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अब जिले में खंगाली जाएगी सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी की जड़ें
Updated Sun, 26 Aug 2018 12:29 AM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले में राशन के खाद्यान्न की कालाबाजारी की जड़ें बहुत मजबूत है। अब लखनऊ स्तर से इस जिले को भी कालाबाजारी के लिए जांच के घेरे में ले लिया गया है। यहां पांच आधार कार्डों के नंबर पर 1,065 राशन कार्ड चल रहे थे। यह मामला सुर्खियों में आते ही स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारी कटघरे में आ खड़े हुए। इसे लेकर शनिवार को पूरे दिन विभाग में खलबली मची रही। विभागीय अधिकारी पूरे दिन इस डाटा को कंप्यूटर पर खंगालने में लगे रहे।
हालांकि अभी तक इस मामले में पूर्ति विभाग के हाथ कुछ नहीं लग सका है। लखनऊ से आधार कार्डों के नंबर स्थानीय स्तर पर जांच के लिए भेज दिए गए हैं, लेकिन देर शाम तक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में खाली हाथ रहे। जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र यादव ने इस मामले में आनन-फानन तीन टीमें बनाकर जांच शुरू करा दी है। यहां राशन में मिलने वाले अनाज और तेल की कालाबाजारी को लेकर शिकायतें जिला प्रशासन को मिलती रहती हैं। विभागीय स्तर से किसी भी मामले में गंभीरता नहीं बरती जाती है।
इस कारण यह मामला सामने आया है। राशन कार्डों से आधार कार्डों को लिंक करने का काम विभागीय कार्यालय में होता है। इसे लेकर अब विभागीय कर्मचारियों की गर्दन फंसती जा रही है। विभागीय अधिकारी एक आधार नंबर से 1,065 राशन कार्डों से खाद्यान्न वितरण करने के मामले में विभाग की ओर से चूक की बात कबूल रहे हैं। पूर्ति अधिकारी का कहना है कि यह डाटा प्रति माह की एक से चार तारीख के बीच मशीन में डाउनलोड किया जाता है। इस दौरान यह गड़बडी हुई है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि इसे लेकर राशन की कालाबाजारी की जा रही होगी।
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कार्रवाई के नाम पर अभी तक चल रही जांचें
हाथरस। पिछले दिनों सासनी क्षेत्र में 355 बोरे चावल के पुलिस अधिकारियों द्वारा रुदायन रोड से पकड़े गए थे। इस मामले में विभाग की ओर कोतवाली सासनी में एफआईआर दर्ज भी कराई गई थी। इस मामले में डीएम डॉ. रमाशंकर मौर्य ने गंभीरता बरतते हुए स्टॉक को चेक करने और पकड़े गए खाद्यान्न के आने की जानकारी को लेकर जांच के निर्देश दिए थे। विभाग की ओर से इस मामले में जांच के नाम फाइल तो शुरू की गई, लेकिन यह खाद्यान्न कहां से आया, इसका पता नहीं चल सका है। अब यह खाद्यान्न फिर से सवालों के घेरे में है। ऐसा ही पिछले दिनों एक मामला सिकंदराराऊ क्षेत्र में सामने आया था। यहां मिट्टी के तेल से डीजल बनाया जा रहा था। यह मिट्टी का तेल राशन डीलरों से लिया जा रहा था। इस मामले में भी विभागीय स्तर से जांच तो शुरू हुई, लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। हाथरस में भी चामड़ गेट पर दो माह पूर्व मिट्टी का तेल कालाबाजारी को जाते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में भी कार्रवाई फाइलों में दम तोड़ गई।
--------------
शासन स्तर से आधार कार्डों के नंबर भेजे गए हैं। अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए तीन टीमें बना दी गई हैं। इन कार्डों से खाद्यान्न की कालाबाजारी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
-सुरेंद्र यादव, डीएसओ
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हाथरस। जिले में राशन के खाद्यान्न की कालाबाजारी की जड़ें बहुत मजबूत है। अब लखनऊ स्तर से इस जिले को भी कालाबाजारी के लिए जांच के घेरे में ले लिया गया है। यहां पांच आधार कार्डों के नंबर पर 1,065 राशन कार्ड चल रहे थे। यह मामला सुर्खियों में आते ही स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारी कटघरे में आ खड़े हुए। इसे लेकर शनिवार को पूरे दिन विभाग में खलबली मची रही। विभागीय अधिकारी पूरे दिन इस डाटा को कंप्यूटर पर खंगालने में लगे रहे।
हालांकि अभी तक इस मामले में पूर्ति विभाग के हाथ कुछ नहीं लग सका है। लखनऊ से आधार कार्डों के नंबर स्थानीय स्तर पर जांच के लिए भेज दिए गए हैं, लेकिन देर शाम तक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में खाली हाथ रहे। जिला पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र यादव ने इस मामले में आनन-फानन तीन टीमें बनाकर जांच शुरू करा दी है। यहां राशन में मिलने वाले अनाज और तेल की कालाबाजारी को लेकर शिकायतें जिला प्रशासन को मिलती रहती हैं। विभागीय स्तर से किसी भी मामले में गंभीरता नहीं बरती जाती है।
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इस कारण यह मामला सामने आया है। राशन कार्डों से आधार कार्डों को लिंक करने का काम विभागीय कार्यालय में होता है। इसे लेकर अब विभागीय कर्मचारियों की गर्दन फंसती जा रही है। विभागीय अधिकारी एक आधार नंबर से 1,065 राशन कार्डों से खाद्यान्न वितरण करने के मामले में विभाग की ओर से चूक की बात कबूल रहे हैं। पूर्ति अधिकारी का कहना है कि यह डाटा प्रति माह की एक से चार तारीख के बीच मशीन में डाउनलोड किया जाता है। इस दौरान यह गड़बडी हुई है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि इसे लेकर राशन की कालाबाजारी की जा रही होगी।
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कार्रवाई के नाम पर अभी तक चल रही जांचें
हाथरस। पिछले दिनों सासनी क्षेत्र में 355 बोरे चावल के पुलिस अधिकारियों द्वारा रुदायन रोड से पकड़े गए थे। इस मामले में विभाग की ओर कोतवाली सासनी में एफआईआर दर्ज भी कराई गई थी। इस मामले में डीएम डॉ. रमाशंकर मौर्य ने गंभीरता बरतते हुए स्टॉक को चेक करने और पकड़े गए खाद्यान्न के आने की जानकारी को लेकर जांच के निर्देश दिए थे। विभाग की ओर से इस मामले में जांच के नाम फाइल तो शुरू की गई, लेकिन यह खाद्यान्न कहां से आया, इसका पता नहीं चल सका है। अब यह खाद्यान्न फिर से सवालों के घेरे में है। ऐसा ही पिछले दिनों एक मामला सिकंदराराऊ क्षेत्र में सामने आया था। यहां मिट्टी के तेल से डीजल बनाया जा रहा था। यह मिट्टी का तेल राशन डीलरों से लिया जा रहा था। इस मामले में भी विभागीय स्तर से जांच तो शुरू हुई, लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। हाथरस में भी चामड़ गेट पर दो माह पूर्व मिट्टी का तेल कालाबाजारी को जाते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में भी कार्रवाई फाइलों में दम तोड़ गई।
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शासन स्तर से आधार कार्डों के नंबर भेजे गए हैं। अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए तीन टीमें बना दी गई हैं। इन कार्डों से खाद्यान्न की कालाबाजारी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
-सुरेंद्र यादव, डीएसओ