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Hardoi News: मेडिकल कॉलेजों में दूर नहीं हो रही दवाइयों की कमी, बाहर से खरीदना मजबूरी

Sun, 22 Feb 2026 10:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 10:56 PM IST
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The shortage of medicines in medical colleges is not getting resolved, forcing them to buy from outside.
हरदोई। मेडिकल कॉलेजों में दवाओं की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही। हालत यह है कि मरीजों को सामान्य एंटीबायोटिक, खांसी की दवा और यहां तक कि दर्द निवारक मरहम के लिए भी निजी मेडिकल स्टोर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार हर बार दवाओं की कमी को पूरा करने का कोरा आश्वासन देते हैं लेकिन कमी लगातार बनी हुई है।
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मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की लिखी जा रही अधिकांश दवाएं फार्मेसी में उपलब्ध नहीं हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद जब मरीज दवा लेने काउंटर पर पहुंचते हैं तो मरीजों को पर्चे पर लिखी आधी-अधूरी दवा देकर टरका दिया जाता है। दवा लेने आए 95 प्रतिशत मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। मरीज परिसर में चल रहे जन औषधि केंद्र पर सस्ती दवा लेने पहुंचते हैं तो वहां भी कुछ ही दवा मिलती है। तमाम दवाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर ही जाना पड़ रहा है। डाईक्लोफेनिक जेल ट्यूब, बीटाडीन और खांसी में प्रयोग किए जाने वाले कफ सिरप मिलते ही नहीं हैं। तमाम मरीज कफ सिरप खरीदने के लिए तीमारदारों को जेब ढीली करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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तीमारदारों पर पड़ रहा बोझ
मेडिकल कॉलेज में तमाम ऐसे मरीज आते हैं जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर होते हैं। इन मरीजों को निशुल्क दवाएं न मिलने से तीमारदारों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। तीमारदार अजय सिंह ने बताया कि पिछले दो दिनों में 1200 रुपये की दवाएं बाहर से खरीद चुके हैं। ऐसे में काफी परेशान होना पड़ रहा है।
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कागजों में राहत, हकीकत में आफत
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि फार्मेसी में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है लेकिन हकीकत यह है कि डॉक्टरों की लिखी जा रही अधिकांश दवाएं फार्मेसी में उपलब्ध नहीं हैं। गंभीर मरीजों के परिजनों का कहना है कि भर्ती होने के बाद उन्हें एक लंबी लिस्ट थमा दी जाती है जिसे बाहर से महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। सबसे ज्यादा संकट उन मरीजों के लिए है जो दूर-दराज के गांवों से उपचार की उम्मीद लेकर आते हैं।



दवाओं की आपूर्ति के लिए मांग पत्र भेजा गया है। कुछ दवाओं की कमी लॉजिस्टिक कारणों से हो सकती है जिसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।
-डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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