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Hardoi News: यह सरकारी महिला अस्पताल है... यहां मुफ्त में न स्ट्रेचर मिलता न प्रसव के बाद नवजात

Tue, 17 Jun 2025 10:43 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Jun 2025 10:43 PM IST
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This is a government women hospital... Neither stretcher is available free here nor newborn after delivery
हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय की व्यवस्थाएं सुधर नहीं पा रही हैं। भले ही शासन की ओर से यहां सारी सुविधाएं निशुल्क देने की व्यवस्था हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
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गर्भवतियों काे लेबर रूम तक पहुंचाने के लिए 400 रुपये स्वास्थ्य कर्मी मांगते हैं। प्रसव के बाद जब तक प्रसूता के परिजनों की जेब ढीली न हो जाए तब तक नवजात को परिजनों को सौंपा ही नहीं जाता। इसी तरह प्रसव के बाद एंबुलेंस से घर भिजवाने के नाम पर भी वसूली होती है। पेश है एक रिपोर्ट -
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पांच सौ रुपये वसूल लिए, तब गोद में दी बिटिया

केस-1- हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत घुसेहरा गांव निवासी रंजीत अपनी पत्नी शीला का प्रसव कराने के लिए सोमवार सुबह छह बजे महिला चिकित्सालय आए थे। सामान्य प्रसव से शीला ने बेटी को जन्म दिया। शीला देवी की सास राजवती ने बताया कि उनकी बहू को लेबर रूम से निकालकर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, बच्चे को तब तक नहीं दिया, जब तक उन्होंने कर्मचारियों को 500 रुपये नहीं दिए। बताया कि मिठाई खाने के लिए कर्मचारियों ने उनसे पैसे लिए हैं।
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लेबर रूम तक स्ट्रेचर से पहुंचाने के 400 रुपये मांगे, 150 रुपये में बनी बात

केस-2- बघौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव घुनहइया निवासी सिराजुद्दीन ने अपनी पत्नी आसिया बानो को सोमवार शाम चार बजे भर्ती कराया था। बताया कि कुछ देर बाद उनको एक बेटा हुआ। उनकी पत्नी को लेबर रूम लेकर जाना था, लेकिन कर्मचारी स्ट्रेचर नहीं दे रहे थे। स्ट्रेचर के लिए 400 रुपये मांगे जा रहे थे। सास हनीफा ने बताया कि रुपयों की अधिक मांग किए जाने को लेकर कर्मचारियों से काफी बहस भी करनी पड़ी। इसके बाद वह 150 रुपये में राजी हुए। पैसे मिलने के बाद कर्मचारियों ने स्ट्रेचर उपलब्ध कराई। इसी तरह दानियालगंज निवासी स्वदेश गुप्ता की पत्नी रिंकी को भी लेबर रूम तक ले जाने के लिए परिजनों से 400 चार सौ रुपये की डिमांड की गई।



निशुल्क एंबुलेंस के लिए अदा करने पड़े 350 रुपये
हरदाेई। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 102 एंबुलेंस सेवा प्रसूताओं को अस्पताल तक लाने और डिलीवरी के बाद घर तक ले जाने के लिए निशुल्क दी गई है। इसके बावजूद महिला अस्पताल में लगे एंबुलेंस कर्मी परिजनों से सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि घर तक जाने में डीजल खर्च होता है। अन्य साधन मंगवाएंगे तो उसमें भी पैसे देने ही पड़ेंगे। मंगलवार को भी हरियावां निवासी कल्पना की छुट्टी होने के बाद परिजनों ने एंबुलेंस कर्मियों को 350 रुपये देकर एंबुलेंस मंगवाई। प्रसूता को घर छोड़ने से पहले ही अस्पताल परिसर में ही परिजनों से पूरे पैसे गिनवाकर रखवा लिए गए।



महिला अस्पताल में मरीजों से लिए जा रहे पैसों के मामले में जांच कराई जाएगी। कोई कर्मचारी पैसे ले रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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