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ढूढे नहीं मिल रहे पटरी दुकानदार, जिले भर की निकाय बेहाल
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फोटो-20-अभी हाल में ही श्रीश्चंद्र बारात घर में लगे शिविर में पंजीकरण प्रपत्र लेते स्वनिधि योजना क?
- फोटो : HARDOI
हरदोई। पटरी दुकानदारों के अतिक्रमण से भले ही शहर जाम से बेहाल हो पर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में पंजीकरण के लिए जिले की निकायों को दुकानदार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। निकाय लक्ष्य का महज 51 फीसद ही पंजीकरण करा पायें हैं, जबकि वित्तीय वर्ष बीतने में अब कुछ दिन ही शेष हैं।
जिले में भी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के रेहड़ी और पटरी दुकानदारों को एक साल के लिए 10 हजार रुपये का ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जा रहा है। इसका लाभ दिलाने के लिए नगर पालिका शहर के वार्डों में बाकायदा शिविर लगा चुकी है।
सभासदों के माध्यम से पटरी दुकानदारों को प्रेरित कर रही है। बैंकों से भी समय-समय पर बैठकें करके इनको ऋण स्वीकृत करवा रही हैं। इसके बाद भी पटरी दुकानदार पालिका को इतने नहीं मिल रहे कि उनका लक्ष्य आसानी से पूरा हो सके। शासन ने इस वित्तीय वर्ष में जिले की 13 निकायों के लिए पटारी दुकानदारों के पंजीकरण का लक्ष्य 13538 कर दिया गया, लेकिन निकायों ने पहाड़ जैसे लक्ष्य को पूरा करने में हाथ खड़े कर दिए और लक्ष्य घटाने की मांग की।
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इसके बाद शासन घटाकर लक्ष्य 7432 कर दिया। इसमें भी अभी तक 3820 पंजीकरण ही कराया जा सका है। नगर पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि प्रयास हर निकाय से हो रहा है, लेकिन फेरी वाले आगे नहीं आ रहे हैं। ये लोग बैंकों के झंझट से दूर भाग रहे हैं। पटरी दुकानदार कहते हैं कि 10 हजार रुपये का ऋण लेने से खास फायदा नहीं, इसलिए लक्ष्य पूरा करने में दिक्कतें आ रहीं। फिर भी सभी सभासदों और निकाय कर्मियों को लगाकर टारगेट पूरा किया जा रहा है। शहर में मार्च में 939 रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं।
अभी तक नहीं आया खाते में पैसा
कृष्ण नगरिया निवासी अशोक श्रीवास्तव का कहना है कि शुरुआती दौर में ही जब कैंप मोहल्ले में लगा था तो आवेदन किया था, लेकिन अभी तक खाते में धनराशि नहीं आई है। कई बार बैंक भी गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इस कारण बैंक ही जाना छोड़ दिया। यही कारण ही ज्यादातर पटरी दुकानदार योजना के तहत ऋण लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
समय पर चुकाने पर मिलती है छूट : ईओ
ईओ रविशंकर शुक्ल का कहना है स्वनिधि योजना पटरी दुकानदारों के हक में हैं। बैंकों की भागदौड़ से शायद पटरी दुकानदार व फेरी वाले आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। बताया कि योजना में 10 हजार ऋण दिया जाता है।
बैंक तकरीबन 12 फीसदी ब्याज लगातेे हैं, लेकिन समय पर भुगतान पर लाभार्थी को ब्याज पर सात फीसदी सब्सिडी मिल जाती है। इसके अलावा ऑनलाइन लेनदेन करने पर 1200 रुपये की वापसी भी होती है। ऐसी स्थिति में उनको 10 हजार रुपये पर कुछ भी नहीं देना होता। ब्याज की राशि कहीं न कहीं वापस ही आ जाती।
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जिले में भी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के रेहड़ी और पटरी दुकानदारों को एक साल के लिए 10 हजार रुपये का ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जा रहा है। इसका लाभ दिलाने के लिए नगर पालिका शहर के वार्डों में बाकायदा शिविर लगा चुकी है।
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सभासदों के माध्यम से पटरी दुकानदारों को प्रेरित कर रही है। बैंकों से भी समय-समय पर बैठकें करके इनको ऋण स्वीकृत करवा रही हैं। इसके बाद भी पटरी दुकानदार पालिका को इतने नहीं मिल रहे कि उनका लक्ष्य आसानी से पूरा हो सके। शासन ने इस वित्तीय वर्ष में जिले की 13 निकायों के लिए पटारी दुकानदारों के पंजीकरण का लक्ष्य 13538 कर दिया गया, लेकिन निकायों ने पहाड़ जैसे लक्ष्य को पूरा करने में हाथ खड़े कर दिए और लक्ष्य घटाने की मांग की।
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इसके बाद शासन घटाकर लक्ष्य 7432 कर दिया। इसमें भी अभी तक 3820 पंजीकरण ही कराया जा सका है। नगर पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि प्रयास हर निकाय से हो रहा है, लेकिन फेरी वाले आगे नहीं आ रहे हैं। ये लोग बैंकों के झंझट से दूर भाग रहे हैं। पटरी दुकानदार कहते हैं कि 10 हजार रुपये का ऋण लेने से खास फायदा नहीं, इसलिए लक्ष्य पूरा करने में दिक्कतें आ रहीं। फिर भी सभी सभासदों और निकाय कर्मियों को लगाकर टारगेट पूरा किया जा रहा है। शहर में मार्च में 939 रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं।
अभी तक नहीं आया खाते में पैसा
कृष्ण नगरिया निवासी अशोक श्रीवास्तव का कहना है कि शुरुआती दौर में ही जब कैंप मोहल्ले में लगा था तो आवेदन किया था, लेकिन अभी तक खाते में धनराशि नहीं आई है। कई बार बैंक भी गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इस कारण बैंक ही जाना छोड़ दिया। यही कारण ही ज्यादातर पटरी दुकानदार योजना के तहत ऋण लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
समय पर चुकाने पर मिलती है छूट : ईओ
ईओ रविशंकर शुक्ल का कहना है स्वनिधि योजना पटरी दुकानदारों के हक में हैं। बैंकों की भागदौड़ से शायद पटरी दुकानदार व फेरी वाले आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। बताया कि योजना में 10 हजार ऋण दिया जाता है।
बैंक तकरीबन 12 फीसदी ब्याज लगातेे हैं, लेकिन समय पर भुगतान पर लाभार्थी को ब्याज पर सात फीसदी सब्सिडी मिल जाती है। इसके अलावा ऑनलाइन लेनदेन करने पर 1200 रुपये की वापसी भी होती है। ऐसी स्थिति में उनको 10 हजार रुपये पर कुछ भी नहीं देना होता। ब्याज की राशि कहीं न कहीं वापस ही आ जाती।