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Hardoi News: डायलिसिस की दो मशीनें खराब, मरीजों को करना पड़ रहा चार दिन का इंतजार
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हरदोई। जिले के मेडिकल कॉलेज में करीब दो वर्ष पहले शुरू हुई डायलिसिस यूनिट में किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
रोजाना काफी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों के लिए यूनिट में लगाई मशीनें अब नाकाफी साबित हो रही हैं, उसमें भी दो मशीनें खराब हो चुकी हैं। ऐसे में मरीजों को अपनी बारी के लिए तीन से चार दिन का इंतजार करना पड़ता है।
किडनी की कार्यक्षमता समाप्त हो जाने पर किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यकता होती है, लेकिन ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है तो मरीज को डायलिसिस कराना पड़ता है। वर्ष 2022 तक जिले में डायलिसिस की व्यवस्था नहीं थी, ऐसे में लोगों को डायलिसिस कराने के लिए लखनऊ जाना पड़ता था। जिले के मेडिकल कॉलेज में 13 दिसंबर 2022 को डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई। जहां मरीजों की नि:शुल्क डायलिसिस करने के लिए सेंटर तैयार कर 10 मशीनें लगाई गईं। यूनिट शुरू होने से मरीजों को राहत तो मिली, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने से अब उनको लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
जिले में अभी तक 203 मरीजों का पंजीकरण हुआ है और एक मरीज की सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है, ऐसे में 10 मशीनों के चलते डायलिसिस के लिए मरीजों को नंबर लगाना पड़ता है। वहीं, बीते कई दिनों से डायलिसिस की दो मशीनें खराब भी हो गई हैं। ऐसे में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होने के बावजूद आठ से 10 मरीजों की वेटिंग लगी रहती है। एक मरीज की डायलिसिस होने में करीब चार घंटे लगते हैं ऐसे में दोबारा नंबर आने में तीन से चार दिन का अतिरिक्त समय लग जाता है। सेंटर प्रभारी आयुष यादव ने बताया कि दो मशीनें खराब हैं। इन्हें जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा।
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डायलिसिस यूनिट शुरू होने से मरीजों को राहत तो मिली है, लेकिन उसमें अभी कुछ खामियां भी हैं। जानकारी के अनुसार एक डायलेजर से पांच डायलिसिस की जाती है। ऐसे में कई मरीज अपने डायलेजर साथ लेकर जाते हैं, ताकि इंफेक्शन से बच सकें। वहीं, मरीज की डायलिसिस तो निशुल्क होती है, लेकिन उसके साथ एक इंजेक्शन भी लगता है, जिसका खर्च मरीज को उठाना पड़ता है।
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रोजाना काफी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों के लिए यूनिट में लगाई मशीनें अब नाकाफी साबित हो रही हैं, उसमें भी दो मशीनें खराब हो चुकी हैं। ऐसे में मरीजों को अपनी बारी के लिए तीन से चार दिन का इंतजार करना पड़ता है।
किडनी की कार्यक्षमता समाप्त हो जाने पर किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यकता होती है, लेकिन ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है तो मरीज को डायलिसिस कराना पड़ता है। वर्ष 2022 तक जिले में डायलिसिस की व्यवस्था नहीं थी, ऐसे में लोगों को डायलिसिस कराने के लिए लखनऊ जाना पड़ता था। जिले के मेडिकल कॉलेज में 13 दिसंबर 2022 को डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई। जहां मरीजों की नि:शुल्क डायलिसिस करने के लिए सेंटर तैयार कर 10 मशीनें लगाई गईं। यूनिट शुरू होने से मरीजों को राहत तो मिली, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने से अब उनको लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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जिले में अभी तक 203 मरीजों का पंजीकरण हुआ है और एक मरीज की सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है, ऐसे में 10 मशीनों के चलते डायलिसिस के लिए मरीजों को नंबर लगाना पड़ता है। वहीं, बीते कई दिनों से डायलिसिस की दो मशीनें खराब भी हो गई हैं। ऐसे में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होने के बावजूद आठ से 10 मरीजों की वेटिंग लगी रहती है। एक मरीज की डायलिसिस होने में करीब चार घंटे लगते हैं ऐसे में दोबारा नंबर आने में तीन से चार दिन का अतिरिक्त समय लग जाता है। सेंटर प्रभारी आयुष यादव ने बताया कि दो मशीनें खराब हैं। इन्हें जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा।
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डायलिसिस यूनिट शुरू होने से मरीजों को राहत तो मिली है, लेकिन उसमें अभी कुछ खामियां भी हैं। जानकारी के अनुसार एक डायलेजर से पांच डायलिसिस की जाती है। ऐसे में कई मरीज अपने डायलेजर साथ लेकर जाते हैं, ताकि इंफेक्शन से बच सकें। वहीं, मरीज की डायलिसिस तो निशुल्क होती है, लेकिन उसके साथ एक इंजेक्शन भी लगता है, जिसका खर्च मरीज को उठाना पड़ता है।