडात्मक है और इसमें सजा का भी प्रावधान है। दिलेर ने अपने तथ्य गलत प्रस्तुत किए हैं। इनका नामांकन ही निरस्त होना चाहिए था। यदि भविष्य में इन पर दोष सिद्ध हो गया और यह सांसद भी चुन लिए गए तो इनकी सदस्यता जा सकती है।
अभी हम इस मामले की पूरी जानकारी कर रहे हैं और तथ्य एकत्रित कर रहे हैं। आखिर भाजपा प्रत्याशी ने अपने नामांकन पत्र में क्या उल्लेखित किया है। उसके आधार पर कार्रवाई करेंगे।
-रामजीलाल सुमन, गठबंधन प्रत्याशी
नामांकन पत्रों की जांच करते समय यदि इसे लेकर आपत्ति आई होती तो कार्रवाई की जाती। उस समय कोई आपत्ति नहीं आई थी। अब यदि कोई शिकायत आयोग को प्राप्त होगी और आयोग हमसे किसी कार्रवाई के निर्देश देगा, तब हम कोई कार्रवाई करेंगे।
-प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम
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भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह दिलेर को नामांकन पत्र में गलत शैक्षिक योग्यता बताना महंगा पड़ सकता है। यदि वह यहां से सांसद चुने गए तो शिकायत के बाद उनकी इस आधार पर संसद सदस्यता तक जा सकती है।
भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह दिलेर ने दो साल पहले जब इगलास से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल फेल दिखाई थी। अब उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट पास दिखाई है। यदि कुछ अधिवक्ताओं की मानें तो इसका बड़ा नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि हाल में ही जांच के दौरान तो किसी ने इस पर आपत्ति नहीं उठाई, लेकिन यदि दिलेर चुनाव जीत गए और उनके किसी विरोधी ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग या हाईकोर्ट में की और दोष सिद्ध हुआ तो उनकी संसद सदस्यता तक जा सकती है। वैसे उनका यह भी कहना है कि यह प्रक्रिया काफी लंबी है। अभी तो चुनाव ही नहीं हुए हैं और चुनाव परिणाम भी नही आया है।
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वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता दिगंबर सिंह सिसौदिया का कहना कि यह झूठा शपथपत्र देना धारा 193 का अपराध है, जो दंडात्मक है और इसमें सजा का भी प्रावधान है। दिलेर ने अपने तथ्य गलत प्रस्तुत किए हैं। इनका नामांकन ही निरस्त होना चाहिए था। यदि भविष्य में इन पर दोष सिद्ध हो गया और यह सांसद भी चुन लिए गए तो इनकी सदस्यता जा सकती है।
अभी हम इस मामले की पूरी जानकारी कर रहे हैं और तथ्य एकत्रित कर रहे हैं। आखिर भाजपा प्रत्याशी ने अपने नामांकन पत्र में क्या उल्लेखित किया है। उसके आधार पर कार्रवाई करेंगे।
-रामजीलाल सुमन, गठबंधन प्रत्याशी
नामांकन पत्रों की जांच करते समय यदि इसे लेकर आपत्ति आई होती तो कार्रवाई की जाती। उस समय कोई आपत्ति नहीं आई थी। अब यदि कोई शिकायत आयोग को प्राप्त होगी और आयोग हमसे किसी कार्रवाई के निर्देश देगा, तब हम कोई कार्रवाई करेंगे।
-प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम