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निर्देश का इंतजार, ट्रेनिंग की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 02 Feb 2015 12:24 AM IST
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भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को स्वावलंबी बनाने
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के उद्देश्य से सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय हमेशा से स्वरोजगार
प्रशिक्षण दिलाता रहा है, जिसको लेकर जनवरी में ही आवेदन भी मांग लिए जाते
थे, पर अबकी निदेशालय से कोई निर्देश न जारी होने से विभाग ने इस और जहां
चुप्पी साध ली है।
बताया गया कि भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों की समस्याओं के निस्तारण से लेकर बच्चों की शिक्षा तक में मदद करने को सैनिक कल्याण विभाग छात्रवृत्ति तक प्रदान करवाता है। अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग अलग वजीफा निर्धारित हैं।
इसी क्रम में स्वरोजगार मुहैया कराने को भी सैनिक कल्याण कार्यालय समय-समय पर स्वरोजगार प्रशिक्षण भी मुहैया कराता है। पिछले काफी समय से हर वर्ष सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय द्वारा कंप्यूटर का चार माह का व्यावसायिक प्रशिक्षण आश्रितों को दिलाता आया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में ही 13 को प्रशिक्षण दिलाने की स्वीकृति हेडक्वार्टर द्वारा दी गई, जिसके चलते प्रशिक्षण दिलाया गया। अबकी भी पूर्व के वर्षों की भांति प्रशिक्षण की चाह में भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित विभागीय कार्यालय के चक्कर लगा प्रशिक्षण के बाबत जानकारी मांग रहे हैं, तो उन्हें सिर्फ न का जवाब दिया जा रहा है, जिससे आश्रितों में मायूसी दिखाई दे रही है।
इस बाबत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल लक्ष्मीकांत तिवारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशिक्षण को लेकर कोई जानकारी जिला स्तर पर नहीं दी गई है। उनके द्वारा निदेशालय से पूछा भी जा रहा है। जैसे ही प्रशिक्षण दिलाने के लिए चयनित संख्या जारी करते हुए अनुमति दी जाएगी, वैसे ही प्रशिक्षण दिलाने को आवेदन मांगे जाएंगे।
उधर, जिले में सैनिक यदि खुद की जानकारी जिला सैनिक पुनर्वास कार्यालय में न दे तो विभाग को सैनिकों के बाबत जानकारी न मिले। ऐसा ही अभी फतेहगढ़ में हुई भर्ती में भी देखने को मिला। भर्ती हुए काफी समय बीत गया। शारीरिक परीक्षा में कितने पास हुए।
मेडिकल कितने जिले के निकाल पाए। यह कोई जानकारी विभाग को नहीं है, जबकि परीक्षा देकर आए युवा सबसे पहले इसी विभाग में आकर चक्कर लगाते हैं। उधर, विभाग के अफसरों ने कहा कि उनके विभाग द्वारा जिलों को ऐसी कोई जानकारी नहीं दी जाती, जिससे उन्हें नहीं मालूम रहता कि जिले में सैनिक कितने हैं।
बताया गया कि भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों की समस्याओं के निस्तारण से लेकर बच्चों की शिक्षा तक में मदद करने को सैनिक कल्याण विभाग छात्रवृत्ति तक प्रदान करवाता है। अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग अलग वजीफा निर्धारित हैं।
इसी क्रम में स्वरोजगार मुहैया कराने को भी सैनिक कल्याण कार्यालय समय-समय पर स्वरोजगार प्रशिक्षण भी मुहैया कराता है। पिछले काफी समय से हर वर्ष सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय द्वारा कंप्यूटर का चार माह का व्यावसायिक प्रशिक्षण आश्रितों को दिलाता आया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में ही 13 को प्रशिक्षण दिलाने की स्वीकृति हेडक्वार्टर द्वारा दी गई, जिसके चलते प्रशिक्षण दिलाया गया। अबकी भी पूर्व के वर्षों की भांति प्रशिक्षण की चाह में भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित विभागीय कार्यालय के चक्कर लगा प्रशिक्षण के बाबत जानकारी मांग रहे हैं, तो उन्हें सिर्फ न का जवाब दिया जा रहा है, जिससे आश्रितों में मायूसी दिखाई दे रही है।
इस बाबत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल लक्ष्मीकांत तिवारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशिक्षण को लेकर कोई जानकारी जिला स्तर पर नहीं दी गई है। उनके द्वारा निदेशालय से पूछा भी जा रहा है। जैसे ही प्रशिक्षण दिलाने के लिए चयनित संख्या जारी करते हुए अनुमति दी जाएगी, वैसे ही प्रशिक्षण दिलाने को आवेदन मांगे जाएंगे।
उधर, जिले में सैनिक यदि खुद की जानकारी जिला सैनिक पुनर्वास कार्यालय में न दे तो विभाग को सैनिकों के बाबत जानकारी न मिले। ऐसा ही अभी फतेहगढ़ में हुई भर्ती में भी देखने को मिला। भर्ती हुए काफी समय बीत गया। शारीरिक परीक्षा में कितने पास हुए।
मेडिकल कितने जिले के निकाल पाए। यह कोई जानकारी विभाग को नहीं है, जबकि परीक्षा देकर आए युवा सबसे पहले इसी विभाग में आकर चक्कर लगाते हैं। उधर, विभाग के अफसरों ने कहा कि उनके विभाग द्वारा जिलों को ऐसी कोई जानकारी नहीं दी जाती, जिससे उन्हें नहीं मालूम रहता कि जिले में सैनिक कितने हैं।