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कम बारिश से धान-बाजरा पर मंडराया खतरा
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
जिले में पिछले 10 दिन से बारिश नहीं होने के कारण अब खरीफ की फसल पर इसका प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो अगर अगले कुछ दिन और बारिश नहीं हुई तो धान व बाजरा की फसलों पर सूखे का असर आना तय है। पहले से ही सूखा, ओलावृष्टि और आलू पर मंदी की मार से जूझ रहे किसान के सामने एक बार गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
जिले में किसान पिछली फसलों में हुए नुकसान की भरपाई खरीफ सीजन में धान और बाजरा की फसल से करने की तैयारी में जुटा था। इसके लिए किसानों ने बड़ी संख्या में धान की पौध भी तैयार की थी, जिससे बारिश ठीक होने पर किसान अधिक से अधिक धान की रोपाई कर धान की अच्छी फसल प्राप्त कर घाटे से उबर सकें, लेकिन पिछले 10 दिनों से जिले में बारिश ही नहीं हो रही है।
बारिश होती भी है तो सिर्फ बूंदाबांदी के बाद ही मौसम साफ हो जाता है, जिससे खरीफ की फसल में कोई लाभ नहीं हो रहा है। खरीफ सीजन में धान और बाजरा की अधिक पानी वाली फसलें हैं। इन फसलों में अधिक बारिश होने पर ही वृद्धि हो पाती है।
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बोले किसान-
धान की रोपाई तो कर दी है, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की वृद्धि नहीं हो पाएगी, जिससे पैदावार भी अच्छी नहीं होगी। बारिश नहीं होना खरीफ की फसल के लिए काफी नुकसानदेह है।
- उमेश कुमार, किसान झींगुरा
खरीफ सीजन में धान और बाजरा की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। जहां रजवाहा आदि से पानी पहुंच जाता है, वहां तो फसल बच सकती हैं, लेकिन नलकूपों की सिंचाई से धान और बाजरा की फसल काफी महंगी और कमजोर हो जाएगी।
-राजकिशोर दीक्षित, किसान हाजीपुर
धान और बाजरा की फसल में वृद्धि तने में पानी पहुंचने से होती है, जबकि जिले में किसानों के पास ऐसे कोई संसाधन हैं ही नहीं, जिससे वह फौव्वारे से सिंचाई कर सकें। नलकूप और रजवाहा के पानी से फसल को बचाया तो जा सकता है, लेकिन औसत पैदावार अच्छी नहीं होती। आने वाले समय में बारिश अच्छी होने की उम्मीद हैं।
- डॉ. श्यौराज सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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जिले में पिछले 10 दिन से बारिश नहीं होने के कारण अब खरीफ की फसल पर इसका प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो अगर अगले कुछ दिन और बारिश नहीं हुई तो धान व बाजरा की फसलों पर सूखे का असर आना तय है। पहले से ही सूखा, ओलावृष्टि और आलू पर मंदी की मार से जूझ रहे किसान के सामने एक बार गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
जिले में किसान पिछली फसलों में हुए नुकसान की भरपाई खरीफ सीजन में धान और बाजरा की फसल से करने की तैयारी में जुटा था। इसके लिए किसानों ने बड़ी संख्या में धान की पौध भी तैयार की थी, जिससे बारिश ठीक होने पर किसान अधिक से अधिक धान की रोपाई कर धान की अच्छी फसल प्राप्त कर घाटे से उबर सकें, लेकिन पिछले 10 दिनों से जिले में बारिश ही नहीं हो रही है।
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बारिश होती भी है तो सिर्फ बूंदाबांदी के बाद ही मौसम साफ हो जाता है, जिससे खरीफ की फसल में कोई लाभ नहीं हो रहा है। खरीफ सीजन में धान और बाजरा की अधिक पानी वाली फसलें हैं। इन फसलों में अधिक बारिश होने पर ही वृद्धि हो पाती है।
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बोले किसान-
धान की रोपाई तो कर दी है, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की वृद्धि नहीं हो पाएगी, जिससे पैदावार भी अच्छी नहीं होगी। बारिश नहीं होना खरीफ की फसल के लिए काफी नुकसानदेह है।
- उमेश कुमार, किसान झींगुरा
खरीफ सीजन में धान और बाजरा की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। जहां रजवाहा आदि से पानी पहुंच जाता है, वहां तो फसल बच सकती हैं, लेकिन नलकूपों की सिंचाई से धान और बाजरा की फसल काफी महंगी और कमजोर हो जाएगी।
-राजकिशोर दीक्षित, किसान हाजीपुर
धान और बाजरा की फसल में वृद्धि तने में पानी पहुंचने से होती है, जबकि जिले में किसानों के पास ऐसे कोई संसाधन हैं ही नहीं, जिससे वह फौव्वारे से सिंचाई कर सकें। नलकूप और रजवाहा के पानी से फसल को बचाया तो जा सकता है, लेकिन औसत पैदावार अच्छी नहीं होती। आने वाले समय में बारिश अच्छी होने की उम्मीद हैं।
- डॉ. श्यौराज सिंह, कृषि वैज्ञानिक