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Hardoi News: खुद को बचाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर पर फोड़ दिया ठीकरा
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हरदोई। मनरेगा के तहत सामग्री अंश के भुगतान पर रोक लगने के बाद बिल डिलीट किए जाने के मामले में अफसरों ने पूरा ठीकरा हरपालपुर के तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर पर फोड़ दिया है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इसके लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को दोषी मानते हुए उसकी सेवाएं समाप्त करने की बात कही गई है। हालांकि कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं काफी पहले ही समाप्त हो चुकी हैं।
बीती 30 सितंबर के अंक में अमर उजाला ने ‘भुगतान पर रोक लगी, तो डिलीट कर दिए 7.12 करोड़ के बिल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर को संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब मांगा गया था। जिम्मेदारों को बचाने के लिए मनरेगा उपायुक्त ने डिलीट किए गए बिलों के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को जिम्मेदार ठहरा दिया। इतना ही नहीं शासन को भेजी गई रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त ने यह भी लिखा है कि उक्त प्रकरण में जिला कार्यक्रम समन्वयक यानी डीएम के निर्देश पर हरपालपुर के कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त कर दी गई है।
शासन को भेजी रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह ने लिखा है कि नियम संगत नहीं होने के कारण बिल डिलीट कराए गए थे। मार्च 2023 में तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर आशुतोष उत्तम ने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी और लेखाकार की बिना अनुमति के ही कई ऐसे बिल फीड कर दिए थे जो गलत थे। मामला संज्ञान में आने पर वित्तीय अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से अनाधिकृत बिल बाउचर डिलीट कराए गए। शासन को भेजी रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त ने यह भी लिखा है कि लेखाकार और बीडीओ को बताए बिना ही गलत बिल बाउचर फीड करने के कारण जिलाधिकारी के आदेशों पर कंप्यूटर ऑपरेटर आशुतोष उत्तम को कार्य मुक्त किया गया है।
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इनसेट
बीडीओ को बचाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को करार दिया दोषी
महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन खंड विकास अधिकारी को कार्रवाई से बचाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को बिल डिलीट करने का दोषी ठहरा दिया गया। दरअसल एक दूसरे मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ डीएम एमपी सिंह के निर्देश पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। एक ही कार्रवाई से दो मामले निपटाने के उद्देश्य से ऐसी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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बीती 30 सितंबर के अंक में अमर उजाला ने ‘भुगतान पर रोक लगी, तो डिलीट कर दिए 7.12 करोड़ के बिल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर को संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब मांगा गया था। जिम्मेदारों को बचाने के लिए मनरेगा उपायुक्त ने डिलीट किए गए बिलों के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को जिम्मेदार ठहरा दिया। इतना ही नहीं शासन को भेजी गई रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त ने यह भी लिखा है कि उक्त प्रकरण में जिला कार्यक्रम समन्वयक यानी डीएम के निर्देश पर हरपालपुर के कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त कर दी गई है।
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शासन को भेजी रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह ने लिखा है कि नियम संगत नहीं होने के कारण बिल डिलीट कराए गए थे। मार्च 2023 में तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर आशुतोष उत्तम ने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी और लेखाकार की बिना अनुमति के ही कई ऐसे बिल फीड कर दिए थे जो गलत थे। मामला संज्ञान में आने पर वित्तीय अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से अनाधिकृत बिल बाउचर डिलीट कराए गए। शासन को भेजी रिपोर्ट में मनरेगा उपायुक्त ने यह भी लिखा है कि लेखाकार और बीडीओ को बताए बिना ही गलत बिल बाउचर फीड करने के कारण जिलाधिकारी के आदेशों पर कंप्यूटर ऑपरेटर आशुतोष उत्तम को कार्य मुक्त किया गया है।
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बीडीओ को बचाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को करार दिया दोषी
महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन खंड विकास अधिकारी को कार्रवाई से बचाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर को बिल डिलीट करने का दोषी ठहरा दिया गया। दरअसल एक दूसरे मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ डीएम एमपी सिंह के निर्देश पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। एक ही कार्रवाई से दो मामले निपटाने के उद्देश्य से ऐसी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।