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जल है तो कल है, वरना काल है

Mon, 23 Mar 2015 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Mon, 23 Mar 2015 12:05 AM IST
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Water is tomorrow , or else the period

जल ही जीवन है, जल है तो कल है। इन पंक्तियों को कोई

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नहीं झुठला सकता। इसके बावजूद यह अनमोल प्राकृतिक संपदा का दोहन होने से यह नष्ट होती जा रही, पर फिर भी लोग नहीं चेत पा रहे। रविवार को जल संचयन दिवस हर बार की तरह इस बार भी सन्नाटे में गुजर गया।

हैरानी की बात यह कि प्रशासन द्वारा हर बार होने वाली गोष्ठी भी अबकी नहीं हो सकी। रविवार को छुट्टी का दिन होने से कोई भी गोष्ठी या परिचर्चा न हो सकी। बहरहाल भूगर्भ जल के परिप्रेक्ष्य में यदि अपने जिले पर नजरें दौड़ाए तो जल संचयन को लेकर कोई भी पुख्ता नियमों का पालन होता नहीं दिखता है।

गांवों में जहां तालाब व पोखर खाली दिखाई देते हैं, तो शहरों में वर्षा का जल भी संचित करने के बने नियमों से भी यहां के लोगों को कोई सरोकार नहीं। यहां तक की सरकारी इमारतों में भी उपयोग नहीं होता। सरकारी डायरी की माने तो भौगोलिक क्षेत्रफल 5986 वर्ग किमी  पाया गया है।

इसमें अब तक जिले को प्राप्त भूजल की आकलन करें तो जिले को 1 लाख 57 हजार 525 हेक्टोमीटर भूजल प्राप्त था। अब तक एक लाख 13 हजार 239 हेक्टोमीटर से कहीं अधिक का उपभोग किया जा चुका है। यानी अब जिले के बाशिंदों के पास उपभोग करने को सिर्फ 44 हजार 286 हेक्टोमीटर जल ही अवशेष है।

यानी कुल जल का 71 फीसदी जल अब नष्ट हो चुका है। भूगर्भ जल पर जिले के सहायक अभियंता लघु सिंचाई शैलेंद्र सिंह का कहना था कि जल अमूल्य निधि है। इसकी सतत पर्याप्त उपलब्धता कृषि एवं समग्र विकास की कुंजी है। कुछ क्षेत्रों में जल की कमी से क्षेत्र का विकास वांछित है।

दूसरे अन्य क्षेत्रों में जल का नियोजन प्रबंधन एवं एकीकृत विकास आज की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कई ब्लाकों का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसको लेकर लोग यदि अब भी न चेते तो वह दिन दूर नहीं जब एक एक बूंद के लिए लोगों में खींचतान मच जाएगी।

उधर, भूगर्भ जन नियंत्रण एवं नियमन लागू कर अंधाधुंध दोहन रोकने को रूफ टाप रेनाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर बातें तो खूब हुई। नियम भी खूब बनाए गए, पर कार्रवाई आज तक नहीं की जा सकी। सरकारी इमारतों में इस तकनीक का प्रयोग करते हुए निर्माण करवाने के नियम भी बनाए गए, पर पालन नहीं हो पाया।

उधर, 300 वर्गमीटर या ज्यादा क्षेत्रफल के भूखंडों पर 25 अप्रैल 06 को जारी शासनादेशों को संशोधित कर 200 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्रफल के भूखंडों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। ग्रुप हाउसिंग स्कीम के  तहत 200 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के सरकारी व निजी भूखंडों तथा प्रस्तावित सभी योजनाओं के लेआउट प्लान में सामूहिक भूजल रिचार्जिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

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