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मनरेगा : 15 काम किए, नाम बदलकर 27 दिखाए, 45 लाख का गबन

Sat, 23 Aug 2025 11:17 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 11:17 PM IST
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When objection was raised on planting eucalyptus on government land, the block in-charge was beaten up
हरदोई। मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्याें में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
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एक ही काम को दो से तीन बार कराए जाने के 27 मामले हरियावां विकास खंड की ग्राम पंचायत अरबा गजाधरपुर में पकड़े गए हैं। वृहद स्तर पर हुई जांच में 45 लाख, 11 हजार, 234 रुपये का गोलमाल मिला है। अब ग्राम प्रधान, तत्कालीन सचिव और एमबी करने वाले अवर अभियंता या तकनीकी सहायक के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
हरियावां विकास खंड के अरबा गजाधरपुर गांव में मनरेगा के तहत 2021-22 से 2024-25 के बीच कराए गए कामों को लेकर गंभीर शिकायत उच्चाधिकारियों को मिली थी। गांव निवासी एक शख्स ने यह शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायत में ग्राम पंचायत में कुल 51 कार्यों का जिक्र किया गया था। आरोप था कि 51 कार्याें को दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया जबकि वास्तव में एक ही काम को अलग-अलग नामों से दिखाया गया। इसकी जांच लखनऊ मंडल के स्टेट क्वालिटी मॉनीटर से कराई गई।
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इस जांच में कई अनियमितताएं मिलीं तो फिर शासन ने ग्राम्य विकास विभाग की उपायुक्त प्रियंवदा यादव से प्रकरण की विस्तृत जांच कराई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 51 कार्याें का स्थलीय परीक्षण किया गया। जांच अधिकारी का दावा है कि 51 में से 15 काम वास्तविक (मूल) थे। नौ काम ऐसे मिले जिन्हें दोबारा नहीं कराया गया था। 27 काम ऐसे मिले हैं जिन्हें नाम बदलकर कई बार कराया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 45 लाख, 11 हजार, 234 रुपये का भुगतान गलत ढंग से किया गया है।
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मनरेगा उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह ने बताया कि शनिवार को ही जांच रिपोर्ट मिली है। एसओपी के तहत ग्राम प्रधान, तत्कालीन ग्राम सचिव और मापांकन करने वाले कर्मचारी (तकनीकी सहायक/अवर अभियंता) के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि जांच में 45 लाख, 11 हजार, 234 रुपये के गोलमाल की पुष्टि हुई है। कार्रवाई में संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने, रिकवरी कराने और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही प्रधान के अधिकार सीज करने का उल्लेख है।


अफसरों और कर्मचारियों का ब्योरा देने में कांप रहे हाथ
पूरे मामले की विस्तृत जांच करने वाली उपायुक्त प्रियंवदा यादव ने जांच रिपोर्ट में कई चौकाने वाली बात भी लिखी हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में उपायुक्त ने लिखा है कि वर्ष 2021-22 से और 2024-25 के बीच हरियावां में तैनात रहे खंड विकास अधिकारियों, लेखाकारोें, मनरेगा के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों, रोजगार सेवक, अवर अभियंता, सचिव के नाम का ब्योरा नहीं भेजा जा रहा है। उपायुक्त ने लिखा है कि नाम उपलब्ध कराने के लिए हरियावां के खंड विकास अधिकारी के साथ ही मनरेगा उपायुक्त से भी फोन पर आग्रह किया गया लेकिन 18 जुलाई तक नाम उपलब्ध नहीं कराए गए।



इस तरह मनरेगा को बनाया कमाई का एटीएम
स्टेट क्वालिटी मॉनीटर की रिपोर्ट से लेकर उपायुक्त तक की रिपोर्ट बताती है कि मनरेगा को किस तरह जिम्मेदारों ने कमाई का एटीएम बना लिया। दरअसल, जांच के दौरान पता चला कि मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्याें की एक समय सीमा तय होती है। जिस स्थान पर एक बार काम कराया जाता है वहां दूसरा काम पांच साल पहले मनरेगा से नहीं कराया जा सकता। अरबा गजाधरपुर में इस नियम की धज्जियां उड़ गईं। पांच साल के अंदर ही नाम बदलकर 15 कामों को दो से तीन बार तक दोहराया गया। जांच रिपोर्ट में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है।
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