{"_id":"68ac9ee27c9be537950c0f0f","slug":"urea-was-distributed-more-than-three-times-yet-there-was-a-fight-for-each-sack-hardoi-news-c-213-1-hra1001-136365-2025-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: तीन गुना से अधिक बंट गई यूरिया, फिर भी एक-एक बोरी की मारामारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: तीन गुना से अधिक बंट गई यूरिया, फिर भी एक-एक बोरी की मारामारी
विज्ञापन
हरदोई। सहकारिता और कृषि विभाग के दावों पर गौर करें तो जिले में खरीफ फसलों में जरूरत की तीन गुणा यूरिया वितरित हो चुकी है। फिर भी
एक-एक बोरी यूरिया के लिए मारामारी है। सोमवार तक 93,111 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से बांटी गई है। किसान एक-एक बोरी के लिए सुबह से ही कतार में लगने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग की तरफ से खरीफ फसलों की बोवाई की रिपोर्ट तैयार कराई गई। जिसमें खरीफ फसलों में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल और सोयाबीन आदि की बोवाई की है। देखा जाए तो 2,97,082 हेक्टयर क्षेत्रफल में सभी खरीफ फसलों की बोवाई की गई है। जिसमें 1,80,896 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अकेले विभिन्र प्रजाति के धान की बोवाई की गई है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार धान की फसलों की बोवाई लक्ष्य से करीब 40 प्रतिशत अधिक क्षेत्रफल में की गई है। धान की फसल में यूरिया के प्रयोग के मानकों पर नजर डाले तो एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए ढाई बोरी यूरिया की आवश्यकता होनी चाहिए। जिसके हिसाब से एक बार में करीब 4,52,240 बोरी की जरूरत होनी चाहिए। जिससे तीन बार में यूरिया के प्रयोग से 13, 56,720 बोरी यूरिया की आवश्यकता होगी।
जिले में सहकारी समितियों, इफको विक्रय केंद्रों और निजी उर्वरक विक्रेताओं की तरफ से 1,80,896 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा सका है। 45 किलोग्राम की प्रति बोरी के हिसाब से एक मीट्रिक टन में औसतन 22 बोरी यूरिया होती है। इस हिसाब से 1,80,896 मीट्रिक टन करीब 39,79,712 बोरी यूरिया हुई। जरूरत से करीब तीन गुणा यूरिया का वितरण होने के बाद भी एक-एक बोरी के लिए हो रही मारामारी समझ से परे है।
विज्ञापन
-- -
धान की एक एकड़ फसल के लिए 120 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त :
कृषि विज्ञान केंद्र तत्योरा के अध्यक्ष कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि सभी फसलों के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता है। जिसके लिए किसान फसलों में यूरिया का प्रयोग करते हैं। बताया कि एक एकड़ धान की फसल को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन के लिए 120 किलोग्राम यूरिया की जरूरत होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि बारिश और खेतों में पानी भरा होने पर यूरिया का सीधे छिड़काव न करें। यूरिया में बालू या मिट्टी मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।
-- -
खाद की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त है यूरिया
जिलाधिकारी अनुनय झा ने बताया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं हैं। पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार ही यूरिया का फसलों में उपयोग करना चाहिए। सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां यूरिया की उपलब्धता कराई जा रही है।
विज्ञापन
एक-एक बोरी यूरिया के लिए मारामारी है। सोमवार तक 93,111 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से बांटी गई है। किसान एक-एक बोरी के लिए सुबह से ही कतार में लगने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग की तरफ से खरीफ फसलों की बोवाई की रिपोर्ट तैयार कराई गई। जिसमें खरीफ फसलों में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल और सोयाबीन आदि की बोवाई की है। देखा जाए तो 2,97,082 हेक्टयर क्षेत्रफल में सभी खरीफ फसलों की बोवाई की गई है। जिसमें 1,80,896 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अकेले विभिन्र प्रजाति के धान की बोवाई की गई है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार धान की फसलों की बोवाई लक्ष्य से करीब 40 प्रतिशत अधिक क्षेत्रफल में की गई है। धान की फसल में यूरिया के प्रयोग के मानकों पर नजर डाले तो एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए ढाई बोरी यूरिया की आवश्यकता होनी चाहिए। जिसके हिसाब से एक बार में करीब 4,52,240 बोरी की जरूरत होनी चाहिए। जिससे तीन बार में यूरिया के प्रयोग से 13, 56,720 बोरी यूरिया की आवश्यकता होगी।
विज्ञापन
जिले में सहकारी समितियों, इफको विक्रय केंद्रों और निजी उर्वरक विक्रेताओं की तरफ से 1,80,896 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा सका है। 45 किलोग्राम की प्रति बोरी के हिसाब से एक मीट्रिक टन में औसतन 22 बोरी यूरिया होती है। इस हिसाब से 1,80,896 मीट्रिक टन करीब 39,79,712 बोरी यूरिया हुई। जरूरत से करीब तीन गुणा यूरिया का वितरण होने के बाद भी एक-एक बोरी के लिए हो रही मारामारी समझ से परे है।
विज्ञापन
धान की एक एकड़ फसल के लिए 120 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त :
कृषि विज्ञान केंद्र तत्योरा के अध्यक्ष कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि सभी फसलों के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता है। जिसके लिए किसान फसलों में यूरिया का प्रयोग करते हैं। बताया कि एक एकड़ धान की फसल को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन के लिए 120 किलोग्राम यूरिया की जरूरत होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि बारिश और खेतों में पानी भरा होने पर यूरिया का सीधे छिड़काव न करें। यूरिया में बालू या मिट्टी मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।
खाद की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त है यूरिया
जिलाधिकारी अनुनय झा ने बताया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं हैं। पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार ही यूरिया का फसलों में उपयोग करना चाहिए। सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां यूरिया की उपलब्धता कराई जा रही है।