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सौ वर्षीय विद्यालय का कौन बनेगा रहनुमा
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:02 AM IST
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जिले की प्राचीन भवनों में शुमार और शिक्षा क्षेत्र
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में उपलब्धियों के लिए बेमिसाल पिहानी स्थित करीब 100 वर्ष पुराने स्कूल
भवन पर जर्जरता का जाला लग चुका है। तमाम गौरवशाली गाथा का गवाह बने इस भवन
की निगाहें अब अपने रहनुमा की ओर लगी हुईं हैं।
यह रहनुमा ही सहेजने के साथ इसके अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आ सके। हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर बनने वाले सरकारी स्कूलों के भवनों के लिए यह भवन नजीर भी है, क्योंकि जिस तरह से भवन बनने के चंद वर्षो बाद ही जमींदोज दिखाकर वहां नए भवन बनाए जाते हैं।
उनके लिए निर्माण की गुणवत्ता की सीख भी इस भवन से ली जा सकती है। वर्षों पूर्व यहां शिक्षा पाने वाले कई छात्र उच्च न्यायिक सेवा, उच्च लोक सेवा और उच्च राजनीतिक पदों तक पहुंचने के साथ सरकार की नुमाइंदे बने हैं। अंग्रेजों के शासन काल से आजादी मिलने से लेकर अब तक के सफर में स्कूल ने तमाम उतार चढ़ाव और शिक्षा क्षेत्र के बदलाव देखे है।
पंडितजी से गुरुजी और मास्साब से लेकर सर के संबोधनों का रूप देख चुके इस स्कूल के भवन को लेकर स्थानीय लोगों में खासा लगाव है। वैसे तो यह स्कूल बेसिक शिक्षा विभाग के तहत आता है, पर जनप्रतिनिधि भी इस ओर नजरें इनायत कर सकते हैं। यह अलग बात है कि इस ओर अभी तक किसी की नजरें इनायत नहीं हुई है।
यही कारण है कि जर्जरता का जाला भवन पर गहरा रहा है। इससे चिंतित लोग इस तमाम गौरवमयी यादों को सहेजे इस भवन को सहेजे जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर निगाह लगा रहे हैं। इस बाबत सोमवार को गायत्री परिवार के अतुल कपूर, संजय सिंह, अवधेेश रस्तोगी, प्रियंक आदि अपर जिलाधिकारी लक्ष्मीशंकर सिंह से मुलाकात कर भवन का सजाने एवं संवारने की मांग की।
इसके साथ ही जिलाधिकारी रमेश मिश्रा से भी इस ओर कार्रवाई कराने को कहा है। एडीएम ने बताया कि वह इस ओर बड़े अफसरों से बात करेंगे।
यह रहनुमा ही सहेजने के साथ इसके अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आ सके। हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर बनने वाले सरकारी स्कूलों के भवनों के लिए यह भवन नजीर भी है, क्योंकि जिस तरह से भवन बनने के चंद वर्षो बाद ही जमींदोज दिखाकर वहां नए भवन बनाए जाते हैं।
उनके लिए निर्माण की गुणवत्ता की सीख भी इस भवन से ली जा सकती है। वर्षों पूर्व यहां शिक्षा पाने वाले कई छात्र उच्च न्यायिक सेवा, उच्च लोक सेवा और उच्च राजनीतिक पदों तक पहुंचने के साथ सरकार की नुमाइंदे बने हैं। अंग्रेजों के शासन काल से आजादी मिलने से लेकर अब तक के सफर में स्कूल ने तमाम उतार चढ़ाव और शिक्षा क्षेत्र के बदलाव देखे है।
पंडितजी से गुरुजी और मास्साब से लेकर सर के संबोधनों का रूप देख चुके इस स्कूल के भवन को लेकर स्थानीय लोगों में खासा लगाव है। वैसे तो यह स्कूल बेसिक शिक्षा विभाग के तहत आता है, पर जनप्रतिनिधि भी इस ओर नजरें इनायत कर सकते हैं। यह अलग बात है कि इस ओर अभी तक किसी की नजरें इनायत नहीं हुई है।
यही कारण है कि जर्जरता का जाला भवन पर गहरा रहा है। इससे चिंतित लोग इस तमाम गौरवमयी यादों को सहेजे इस भवन को सहेजे जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर निगाह लगा रहे हैं। इस बाबत सोमवार को गायत्री परिवार के अतुल कपूर, संजय सिंह, अवधेेश रस्तोगी, प्रियंक आदि अपर जिलाधिकारी लक्ष्मीशंकर सिंह से मुलाकात कर भवन का सजाने एवं संवारने की मांग की।
इसके साथ ही जिलाधिकारी रमेश मिश्रा से भी इस ओर कार्रवाई कराने को कहा है। एडीएम ने बताया कि वह इस ओर बड़े अफसरों से बात करेंगे।