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तालाब निर्माण में गोलमाल करने वाले दो जेई नपेंगे
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हरदोई। मत्स्य विभाग द्वारा संचालित नीली क्रांति योजना के तहत तालाब निर्माण में गोलमाल का मामला प्रकाश में आया है।
जांच रिपोर्ट में हुए इस गोलमाल के खुलासे के बाद सीडीओ आकांक्षा राना ने आरईएस के दो अवर अभियंताओं को निलंबित करने की संस्तुति करने के साथ विभागीय अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
सीडीओ आकांक्षा राना ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में बनाए गए तालाबों का भौतिक सत्यापन कराने के लिए जांच टीम गठित की थी।
जांच टीम में सहायक अभियंता डीआरडीए राजेश कुमार एवं भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम नरोत्तम कुमार ने तकनीकी टीम के साथ निरीक्षण कर जांच की, जिसमें अनवर अली के बेटे लाभार्थी अहसान अली निवासी मलैया, संडीला के तालाब आदि कार्य एमबी की माप के अनुरूप नहीं पाए गए।
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इसी प्रकार रामचंद्र की पत्नी सुनीता जायसवाल निवासी गल्ला मंडी, संडीला के तालाब कार्य में भट्ठे के गड्डे को बंधा बनाकर तालाब के रूप में दर्शाना, पाया गया।
इसी तरह योजना की लाभार्थी रजनी गुप्ता निवासी ग्राम मंगलीपुरवा, ब्लाक अहरोरी के तालाब आदि कार्य मानक पर नहीं पाए गए। लाभार्थी द्वारा मत्स्य पालन भी नहीं किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ ने मत्स्य विभाग से स्पष्टीकरण तलब करते हुए आख्या मांगी थी।
आख्या मिलने के बाद सीडीओ द्वारा एक और जांच कमेटी से तीनों प्रकरणों की जांच कराई गई। इस जांच रिपोर्ट में कहा गया कि तीनों कार्यों में अनियमितताएं की गई हैं।
वर्तमान विभागीय अधिकारियों एवं अभियंत्रण अधिकारियों द्वारा गलत आख्या लगाई गई। इस पर सीडीओ ने प्रभावी विभागीय कार्यवाही के लिए मत्स्य निदेशक को संस्तुति पत्र भेजा है।
इसके साथ ही तकनीकी पर्यवेक्षण एवं एमबी करने के लिए उत्तरदायी ग्रामीण अभियंत्रण विभागके अवर अभियंता, शब्बर जैदी एवं संजीव दीक्षित के विरुद्ध निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति पत्र मुख्य अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को भेजा गया है।
मामले के प्रमुख बिंदु
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि लाभार्थी अहसान अली को एक हेेक्टेयर में तालाब बनाना था, जिसके लिए दो लाख 80 हजार अनुदान दिया गया, लेकिन मौके पर कोई कार्य मेजरमेंट बुक एमबी के अनुसार नहीं पाया गया।
लाभार्थी सुनीता जायसवाल को चार लाख 20 हजार अनुदान जारी किया गया, पर भट्ठे के गड्ढे को तालाब दिखा दिया गया। लाभार्थी रजनी गुप्ता को तीन लाख 36 हजार का अनुदान दिया, लेकिन मौके पर कोई कार्य मानक अनुरूप नहीं पाया गया।
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जांच रिपोर्ट में हुए इस गोलमाल के खुलासे के बाद सीडीओ आकांक्षा राना ने आरईएस के दो अवर अभियंताओं को निलंबित करने की संस्तुति करने के साथ विभागीय अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
सीडीओ आकांक्षा राना ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में बनाए गए तालाबों का भौतिक सत्यापन कराने के लिए जांच टीम गठित की थी।
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जांच टीम में सहायक अभियंता डीआरडीए राजेश कुमार एवं भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम नरोत्तम कुमार ने तकनीकी टीम के साथ निरीक्षण कर जांच की, जिसमें अनवर अली के बेटे लाभार्थी अहसान अली निवासी मलैया, संडीला के तालाब आदि कार्य एमबी की माप के अनुरूप नहीं पाए गए।
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इसी प्रकार रामचंद्र की पत्नी सुनीता जायसवाल निवासी गल्ला मंडी, संडीला के तालाब कार्य में भट्ठे के गड्डे को बंधा बनाकर तालाब के रूप में दर्शाना, पाया गया।
इसी तरह योजना की लाभार्थी रजनी गुप्ता निवासी ग्राम मंगलीपुरवा, ब्लाक अहरोरी के तालाब आदि कार्य मानक पर नहीं पाए गए। लाभार्थी द्वारा मत्स्य पालन भी नहीं किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ ने मत्स्य विभाग से स्पष्टीकरण तलब करते हुए आख्या मांगी थी।
आख्या मिलने के बाद सीडीओ द्वारा एक और जांच कमेटी से तीनों प्रकरणों की जांच कराई गई। इस जांच रिपोर्ट में कहा गया कि तीनों कार्यों में अनियमितताएं की गई हैं।
वर्तमान विभागीय अधिकारियों एवं अभियंत्रण अधिकारियों द्वारा गलत आख्या लगाई गई। इस पर सीडीओ ने प्रभावी विभागीय कार्यवाही के लिए मत्स्य निदेशक को संस्तुति पत्र भेजा है।
इसके साथ ही तकनीकी पर्यवेक्षण एवं एमबी करने के लिए उत्तरदायी ग्रामीण अभियंत्रण विभागके अवर अभियंता, शब्बर जैदी एवं संजीव दीक्षित के विरुद्ध निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति पत्र मुख्य अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को भेजा गया है।
मामले के प्रमुख बिंदु
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि लाभार्थी अहसान अली को एक हेेक्टेयर में तालाब बनाना था, जिसके लिए दो लाख 80 हजार अनुदान दिया गया, लेकिन मौके पर कोई कार्य मेजरमेंट बुक एमबी के अनुसार नहीं पाया गया।
लाभार्थी सुनीता जायसवाल को चार लाख 20 हजार अनुदान जारी किया गया, पर भट्ठे के गड्ढे को तालाब दिखा दिया गया। लाभार्थी रजनी गुप्ता को तीन लाख 36 हजार का अनुदान दिया, लेकिन मौके पर कोई कार्य मानक अनुरूप नहीं पाया गया।