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Hardoi News: वार्मर 30, मरीज 28 फिर भी एक वार्मर पर दो-दो नवजात

Tue, 05 Aug 2025 10:18 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Tue, 05 Aug 2025 10:18 PM IST
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Warmers 30, patients 28, yet two newborns on one warmer
हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड में एक ही वार्मर पर दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया है। यह हाल तब है जब यहां 30 वार्मर हैं और 28 नवजात ही भर्ती हैं। पहले से ही बीमार बच्चों को एक ही वार्मर में रखे जाने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। खास बात यह है कि जिम्मेदार स्टाफ की कमी की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
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महिला चिकित्सालय में स्पेशल न्यू बॉर्न यूनिट (एसएनसीयू) है। यहां समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों (प्री-मैच्योर) के साथ ही जन्म से ही बीमार बच्चों को रखा जाता है। कम वजन होने, पीलिया होने के कारण भी बच्चों को भर्ती किया जाता है। पूर्व में यहां सिर्फ 12 वार्मर बेड थे। तब एक ही बेड पर दो से तीन नवजात का इलाज किया जाता था। यह मामला अमर उजाला ने उठाया तो अप्रैल में वार्मर मशीनों की संख्या बढ़ाकर तीस कर दी गई। बावजूद इसके स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया। कई वार्मर खाली होने के बाद भी एक ही वार्मर बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती हैं। इस कारण इनमें एक दूसरे से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
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इनसेट
तीन कक्षों में हैं 30 वार्मर, स्टाफ की कमी बड़ी मुसीबत
एसएनसीयू में तीन कक्षों में 30 वार्मर बेड पड़े हुए हैं। इनमें से एक कक्ष में पांच वार्मर रखकर इसे टाएज एरिया बनाया गया है। यहां अति गंभीर बच्चों को रखा जाता है। टाएज एरिया तो बना दिया गया लेकिन यहां निगरानी करने के लिए स्टाफ ही नहीं है। एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. आशीष वर्मा का कहना है कि सभी वार्मर बेडों का एक साथ संचालन करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्टाफ कम होने के कारण समस्या है। नर्स और वार्ड आया को मिलाकर 11 लोगों का ही स्टाफ है। इसी स्टाफ को आठ-आठ घंटे की ड्यूटी पर रोटेशन से बुलाया जाता है।
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वर्जन
व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रेडिएंट वार्मरों की संख्या बढ़ाई गई थी। अगर स्टाफ की कमी की वजह से सभी वार्मरों पर मरीज भर्ती नहीं हो रहे हैं तो यह गंभीर बात है। महिला अस्पताल के सीएमएस से पूरी जानकारी लेकर स्टाफ बढ़ाया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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