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Hathras News: एससी-एसटी एक्ट के नौ मुकदमे निकले झूठे, 7.75 लाख रुपये की होगी वसूली

Mon, 12 Oct 2026 02:03 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 02:03 AM IST
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Nine SC/ST Act cases found to be false; 7.75 lakh to be recovered.
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
जिले में 2017-2025 के बीच एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज नौ मुकदमे झूठे पाए गए। न्यायालय ने छह मामलों में 7.75 लाख रुपये की अनुदान राशि वसूलने के आदेश दिए हैं, जबकि तीन मामलों में अनुदान राशि निरस्त कर दी गई। मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने संबंधित वादियों और गवाहों को नोटिस भी जारी किए हैं।
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इन मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। कुछ प्रकरणों में झूठे आरोप लगाने और न्यायालय में गलत गवाही व साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात सामने आई। इसके बाद न्यायालय ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। पुलिस अब वसूली और अन्य विधिक कार्रवाई में जुटी है।
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जिन छह मामलों में अनुदान राशि लाभार्थियों के खातों तक पहुंच चुकी थी, उनमें अलग-अलग धनराशि की वसूली की जाएगी। सादाबाद कोतवाली में 2017 में छेड़छाड़, मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामला झूठा पाए जाने पर वादी को 1.50 लाख रुपये की अनुदान राशि वापस करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
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वर्ष 2019 में मारपीट और गाली-गलौज के मामले में 2.50 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। सहपऊ में वर्ष 2021 में मारपीट और गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में 75 हजार रुपये लौटाने होंगे। वहीं, कोतवाली सदर में 2023 में दर्ज मारपीट के मुकदमे में भी 75 हजार रुपये की वसूली के आदेश दिए गए हैं।
इसी तरह सादाबाद में 2023 में घर में घुसकर छेड़छाड़ और सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में दर्ज मुकदमा भी झूठा पाया गया। इस मामले में 1.50 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। सादाबाद में ही वर्ष 2024 में विश्वासघात और धमकी से संबंधित मामले में 75 हजार रुपये की अनुदान राशि वापस ली जाएगी।
तीन मामलों में अनुदान राशि पर लगी रोक
तीन अन्य मामलों में भी आरोपों की पुष्टि नहीं होने और गवाही में गड़बड़ी सामने आने के बाद अनुदान राशि निरस्त कर दी गई। हाथरस गेट कोतवाली में वर्ष 2025 में दर्ज धमकी का मामला इनमें शामिल है। कोतवाली सदर में 2022 में दर्ज दुष्कर्म के मामले में सीएमओ की रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और गवाही भी गलत पाई गई। इसके अलावा हाथरस गेट कोतवाली में 2024 में दर्ज दुष्कर्म का मामला भी फर्जी पाया गया। इन तीनों मामलों में अनुदान राशि खातों में हस्तांतरित नहीं हुई थी, इसलिए उसकी वसूली के बजाय राशि निरस्त कर दी गई।
न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बेकसूर लोगों को फंसाने और सरकारी धन का गलत इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन कराते हुए दोषी पाए गए वादियों से वसूली और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। - चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी

क्या है वसूली का कानूनी प्रावधान

वरिष्ठ अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंढीर ने बताया कि यह पूरा प्रकरण आपराधिक न्याय प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने और कानून के सही क्रियान्वयन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। झूठे साक्ष्य देने पर बीएनएस की धारा 229 के अंतर्गत 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। यदि झूठे मामले या झूठी गवाही के आधार पर सरकार/प्रशासन से कोई वित्तीय सहायता, मुआवजा या अनुदान प्राप्त किया गया है, तो अदालत धारा 383(1) के तहत नोटिस जारी कर पूरी राशि की वसूली का आदेश देती है।
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