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नदी में ट्यूब, रस्सी के सहारे लगेगी डुबकी
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भरावन। 84 कोसी परिक्रमा की व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा चाक चौबंद कर ली गईं हैं। बृहस्पतिवार को सुबह से ही सीतापुर के प्रथम पड़ाव करोना, जबकि दूसरे पड़ाव पर शुक्रवार को रामादल हर्रैया पहुंचेगा।
साधु-संतों के स्वागत के लिए ढोल नगाड़े व फूल मालाओं की व्यवस्था की गई है। गोमती नदी में डुबकी लगाने के समय ट्यूब व रस्सी परिक्रमार्थियों का सहारा बनेंगी।
तपोभूमि नैमिषारण्य से 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत होने के बाद सीतापुर के प्रथम पड़ाव करोना से चलकर शुक्रवार की भोर हर्रैया पड़ाव पर आ जाएंगे। संडीला उपजिलाधिकारी देवेंद्र पाल सिंह, संडीला सीओ महावीर सिंह व अतरौली एसएचओ परिक्रमा के अध्यक्ष नंहक्कू दास व सचिव महंत संतोष दास का स्वागत फूल मालाओं से करेंगे।
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वहीं, ढोल नगाड़े बजाकर परिक्रमार्थियों का स्वागत किया जाएगा। स्वागत द्वार भी रोमांचक बना है। पड़ाव पर पानी के लिए टैंकर, शौच के लिए मोबाइल टॉयलेट, बिजली की व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
परिक्रमा में चौकसी के लिए पुलिस चौकी व स्वास्थ्य कर्मी जगह-जगह दवा के स्टाल लगाएंगे। दूर दराज से आए परिक्रमार्थियों के लिए कई जगहों पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
खास बात यह है कि देश के कोने-कोने के अलावा विदेशी श्रद्धालुओं के भी लोग दर्शन करने आते हैं। शुक्रवार को सुबह लाखों की संख्या में हर्रैया पड़ाव पर पहुंचे श्रद्धालुओं को 20 मीटर की खाई से गुजरकर नदी तक पहुंचना होगा।
हालांकि, अफसरों ने खाई से बचने के लिए खाई के किनारे किनारे मिट्टी डलवाकर इतिश्री कर ली। वहीं, 84 कोसी परिक्रमा के दूसरे पड़ाव हर्रैया पर तीन किमी की परिधि में बल्ब व हाईलोजन के उजाले की धूम होगी।
कई जगहों पर मोबाइल चार्ज करने व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग के लिए प्वाइंट दिए गए हैं, जिससे परिक्रमार्थी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी प्रयोग कर सकेंगे।
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साधु-संतों के स्वागत के लिए ढोल नगाड़े व फूल मालाओं की व्यवस्था की गई है। गोमती नदी में डुबकी लगाने के समय ट्यूब व रस्सी परिक्रमार्थियों का सहारा बनेंगी।
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तपोभूमि नैमिषारण्य से 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत होने के बाद सीतापुर के प्रथम पड़ाव करोना से चलकर शुक्रवार की भोर हर्रैया पड़ाव पर आ जाएंगे। संडीला उपजिलाधिकारी देवेंद्र पाल सिंह, संडीला सीओ महावीर सिंह व अतरौली एसएचओ परिक्रमा के अध्यक्ष नंहक्कू दास व सचिव महंत संतोष दास का स्वागत फूल मालाओं से करेंगे।
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वहीं, ढोल नगाड़े बजाकर परिक्रमार्थियों का स्वागत किया जाएगा। स्वागत द्वार भी रोमांचक बना है। पड़ाव पर पानी के लिए टैंकर, शौच के लिए मोबाइल टॉयलेट, बिजली की व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
परिक्रमा में चौकसी के लिए पुलिस चौकी व स्वास्थ्य कर्मी जगह-जगह दवा के स्टाल लगाएंगे। दूर दराज से आए परिक्रमार्थियों के लिए कई जगहों पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
खास बात यह है कि देश के कोने-कोने के अलावा विदेशी श्रद्धालुओं के भी लोग दर्शन करने आते हैं। शुक्रवार को सुबह लाखों की संख्या में हर्रैया पड़ाव पर पहुंचे श्रद्धालुओं को 20 मीटर की खाई से गुजरकर नदी तक पहुंचना होगा।
हालांकि, अफसरों ने खाई से बचने के लिए खाई के किनारे किनारे मिट्टी डलवाकर इतिश्री कर ली। वहीं, 84 कोसी परिक्रमा के दूसरे पड़ाव हर्रैया पर तीन किमी की परिधि में बल्ब व हाईलोजन के उजाले की धूम होगी।
कई जगहों पर मोबाइल चार्ज करने व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग के लिए प्वाइंट दिए गए हैं, जिससे परिक्रमार्थी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी प्रयोग कर सकेंगे।