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शासन ने अवधि तो बढ़ाई मगर इससे नहीं मिलेगी राहत

Sun, 20 Aug 2017 11:43 PM IST
Updated Sun, 20 Aug 2017 11:43 PM IST
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शासन ने अवधि तो बढ़ाई मगर इससे नहीं मिलेगी राहत
हाथरस, अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में टैक्स और रिटर्न जमा कराने की अवधि बेशक शासन ने 25 अगस्त तक बढ़ा दी है, लेकिन महज पांच दिन बढ़ने से व्यापारियाें को कोई खास राहत मिलने के आसार नहीं हैं। कर अधिवक्ताओं और चार्टड एकाउंटेंटस की मानें तो ऑनलाइन रिटर्न भरने का काम इतना ज्यादा है कि महज पांच दिन में सभी व्यापारियों के रिटर्न फाइल हो पाना मुश्किल है। इस अवधि को अगस्त के आखिर तक बढ़ाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

दरअसल, शासन ने जीएसटी में पहला रिटर्न दाखिल करने की अवधि 25 अगस्त तय की थी, लेकिन शुरुआत में व्यापारियों के सामने बैंकों ने मुश्किल खड़ी कर दी। जिले के कई प्रमुख बैंकों ने यह कहकर जीएसटी जमा कराने से साफ इंकार कर दिया कि इस बारे में उन्हें शासन से कोई गाइडलाइंस नहीं मिली है। जब तक गाइडलाइंस नहीं मिलेगी, तब तक वह टैक्स जमा नहीं कर सकते, जबकि कमिश्नर और डीएम तक ने जीएसटी पर हुई कार्यशाला में भी साफ कहा था कि जिस तरह बैंक पहले टैक्स जमा कराते रहे हैं, ठीक वैसे ही अब भी जमा होगा, लेकिन बैंकों ने इन अधिकारियों के निर्देश भी हवा में उड़ा दिए।
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पिछले दिनों व्यापारियों ने इकट्ठे होकर यह समस्या सहायक आयुक्त वाणिज्य कर के सामने उठाई तो उन्होंने भी इस बारे में बैंकों के प्रबंधकों से बात की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जैसे-तैसे बैंक टैक्स जमा कराने को राजी हुए, लेकिन इस झंझट में इतना समय निकल गया कि जीएसटी का पहला रिटर्न दाखिल करने की तारीख सिर पर आ गई। पिछले तीन-चार दिन से व्यापारी रिटर्न और टैक्स जमा कराने की कोशिश में जुटे हैं।
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यह रिटर्न ऑनलाइन दाखिल किए जा रहे हैं। कभी सर्वर फेल होने से काम अटक जाता है तो कभी कोई दिक्कत आ जाती है। चूंकि जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ी है, इसलिए अधिवक्ताओं और सीए के पास रिटर्न दाखिल करने का काम भी पहले के मुकाबले बढ़ गया है। पूरे दिन उन्हें कंप्यूटर पर जुटना पड़ रहा है। एक दिन में बमुश्किल 5 से 10 रिटर्न ही फाइल हो पा रहे हैं। ऐसे में रिटर्न की आखिरी तारीख सिर्फ पांच दिन आगे बढ़ाने से व्यापारी और कर अधिवक्ता संतुष्ट नहीं हैं।
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