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बारिश-ओले झेल चुके किसान अब टिड्डी दलों से आशंकित
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बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि के चलते पहले से ही परेशान किसान अब टिड्डी दलों के हमले को लेकर आशंकित हैं।
किसानों की आशंकाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर जनपद स्तर पर भी कंट्रोल रूम बना दिया है।
राजस्थान के रास्ते झांसी, ललितपुर, जालौन आदि में टिड्डी दलों के पहुंचने की सूचनाएं मिलने के बाद जिले में कृषि विभाग के जिम्मेदार सक्रिय हो गए हैं।
उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने बताया कि लगभग दो से तीन इंच लंबे कीट झुंड बनाकर चलते हैं। इन्हें टिड्डी दल कहा जाता है।
200 से 500 मीटर लंबाई और लगभग इतनी ही चौड़ाई के साथ पट्टीनुमा आकार में उड़ते हैं।
इसके बचाव के लिए किसानों को अपने खेतों में सिंचाई करनी चाहिए। उप निदेशक ने बताया कि क्लोरोपारीफास, लिंडा आदि कीटनाशकों का इस्तेमाल किसान टिड्डी दलों पर कर सकते हैं। इसको लेकर कंट्रोल रूम को जिला मुख्यालय पर बनाया गया है।
इसका टेलीफोन नंबर 05852-232056 है। इसके अलावा जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाइल नंबर 8279836504 पर भी जानकारी दी जा सकती है।
उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने बताया कि टिड्डी दल शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक खेत या जमीन पर बैठता है।
दिनभर टिड्डी दल हवा में घूमते रहते हैं, लेकिन शाम को सात बजे से विश्राम करते हैं। रात में विश्राम के दौरान ही खेत की फसल की सभी हरी पत्तियों को खा जाते हैं और इसके कारण फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है।
उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने किसानों से अपील की है कि टिड्डी दल के आक्रमण के समय अपने खेतों में ढोल-नगाड़े या थाली बजाकर आवाज करें। आग जलाकर, पटाखे फोड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि जोर की आवाज पर टिड्डी दल खेत में नहीं बैठ पाएंगे।
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किसानों की आशंकाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर जनपद स्तर पर भी कंट्रोल रूम बना दिया है।
राजस्थान के रास्ते झांसी, ललितपुर, जालौन आदि में टिड्डी दलों के पहुंचने की सूचनाएं मिलने के बाद जिले में कृषि विभाग के जिम्मेदार सक्रिय हो गए हैं।
उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने बताया कि लगभग दो से तीन इंच लंबे कीट झुंड बनाकर चलते हैं। इन्हें टिड्डी दल कहा जाता है।
200 से 500 मीटर लंबाई और लगभग इतनी ही चौड़ाई के साथ पट्टीनुमा आकार में उड़ते हैं।
इसके बचाव के लिए किसानों को अपने खेतों में सिंचाई करनी चाहिए। उप निदेशक ने बताया कि क्लोरोपारीफास, लिंडा आदि कीटनाशकों का इस्तेमाल किसान टिड्डी दलों पर कर सकते हैं। इसको लेकर कंट्रोल रूम को जिला मुख्यालय पर बनाया गया है।
इसका टेलीफोन नंबर 05852-232056 है। इसके अलावा जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाइल नंबर 8279836504 पर भी जानकारी दी जा सकती है।
उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने बताया कि टिड्डी दल शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक खेत या जमीन पर बैठता है।
दिनभर टिड्डी दल हवा में घूमते रहते हैं, लेकिन शाम को सात बजे से विश्राम करते हैं। रात में विश्राम के दौरान ही खेत की फसल की सभी हरी पत्तियों को खा जाते हैं और इसके कारण फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है।
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उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने किसानों से अपील की है कि टिड्डी दल के आक्रमण के समय अपने खेतों में ढोल-नगाड़े या थाली बजाकर आवाज करें। आग जलाकर, पटाखे फोड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि जोर की आवाज पर टिड्डी दल खेत में नहीं बैठ पाएंगे।
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