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Hardoi News: छात्रों से वसूलते थे 30 हजार रुपये, 500 रुपये में लिखवाते थे कॉपियां
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हरदोई। बोर्ड परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करवाने के लिए विद्यार्थियों से 20 से 30 हजार रुपये वसूले जाते थे। एक विषय की कॉपी लिखने के लिए सॉल्वर को चार सौ से पांच सौ रुपये दिए जाते थे। जय सुभाष महाबली इंटर कॉलेज दलेलनगर के केंद्र व्यवस्थापक, प्रधानाचार्य और परीक्षा प्रभारी ने हिरासत में पूछताछ के दौरान एसटीएफ को यह जानकारी दी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए एसटीएफ ने शुक्रवार को छापा डाला था। दलेलनगर में स्थित जय सुभाष महाबली इंटर कॉलेज में छापे के दौरान एसटीएफ ने नैरा निवासी केंद्र व्यवस्थापक राममिलन सिंह और उसके पुत्र परीक्षा प्रभारी मनीष सिंह को हिरासत में लिया था।
पूछताछ में इन लोगों ने एसटीएफ को बताया कि सॉल्वरों से लिखवाई गई कॉपियों को पास ही बने घर में रखवाया गया है। एसटीएफ ने जब घर जाकर जांच की तो यहां मौजूद दो लड़कियों ने दो कॉपी लिखने की जानकारी दी। यह भी बताया कि जो काॅपियां लिखी गईं हैं वह शिक्षक शारदा प्रसाद ले गए हैं। शारदा प्रसाद ने काॅपियों को परीक्षा प्रभारी की कार में रखे जाने की जानकारी दी। इस पर जब कार की तलाशी हुई तो कार में चालक की सीट के पीछे वाली सीट पर हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की लिखी हुई 11 कापियां मिलीं।
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एसटीएफ टीम के सामने केंद्र व्यवस्थापक और परीक्षा प्रभारी ने राजफाश किया कि बाहर से हल कराई गई कापियों को अंदर विद्यार्थियों की ओर से लिखी कॉपियों से बदलकर बंडल में रखवा दिया जाता है, जबकि विद्यार्थी को दी जाने वाली कापी को नष्ट करा देते थे। एसटीएफ को बाहर और परीक्षा केंद्र के अंदर मिली कापियों पर केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक के हस्ताक्षर भी मिले हैं।
प्रबंधक के दबाव में होती थी नकल, व्हाट्सएप से आता था प्रश्न पत्र
कटियामऊ गढ़ी में स्थित जगन्नाथ सिंह पब्लिक इंटर कॉलेज के मालिक और प्रबंधक अनिल सिंह के आवास पर भी एसटीएफ ने सॉल्वरों को पकड़ा है। यहां हाईस्कूल की अंग्रेजी के साथ ही इंटरमीडिएट की कृषि अर्थशास्त्र विषय की उत्तर पुस्तिकाएं भी मिली हैं। गिरफ्तार किए गए गाजू निवासी अध्यापक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने एसटीएफ को बताया कि वह विद्यालय में ही कोचिंग भी चलाते हैं। कॉलेज के प्रबंधक अनिल सिंह के दबाव में उनके मकान में साॅल्वरों के माध्यम से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रश्न पत्र हल कराए जाते हैं। प्रश्न पत्र व्हाट्सएप पर भेजे जाते हैं। सादी कापियां और प्रश्न पत्र विद्यालय के लिपिक सचिन गुप्ता की ओर से मिलती थीं और उन्हीं के माध्यम से जमा कराई जाती थीं। साल्वर उनकी ओर से लिखे गए सवालों के जवाब को काॅपियाें पर लिखते थे और वस्तुनिष्ठ सवालों के जवाब बोल-बोलकर लिखवाए जाते थे।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए एसटीएफ ने शुक्रवार को छापा डाला था। दलेलनगर में स्थित जय सुभाष महाबली इंटर कॉलेज में छापे के दौरान एसटीएफ ने नैरा निवासी केंद्र व्यवस्थापक राममिलन सिंह और उसके पुत्र परीक्षा प्रभारी मनीष सिंह को हिरासत में लिया था।
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पूछताछ में इन लोगों ने एसटीएफ को बताया कि सॉल्वरों से लिखवाई गई कॉपियों को पास ही बने घर में रखवाया गया है। एसटीएफ ने जब घर जाकर जांच की तो यहां मौजूद दो लड़कियों ने दो कॉपी लिखने की जानकारी दी। यह भी बताया कि जो काॅपियां लिखी गईं हैं वह शिक्षक शारदा प्रसाद ले गए हैं। शारदा प्रसाद ने काॅपियों को परीक्षा प्रभारी की कार में रखे जाने की जानकारी दी। इस पर जब कार की तलाशी हुई तो कार में चालक की सीट के पीछे वाली सीट पर हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की लिखी हुई 11 कापियां मिलीं।
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एसटीएफ टीम के सामने केंद्र व्यवस्थापक और परीक्षा प्रभारी ने राजफाश किया कि बाहर से हल कराई गई कापियों को अंदर विद्यार्थियों की ओर से लिखी कॉपियों से बदलकर बंडल में रखवा दिया जाता है, जबकि विद्यार्थी को दी जाने वाली कापी को नष्ट करा देते थे। एसटीएफ को बाहर और परीक्षा केंद्र के अंदर मिली कापियों पर केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक के हस्ताक्षर भी मिले हैं।
प्रबंधक के दबाव में होती थी नकल, व्हाट्सएप से आता था प्रश्न पत्र
कटियामऊ गढ़ी में स्थित जगन्नाथ सिंह पब्लिक इंटर कॉलेज के मालिक और प्रबंधक अनिल सिंह के आवास पर भी एसटीएफ ने सॉल्वरों को पकड़ा है। यहां हाईस्कूल की अंग्रेजी के साथ ही इंटरमीडिएट की कृषि अर्थशास्त्र विषय की उत्तर पुस्तिकाएं भी मिली हैं। गिरफ्तार किए गए गाजू निवासी अध्यापक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने एसटीएफ को बताया कि वह विद्यालय में ही कोचिंग भी चलाते हैं। कॉलेज के प्रबंधक अनिल सिंह के दबाव में उनके मकान में साॅल्वरों के माध्यम से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रश्न पत्र हल कराए जाते हैं। प्रश्न पत्र व्हाट्सएप पर भेजे जाते हैं। सादी कापियां और प्रश्न पत्र विद्यालय के लिपिक सचिन गुप्ता की ओर से मिलती थीं और उन्हीं के माध्यम से जमा कराई जाती थीं। साल्वर उनकी ओर से लिखे गए सवालों के जवाब को काॅपियाें पर लिखते थे और वस्तुनिष्ठ सवालों के जवाब बोल-बोलकर लिखवाए जाते थे।