{"_id":"4c180d32557c88732962ff87a38f9e4f","slug":"the-story-of-ram-krishna-without-incident-incomplete-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘बिना राम कथा के कृष्ण प्रसंग अपूर्ण’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘बिना राम कथा के कृष्ण प्रसंग अपूर्ण’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 18 Jan 2015 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आवास विकास कालोनी में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें
विज्ञापन
दिन शनिवार को कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत में 24 अवतारों का उल्लेख
है, जिसमें 22 अंशकालिक और दो पूर्णावतार हैं, जिन्हें राम और कृष्ण के नाम
से जाना जाता है। बिना राम की कथा के कृष्ण कथा अपूर्ण है।
कथा व्यास श्याम बृजवासी ने कहा कि राम और कृष्ण में से एक सूर्यवंशी हैं, तो दूसरे चंद्रवंशी। एक का अवतरण दिन के 12 बजे तो दूसरे का रात्रि के 12 बजे हुआ। एक जीने की कला सिखाते हैं तो दूसरे मृत्यु की। राजा परीक्षित को काल रूपी तक्षक के डसने से मृत्यु की समस्या सामने आ खड़ी हुई तो महाराज शुकदेव जी ने कथा सुनाई तो मृत्यु सुविधा बन गई।
कहा गया कि जिसने मरना सीख लिया जीने का अधिकार उसी को। उन्होंने कहा कि राम जी ने जो किया उसे हम करें और कृष्ण ने जो कहा उससे हम प्रेरणा लें। श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र का अवलोकन करने से प्रतीत होता है कि उनका समूचा जीवन ही संघर्षमय रहा। जन्म कारागार में हुआ। जन्मदाताओं की गोद में खेल नहीं पाए।
नवजात अवस्था में पूतना नामक राक्षसी आ धमकी। अनेकों असुर कई तरह के रूप धारण करके कृष्ण को मारने आए, पर वह फिर भी नहीं घबराए और डटकर मुकाबला किया। महाभारत जैसा युद्ध पांडवों को जिताकर स्वयं के यदुवंशियों से भी संघर्ष करना पड़ा। परिस्थितियां बाधक रहीं, फिर भी वह आगे बढ़ते रहे।
व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण का दांपत्य जीवन उपासनात्मक था, वासनात्मक नहीं था। यही कारण है कि उनके दांपत्य जीवन में कामदेव बनकर सिद्ध हुआ है, काम विलास नहीं बना। गोपियों के साथ आत्मीय प्रेम था। उन्होंने कहा कि क्रूर अत्याचारी कंस का श्रीकृष्ण ने विरोध किया और बृजवासियों को शोषण की कुटिल नीति से बचाया।
कहा कि परमात्मा कृष्ण राधा के वश में है धारा के नहीं। राधा अंर्तमुखी हैं तो धारा बहिर्मुखी है। कृष्ण ने परंपरा की तुलना में विवेक को महत्व दिया। इंद्र की पूजा परंपरागत ढंग से हो रही थी कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा करके गौ संवर्धन का अभियान चलाया। इस मौके पर सत्येंद्र सिंह, केके सिंह, पंजू, हरिहर सिंह आदि मौजूद थे।
कथा व्यास श्याम बृजवासी ने कहा कि राम और कृष्ण में से एक सूर्यवंशी हैं, तो दूसरे चंद्रवंशी। एक का अवतरण दिन के 12 बजे तो दूसरे का रात्रि के 12 बजे हुआ। एक जीने की कला सिखाते हैं तो दूसरे मृत्यु की। राजा परीक्षित को काल रूपी तक्षक के डसने से मृत्यु की समस्या सामने आ खड़ी हुई तो महाराज शुकदेव जी ने कथा सुनाई तो मृत्यु सुविधा बन गई।
कहा गया कि जिसने मरना सीख लिया जीने का अधिकार उसी को। उन्होंने कहा कि राम जी ने जो किया उसे हम करें और कृष्ण ने जो कहा उससे हम प्रेरणा लें। श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र का अवलोकन करने से प्रतीत होता है कि उनका समूचा जीवन ही संघर्षमय रहा। जन्म कारागार में हुआ। जन्मदाताओं की गोद में खेल नहीं पाए।
नवजात अवस्था में पूतना नामक राक्षसी आ धमकी। अनेकों असुर कई तरह के रूप धारण करके कृष्ण को मारने आए, पर वह फिर भी नहीं घबराए और डटकर मुकाबला किया। महाभारत जैसा युद्ध पांडवों को जिताकर स्वयं के यदुवंशियों से भी संघर्ष करना पड़ा। परिस्थितियां बाधक रहीं, फिर भी वह आगे बढ़ते रहे।
व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण का दांपत्य जीवन उपासनात्मक था, वासनात्मक नहीं था। यही कारण है कि उनके दांपत्य जीवन में कामदेव बनकर सिद्ध हुआ है, काम विलास नहीं बना। गोपियों के साथ आत्मीय प्रेम था। उन्होंने कहा कि क्रूर अत्याचारी कंस का श्रीकृष्ण ने विरोध किया और बृजवासियों को शोषण की कुटिल नीति से बचाया।
कहा कि परमात्मा कृष्ण राधा के वश में है धारा के नहीं। राधा अंर्तमुखी हैं तो धारा बहिर्मुखी है। कृष्ण ने परंपरा की तुलना में विवेक को महत्व दिया। इंद्र की पूजा परंपरागत ढंग से हो रही थी कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा करके गौ संवर्धन का अभियान चलाया। इस मौके पर सत्येंद्र सिंह, केके सिंह, पंजू, हरिहर सिंह आदि मौजूद थे।