{"_id":"4ddb07e4bf7b8e3346ee1d2943a986ca","slug":"the-silence-in-the-village-after-two-murders-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो हत्याओं के बाद गांव में सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो हत्याओं के बाद गांव में सन्नाटा
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अहेमी गांव में दो हत्याओं के बाद दूसरे दिन भी
विज्ञापन
सन्नाटा पसरा रहा। हिस्ट्रीशीटर के हाथों मारे गए किशोर और बाद में भीड़
द्वारा हिस्ट्रीशीटर को मार डालने की घटना के बाद गांव में चुनावी
सरगर्मियां भी ठहर कर रह गईं हैं। बालक की मौत से न केवल उसके घर पर बल्कि
अन्य घरों में भी चूल्हे नहीं जले।
उधर, प्रभारी निरीक्षक एलपी साहू ने बताया कि पंकज के पिता की तहरीर पर आरोपी वीरेंद्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था और भीड़ द्वारा आरोपी की हत्या के बाद अब किसी भी पक्ष पर कार्रवाई की जरूरत खत्म हो गई है। ज्ञात हो कि अहेमी गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र व पड़ोसी रामकरन गुप्ता के पुत्रों में झूला झूलने को लेकर विवाद हो गया था, जिस पर वीरेंद्र ने रामकरन के पुत्र पंकज उर्फ भूरा (15) की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इससे नाराज लोगोें ने वीरेंद्र को पीट पीट कर मार डाला था। देर रात पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाए जाते ही दोनों मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। पंकज की मौत के बाद उसके माता-पिता समेत परिवार के अन्य सदस्य कुछ भी खाए-पीए बगैर उदास बैठे रहे। गम में पड़ोसियों ने भी अपने चूल्हे जलाने से परहेज किया।
दूसरे दिन पंकज का गांव के बाहर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि वीरेंद्र की चिता का भी दाह संस्कार कर दिया गया। उधर, पंकज के साथी बच्चों पर भी उसकी मौत का गहरा सदमा हुआ है। पंकज के साथ मिलकर खेलने वाले बच्चे भी उसी घर के बाहर उदास चेहरे लिए बैठे दिखाई दिए।
उदास बच्चों शिवेंद्र, विजय कुमार, नागेंद्र सिंह व कुलदीप के परिजनाें ने बताया कि इन बच्चों ने साथी की मौत पर दुखी होकर शाम से ही खाना छोड़ रखा है। बार-बार बुलाने पर भी वह उसके घर से आसपास से नहीं हट रहे हैं।
उधर, प्रभारी निरीक्षक एलपी साहू ने बताया कि पंकज के पिता की तहरीर पर आरोपी वीरेंद्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था और भीड़ द्वारा आरोपी की हत्या के बाद अब किसी भी पक्ष पर कार्रवाई की जरूरत खत्म हो गई है। ज्ञात हो कि अहेमी गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र व पड़ोसी रामकरन गुप्ता के पुत्रों में झूला झूलने को लेकर विवाद हो गया था, जिस पर वीरेंद्र ने रामकरन के पुत्र पंकज उर्फ भूरा (15) की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इससे नाराज लोगोें ने वीरेंद्र को पीट पीट कर मार डाला था। देर रात पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाए जाते ही दोनों मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। पंकज की मौत के बाद उसके माता-पिता समेत परिवार के अन्य सदस्य कुछ भी खाए-पीए बगैर उदास बैठे रहे। गम में पड़ोसियों ने भी अपने चूल्हे जलाने से परहेज किया।
दूसरे दिन पंकज का गांव के बाहर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि वीरेंद्र की चिता का भी दाह संस्कार कर दिया गया। उधर, पंकज के साथी बच्चों पर भी उसकी मौत का गहरा सदमा हुआ है। पंकज के साथ मिलकर खेलने वाले बच्चे भी उसी घर के बाहर उदास चेहरे लिए बैठे दिखाई दिए।
उदास बच्चों शिवेंद्र, विजय कुमार, नागेंद्र सिंह व कुलदीप के परिजनाें ने बताया कि इन बच्चों ने साथी की मौत पर दुखी होकर शाम से ही खाना छोड़ रखा है। बार-बार बुलाने पर भी वह उसके घर से आसपास से नहीं हट रहे हैं।