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Hardoi News: शहरीकरण ने बढ़ाए कंकरीट के जंगल, सुविधाएं न जुट पाईं

Sun, 20 Sep 2026 11:10 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:10 PM IST
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Urbanization has led to a proliferation of concrete jungles, yet adequate amenities have failed to keep pace.
हरदोई। शहरीकरण ने शहर के आसपास के खेतों और बागों को कंक्रीट के जंगल में बदल दिया है। खेत रिहायशी हो गए और वहां पर अब पक्के मकान बन गए हैं। लोगों ने रहना भी शुरू किया लेकिन रिहायशी क्षेत्र के लिए मूलभूत सुविधा और सहूलियत उपलब्ध न हो सकीं। ऐसे में कंक्रीट के जंगल में आबादी के लिए सुविधा-सहूलियत कम और सड़क, नाली, पानी और बिजली की आपूर्ति में कांटे अधिक दिखाई दे रहे हैं।
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आधुनिकता और आवश्यकता ने लोगों में शहरीकरण की प्रवृत्ति को तेजी से बढ़ावा दिया है। इससे लोगों ने गांवों के साथ ही शहर में भी पक्के मकानों को बनवाकर रहना शुरू कर दिया। नव विकसित मोहल्लों में कंक्रीट के जंगल तो बनते गए लेकिन आबादी के अनुपात में मूलभूत सुविधाएं नहीं विकसित हो पाईं। वहीं शहरीकरण ने हरियाली के साथ ही कृषि वाली भूमि को आबादी में बदल दिया है।
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शहर के विस्तार के साथ आसपास के खेत तेजी से रिहायशी क्षेत्र में बदलते गए और देखते ही देखते कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए। मकानों की संख्या बढ़ी, आबादी बढ़ी लेकिन उसके अनुपात में बुनियादी सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। सुरक्षा के भी पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। नतीजा यह है कि नए बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अनियोजित तरीके से बढ़ता शहरीकरण अब सुविधाओं के इंतजाम के सामने चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
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मकान बढ़े, सुविधाओं का विस्तार पीछे

रिहायशी इलाकों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आबादी के विस्तार के साथ बुनियादी सुविधाओं की योजना कितनी आगे बढ़ी। कंक्रीट के जंगल लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन सड़क, नाली, पानी और बिजली की सुविधाओं के मामले में अभी भी कई क्षेत्रों को इंतजार है।


केस एक :

मोहल्ला कौशलपुरी में तेजी से आबादी और मकानों का विकास हुआ है। यहां पर सड़क के नाम पर उबड़-खाबड़ खड़ंजा लगा है। मोहल्लेवासियों और सभासद अजय कुमार शर्मा के मुताबिक करीब दो दशक पहले बिजली लाइन डालने के लिए सीमेंटेड बिजली के पोल लगवाए गए थे। अभी तक इस पर बिजली के तार नहीं खींचे गए।


केस दो

मोहल्ला कौशलपुरी में न तो पानी के निकास के लिए सही इंतजाम हैं न ही जलापूर्ति की व्यवस्था। मोहल्लेवासियों के मुताबिक टेलीफोन लाइन के लिए लगे पोल उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन के केबल को लाने का माध्यम बने हुए हैं। काफी दूरी से बिजली केबल लाए जाने से आए दिन फॉल्ट की भी समस्या रहती है।


केस तीन

चीनी मिल बंद हो चुकी है लेकिन मिल के पास ही नवविकसित आबादी को मिल कॉलोनी नाम दिया गया है। यहां पर भी न तो आवागमन का सही से बंदोबस्त है न ही पानी निकासी के लिए नाली आदि बनी है। मोहल्लेवासियों के मुताबिक गर्मियों और सर्दियों में तो जैसे-तैसे काम चल जाता है। बरसात में जलभराव होता है और कीचड़ व गंदगी से आवागमन करना पड़ता है।


केस चार

सीतापुर रोड पर महोलिया शिवपार में भी नवविकसित आबादी में रहने वाले लोगों ने मकान बना लिए हैं लेकिन यहां पर न तो जलापूर्ति की व्यवस्था है और न ही आवागमन के लिए मार्ग बने हैं। कच्चे मार्गों से ही इस मोहल्ला के लोगों को आवागमन करना होता है। बरसात में स्थिति काफी दयनीय हो जाती है।


नगरीय क्षेत्र में नगर पालिका के माध्यम से काम कराने का प्रयास किया जा रहा है। आमजन तक सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास है। कौशलपुरी में बिना तार के बिजली के खंभे लगे होने के संबंध में कई बार पत्र लिखा गया लेकिन तार नहीं पड़ सके। -सुखसागर मिश्र मधुर, नगर पालिका अध्यक्ष


शहर के आसपास की ग्राम पंचायतों में तेजी से रिहायशी क्षेत्र बढ़ा है। आबादी और मकानों की तुलना में काम नहीं हो पाए होंगे। संबंधित ग्राम पंचायतों से जरूरी कार्यों को प्राथमिकता पर कार्ययोजना में शामिल कराया जाएगा। -श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ
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