{"_id":"5ce83907bdec22078b293403","slug":"15587228743-hathras-news136","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई विभीषणों की आएगी शामत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई विभीषणों की आएगी शामत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस संसदीय सीट पर भाजपा की जीत के बाद अब अन्य दलों में हार को लेकर मंथन शुरू हो गया है। मोदी लहर के साथ ही कुछ प्रत्याशियों को यह भी लग रहा है कि उनके साथ रहने वाले विभीषणों ने उनकी लुटिया डुबोई है। ऐसे विभीषण घुमे-फिरे तो उनके साथ लेकिन वोट नहीं दिलाया।
अब ऐसे में अगले कुछ दिनों में इन दलों के कुछ नेताओं पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। यहां तक कि कुछ नेताओं के पद जाने का अनुमान लगाया जा रहा है तो कुछ को फटकार का सामना भी करना पड़ सकता है। संसदीय क्षेत्र में शुरुआती दौर में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन बाद भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच ही टक्कर रही, लेकिन भाजपा की मोदी लहर में सभी विपक्षी उड़ गए। हैरानी की बात तो यह रही कि जितने वोट भाजपा प्रत्याशी को मिले, उतने शेष सभी प्रत्याशियों को मिलाकर नहीं मिले।
भाजपा के भारी बहुमत को लेकर भाजपाईयों ने जमकर जश्र मनाया। वहीं दूसरी ओर अन्य दलों ने अपनी हार को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। मोदी लहर का सामना तो कोई नहीं कर पाया लेकिन अब कुछ दलों के प्रत्याशियों का हार का हथियार अपने विरोधियों पर वार के लिए मिल गया है। ऐसे में अब उन विभीषणों की शामत आने वाली है। जो कि अप्रत्यक्ष रुप से प्रत्याशियों का विरोध करने में लगे रहे हैं। वही वोट डलवाने का ठेका लेने वालों की भी शामत आएगी। जो प्रत्याशियों को माला तो पहनावते रहे ,लेकिन वोट नहीं दिलवा पाए। अब आलाकमान स्तर से भी इसे लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाथरस संसदीय सीट पर भाजपा की जीत के बाद अब अन्य दलों में हार को लेकर मंथन शुरू हो गया है। मोदी लहर के साथ ही कुछ प्रत्याशियों को यह भी लग रहा है कि उनके साथ रहने वाले विभीषणों ने उनकी लुटिया डुबोई है। ऐसे विभीषण घुमे-फिरे तो उनके साथ लेकिन वोट नहीं दिलाया।
अब ऐसे में अगले कुछ दिनों में इन दलों के कुछ नेताओं पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। यहां तक कि कुछ नेताओं के पद जाने का अनुमान लगाया जा रहा है तो कुछ को फटकार का सामना भी करना पड़ सकता है। संसदीय क्षेत्र में शुरुआती दौर में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन बाद भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच ही टक्कर रही, लेकिन भाजपा की मोदी लहर में सभी विपक्षी उड़ गए। हैरानी की बात तो यह रही कि जितने वोट भाजपा प्रत्याशी को मिले, उतने शेष सभी प्रत्याशियों को मिलाकर नहीं मिले।
विज्ञापन
भाजपा के भारी बहुमत को लेकर भाजपाईयों ने जमकर जश्र मनाया। वहीं दूसरी ओर अन्य दलों ने अपनी हार को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। मोदी लहर का सामना तो कोई नहीं कर पाया लेकिन अब कुछ दलों के प्रत्याशियों का हार का हथियार अपने विरोधियों पर वार के लिए मिल गया है। ऐसे में अब उन विभीषणों की शामत आने वाली है। जो कि अप्रत्यक्ष रुप से प्रत्याशियों का विरोध करने में लगे रहे हैं। वही वोट डलवाने का ठेका लेने वालों की भी शामत आएगी। जो प्रत्याशियों को माला तो पहनावते रहे ,लेकिन वोट नहीं दिलवा पाए। अब आलाकमान स्तर से भी इसे लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
विज्ञापन