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बाहर खुला आसमां, नीचे करते इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Wed, 09 Sep 2015 12:02 AM IST
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जिला कारागार में गुनाहोें की सजा काट रहे बंदी और
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कैदियों से मिलाई करने वालों को जेल के बाहर कोई प्रतीक्षालय न होने से
खुले आसमां के नीचे घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में बारिश होने पर सिर
छिपाने के लिए उन्हें खासी दिक्कत होती। हैरत की बात है कि इसकी जानकारी
होने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर स्थित जिला कारागार के बाहर बंदियों से मिलाई करने वालों के बैठने के लिए अर्से पहले एक प्रतीक्षालय बनाया गया था, जो जर्जर हालत में पहुंच गया। बारिश के दौरान इसमें भी पानी टपकता है। इसके चलते लोगोें को जेल के बाहर खुले आसमां के नीचे अपने नंबर के आने का इंतजार करना पड़ता है।
मंगलवार को पूर्वाह्न पौने ग्यारह बजे एक ओर मिलाई के लिए नंबर लगाने वालाें की भीड़ लगी हुई थी, दूसरी ओर मुख्य गेट पर मिलने वालों की कतार लगी थी। भीड़ अधिक होने पर यह लाइन सड़क पर आ र्गई। ऐसे में तेज धूप से परेशान कुछ महिलाएं पेड़ के नीचे बैठ गई।
यहां लाइन मेें लगे रामकिशन, पप्पू, दीनदयाल, रामआसरे आदि ने बताया कि इससे पहले भी जब वह लोग यहां अपनों से मिलने के आए तो उन्हेें लाइन में लगकर काफी देर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान यदि बारिश होती है, तो मिलाई करने वालों को इधर-उधर ठिकाना खोजना पड़ता।
उधर, जिला कारागार मेें बंदियों की क्षमता करीब 800 है, जबकि इन दिनों करीब 1384 बंदी यहां बंद है। जेल प्रशासन की मानेे तो बंदियों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनकी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी गई हैं। जेल में बनी बैरकों में फिलहाल तो रहने की पर्याप्त जगह है, यदि यह संख्या बढ़ती है तो व्यवस्था गड़बड़ा भी सकती है।
जिला कारागार के सामने जेल कर्मियों के लिए वर्षों पहले बनाए गए क्वार्टर भी जर्जर हो चुके हैं। जिसके चलते उन्हें रहना भी जान जोखिम मेें डालने जैसा है। ऐसे में कुछ क्वार्टर खाली भी करा दिए गए।
पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर स्थित जिला कारागार के बाहर बंदियों से मिलाई करने वालों के बैठने के लिए अर्से पहले एक प्रतीक्षालय बनाया गया था, जो जर्जर हालत में पहुंच गया। बारिश के दौरान इसमें भी पानी टपकता है। इसके चलते लोगोें को जेल के बाहर खुले आसमां के नीचे अपने नंबर के आने का इंतजार करना पड़ता है।
मंगलवार को पूर्वाह्न पौने ग्यारह बजे एक ओर मिलाई के लिए नंबर लगाने वालाें की भीड़ लगी हुई थी, दूसरी ओर मुख्य गेट पर मिलने वालों की कतार लगी थी। भीड़ अधिक होने पर यह लाइन सड़क पर आ र्गई। ऐसे में तेज धूप से परेशान कुछ महिलाएं पेड़ के नीचे बैठ गई।
यहां लाइन मेें लगे रामकिशन, पप्पू, दीनदयाल, रामआसरे आदि ने बताया कि इससे पहले भी जब वह लोग यहां अपनों से मिलने के आए तो उन्हेें लाइन में लगकर काफी देर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान यदि बारिश होती है, तो मिलाई करने वालों को इधर-उधर ठिकाना खोजना पड़ता।
उधर, जिला कारागार मेें बंदियों की क्षमता करीब 800 है, जबकि इन दिनों करीब 1384 बंदी यहां बंद है। जेल प्रशासन की मानेे तो बंदियों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनकी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी गई हैं। जेल में बनी बैरकों में फिलहाल तो रहने की पर्याप्त जगह है, यदि यह संख्या बढ़ती है तो व्यवस्था गड़बड़ा भी सकती है।
जिला कारागार के सामने जेल कर्मियों के लिए वर्षों पहले बनाए गए क्वार्टर भी जर्जर हो चुके हैं। जिसके चलते उन्हें रहना भी जान जोखिम मेें डालने जैसा है। ऐसे में कुछ क्वार्टर खाली भी करा दिए गए।