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रावण के अत्याचार से कांपी धरती
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 28 Jan 2015 12:46 AM IST
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नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला में रावण कुंभकरण
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तथा विभीषण की तपस्या और रावण के अत्याचारों की लीला का मंचन किया गया।
गोविंद गोपाल लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों ने भावपूर्ण ढंग से लीला को
प्रस्तुत किया। राजसी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपने भावपूर्ण मंचन से
लोगों को भाव विभोर कर दिया। संगीतमय दोहा और छंदों ने दर्शकों को अभिभूत
कर दिया।
रामलीला मेला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में सोमवार को रावण कुंभकरण और विभीषण की तपस्या तथा मंगलवार को रावण के अत्याचारों से घबराई पृथ्वी की व्याकुलता की लीला का मंचन किया गया। कलाकाराें ने रावण और उसके भाइयों के जन्म की लीला को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से अभिनीत किया।
मंचन में रावण और उनके भाइयों का जन्म तथा शक्तियां एकत्र करने के लिए तपस्या करने की लीला का मंचन किया गया। मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि रावण के अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में साधु दुखी होकर उसे श्राप देते हैं कि ऋषियों का रक्त तू जहां रखेगा वहां 12 साल का अकाल पड़ेगा।
रावण जनक से बैर रखता है, इसलिए वह रक्त के घड़े को जनक के राज्य में छिपा देता है। इधर, मेघनाद को देवताओं से युद्ध करने को भेजता है। मेघनाद और देवराज इंद्र में जोरदार युद्ध होता है। अंत में इंद्र को बंदी बना लिया जाता है। इधर रावण के अत्याचारों से पृथ्वी घबरा जाती है और रसातल में जाने का प्रण कर लेती है।
जिससे भयभीत होकर देवता ब्रह्मा के पास जाते हैं। ब्रह्मा कहते हैं कि नारायण रक्षा करेंगे, तभी नारायण आकाशवाणी करते हैं कि देवता मैं तुम्हारे लिए पृथ्वी पर मनुष्य रूप में अवतरित होकर रावण का सर्वनाश करूंगा। इस मौके पर रामप्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।
रामलीला मेला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में सोमवार को रावण कुंभकरण और विभीषण की तपस्या तथा मंगलवार को रावण के अत्याचारों से घबराई पृथ्वी की व्याकुलता की लीला का मंचन किया गया। कलाकाराें ने रावण और उसके भाइयों के जन्म की लीला को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से अभिनीत किया।
मंचन में रावण और उनके भाइयों का जन्म तथा शक्तियां एकत्र करने के लिए तपस्या करने की लीला का मंचन किया गया। मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि रावण के अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में साधु दुखी होकर उसे श्राप देते हैं कि ऋषियों का रक्त तू जहां रखेगा वहां 12 साल का अकाल पड़ेगा।
रावण जनक से बैर रखता है, इसलिए वह रक्त के घड़े को जनक के राज्य में छिपा देता है। इधर, मेघनाद को देवताओं से युद्ध करने को भेजता है। मेघनाद और देवराज इंद्र में जोरदार युद्ध होता है। अंत में इंद्र को बंदी बना लिया जाता है। इधर रावण के अत्याचारों से पृथ्वी घबरा जाती है और रसातल में जाने का प्रण कर लेती है।
जिससे भयभीत होकर देवता ब्रह्मा के पास जाते हैं। ब्रह्मा कहते हैं कि नारायण रक्षा करेंगे, तभी नारायण आकाशवाणी करते हैं कि देवता मैं तुम्हारे लिए पृथ्वी पर मनुष्य रूप में अवतरित होकर रावण का सर्वनाश करूंगा। इस मौके पर रामप्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र आदि मौजूद थे।