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Hardoi News: गर्रा नदी में 70 सेंटीमीटर बढ़ा पानी, गोशाला खाली कराई
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फोटो 21: बिलग्राम क्षेत्र में आबादी के आसपास भरा पानी। संवाद
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हरदोई। बैराजों के पानी से अब गर्रा और रामगंगा में पानी बढ़ना शुरू हुआ है। गर्रा नदी में पिछले 24 घंटे में करीब 70 सेंटीमीटर पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे कटियारी क्षेत्र में पानी फसलों तक पहुंचने लगा है। कटान की आशंका से लोगों में दहशत पनप गई है। वहीं लोनार में गर्रा नदी की तलहटी में संचालित गोशाला को खाली करा लिया गया है। मवेशियों को पास की ही दूसरी गोशाला में शिफ्ट कराया गया है। कटरी क्षेत्र में गंगा नदी की बाढ़ से बीमारियां पनप रही हैं।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी और पहाड़ों पर हो रही बरसात से जिले की गंगा, रामगंगा और गर्रा नदी के पानी में उतार-चढ़ाव हो रहा है, बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नानकसागर और ड्यूनी बैराज से छोड़े जाने वाले पानी से गर्रा में शाहजहांपुर के मुमोक्ष आश्रम घाट पर करीब 70 सेंटीमीटर पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गर्रा में नानकसागर बैराज से बुधवार को 8,716 क्यूसेक पानी और पीलीभीत के ड्यूनी बैराज से 35502 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
वहीं बैराजों से अब दिन में कई-कई बार तक पानी छोड़ा जाने लगा है। इससे गर्रा के पानी में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। बावन क्षेत्र के लोनार गांव में गर्रा नदी में पानी के बढ़ने से गोशाला को खाली करा लिया गया है। बीडीओ डॉ. रामप्रकाश और एडीओ पंचायत डॉ. प्रदीप कुमार ने गोशाला का निरीक्षण किया और राहत-बचाव कार्य कराए। वहीं कुसुमखोर के पास गर्रा और रामगंगा का पानी एक होने से कटियारी क्षेत्र में बाढ़ का पानी फसलों तक पहुंचा है।
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कटान से तटवर्ती गांवों के किसानों में दहशत
गर्रा नदी में कटान से तटवर्ती गांवों के किसानों में दहशत पनप गई है। नदी किनारे के खेतों में कटान से फसलों के साथ ही भूमि भी बाढ़ के पानी में समा जाती है। गंगा में नरौरा बैराज से 83,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है हालांकि गंगा का पानी बुधवार को फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर चेतावनी बिंदु से पांच सेंटीमीटर ऊपर 136.65 मीटर गेज पर बना हुआ है। वहीं राजघाट पर 125.11 मीटर गेज पर बना हुआ है। गांवों के आसपास पानी भरा होने और आबादी से पानी निकलने के कारण गंदगी से लोगों में बीमारियां पनपने लगी हैं।
बाढ़ से उपजी गंदगी से 36 लोगों में स्किन बीमारी के मिले लक्षण
बिलग्राम प्रतिनिधि के मुताबिक बाढ़ से उपजी गंदगी से 36 लोगों में स्किन बीमारी के लक्षण मिले हैं। वहीं आठ लोगों में बुखार और 95 लोगों में जुकाम के लक्षण हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि किसी में मलेरिया के लक्षण नहीं मिले। बाढ़ में जनजीवन की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। आवागमन के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों पुन्नापुरवा, जरेला और मदारी पुरवा में लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। खेतों में पानी भरा होने से फसलें सड़ने लगी हैं।
किसानों ने तिल्ली की फसल से उम्मीद छोड़ दी है। प्रशासनिक राशन की राहत से घर के चूल्हे जल रहे हैं। पानी के लगातार भरे रहने से मवेशियों को भी समस्याएं हैं पशुपालकों को पानी में घुसकर चारा दाना लाना पड़ रहा है। तहसीलदार दीपक गौतम के मुताबिक क्षेत्र में भ्रमण कर हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं।
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बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी और पहाड़ों पर हो रही बरसात से जिले की गंगा, रामगंगा और गर्रा नदी के पानी में उतार-चढ़ाव हो रहा है, बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नानकसागर और ड्यूनी बैराज से छोड़े जाने वाले पानी से गर्रा में शाहजहांपुर के मुमोक्ष आश्रम घाट पर करीब 70 सेंटीमीटर पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गर्रा में नानकसागर बैराज से बुधवार को 8,716 क्यूसेक पानी और पीलीभीत के ड्यूनी बैराज से 35502 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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वहीं बैराजों से अब दिन में कई-कई बार तक पानी छोड़ा जाने लगा है। इससे गर्रा के पानी में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। बावन क्षेत्र के लोनार गांव में गर्रा नदी में पानी के बढ़ने से गोशाला को खाली करा लिया गया है। बीडीओ डॉ. रामप्रकाश और एडीओ पंचायत डॉ. प्रदीप कुमार ने गोशाला का निरीक्षण किया और राहत-बचाव कार्य कराए। वहीं कुसुमखोर के पास गर्रा और रामगंगा का पानी एक होने से कटियारी क्षेत्र में बाढ़ का पानी फसलों तक पहुंचा है।
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कटान से तटवर्ती गांवों के किसानों में दहशत
गर्रा नदी में कटान से तटवर्ती गांवों के किसानों में दहशत पनप गई है। नदी किनारे के खेतों में कटान से फसलों के साथ ही भूमि भी बाढ़ के पानी में समा जाती है। गंगा में नरौरा बैराज से 83,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है हालांकि गंगा का पानी बुधवार को फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर चेतावनी बिंदु से पांच सेंटीमीटर ऊपर 136.65 मीटर गेज पर बना हुआ है। वहीं राजघाट पर 125.11 मीटर गेज पर बना हुआ है। गांवों के आसपास पानी भरा होने और आबादी से पानी निकलने के कारण गंदगी से लोगों में बीमारियां पनपने लगी हैं।
बाढ़ से उपजी गंदगी से 36 लोगों में स्किन बीमारी के मिले लक्षण
बिलग्राम प्रतिनिधि के मुताबिक बाढ़ से उपजी गंदगी से 36 लोगों में स्किन बीमारी के लक्षण मिले हैं। वहीं आठ लोगों में बुखार और 95 लोगों में जुकाम के लक्षण हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि किसी में मलेरिया के लक्षण नहीं मिले। बाढ़ में जनजीवन की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। आवागमन के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों पुन्नापुरवा, जरेला और मदारी पुरवा में लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। खेतों में पानी भरा होने से फसलें सड़ने लगी हैं।
किसानों ने तिल्ली की फसल से उम्मीद छोड़ दी है। प्रशासनिक राशन की राहत से घर के चूल्हे जल रहे हैं। पानी के लगातार भरे रहने से मवेशियों को भी समस्याएं हैं पशुपालकों को पानी में घुसकर चारा दाना लाना पड़ रहा है। तहसीलदार दीपक गौतम के मुताबिक क्षेत्र में भ्रमण कर हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं।

फोटो 21: बिलग्राम क्षेत्र में आबादी के आसपास भरा पानी। संवाद