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Hardoi News: मरीजों के दर्द का हमदर्द भी नहीं बन पा रहा मेडिकल कॉलेज
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हरदोई। जिले के मेडिकल कॉलेज में भले ही मरीजों की सहूलियतें बढ़ाई जा रही हों, लेकिन अस्पताल में मरीजों को दवाएं ही नहीं मिल रही हैं। गंभीर बीमारियों की दवाओं के इतर मामूली दर्द की दवा भी दवा काउंटरों पर उपलब्ध नहीं है। दर्द का एक डाइक्लो जेल ट्यूब तक पिछले दो माह से नहीं आया है। इसके अलावा कई दवाएं हैं, जो काउंटर पर नहीं मिल रही हैं। मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। दवा वितरण काउंटर पर चिकित्सकों की ओर से लिखी जाने वाली आधी दवाएं ही मिल रही हैं। मरीज चिकित्सीय परामर्श लेकर दवाएं लेने पहुंचते हैं, लेकिन काउंटर से आधी अधूरी दवाएं लेकर ही लौटते हैं। गंभीर बीमारियों की बात अगर न करें तो मामूली से दर्द की दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। दवा वितरण काउंटर पर डाइक्लो जेल ट्यूब बीते दो माह से नहीं है। दर्द की नेक्सडॉन, नारफ्लॉक्स टीजेड के अलावा बिजॉक्सीन, एलिटियाजोन, फलेक्सटाइन, बीकॉमप्लेक्स सहित मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन, क्लोबसेव, इथिस्लोन व किमराल समेत कई महत्वपूर्ण दवाएं जो बाहर मेडिकल स्टोर पर 100 से 150 रुपये में मिलती हैं, वह मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर नहीं हैं। मरीजों को मजबूरी में महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
केस-1- भरिगवां निवासी श्याम शरण को चलने फिरने में दिक्कत है, घुटनों में दर्द होता है। चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा लेने पहुंचे तो खाने की दवा मिली, लेकिन पर्चे में लिखा दर्द का ट्यूब नहीं मिला। बाहर से 65 रुपये का ट्यूब खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। दवा अस्पताल में मिलती तो खर्च बच जाता।
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केस-2- टड़ियावां के उनौती निवासी सुधाकर मिश्रा ने बताया कि वह चर्म रोग की दवा लेने आए थे, लेकिन दो दवाएं ही मिलीं। ट्यूब नहीं दिया गया। जो दवा नहीं मिली वह निजी मेडिकल स्टोर से लेकर आए। अस्पताल में सस्ती दवाएं मिलती हैं, लेकिन बाहर से दवा लेने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मरीजों के लिए 340 प्रकार की दवाएं, महत्वपूर्ण का टोटा
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में वैसे तो मरीजों के लिए 340 प्रकार की दवाएं सूचीबद्ध हैं, लेकिन महत्वपूर्ण दवाएं ही नदारद चल रही हैं। चिकित्सक से परामर्श के बाद जो दवाएं सबसे अधिक लिखी जा रही हैं। वह काउंटर पर मिलती ही नहीं हैं। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। इनमें से 24 प्रकार की टैबलेट नहीं हैं और आठ प्रकार के सिरप भी नहीं मिल रहे। इसी प्रकार के 15 प्रकार के कैप्सूल सहित कई इंजेक्शनों की अनुपलब्धता बनी हुई है।
दवाओं की कमी बनी हुई है, शासन स्तर से ही दवाएं कम मिल रही हैं। दूसरी ओर वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से बजट की कमी भी चल रही है, जो दवाएं काउंटर पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं। इसकी जानकारी कर दवा की कमी को जल्द पूरा किया जाएगा। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। दवा वितरण काउंटर पर चिकित्सकों की ओर से लिखी जाने वाली आधी दवाएं ही मिल रही हैं। मरीज चिकित्सीय परामर्श लेकर दवाएं लेने पहुंचते हैं, लेकिन काउंटर से आधी अधूरी दवाएं लेकर ही लौटते हैं। गंभीर बीमारियों की बात अगर न करें तो मामूली से दर्द की दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। दवा वितरण काउंटर पर डाइक्लो जेल ट्यूब बीते दो माह से नहीं है। दर्द की नेक्सडॉन, नारफ्लॉक्स टीजेड के अलावा बिजॉक्सीन, एलिटियाजोन, फलेक्सटाइन, बीकॉमप्लेक्स सहित मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन, क्लोबसेव, इथिस्लोन व किमराल समेत कई महत्वपूर्ण दवाएं जो बाहर मेडिकल स्टोर पर 100 से 150 रुपये में मिलती हैं, वह मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर नहीं हैं। मरीजों को मजबूरी में महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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केस-1- भरिगवां निवासी श्याम शरण को चलने फिरने में दिक्कत है, घुटनों में दर्द होता है। चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा लेने पहुंचे तो खाने की दवा मिली, लेकिन पर्चे में लिखा दर्द का ट्यूब नहीं मिला। बाहर से 65 रुपये का ट्यूब खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। दवा अस्पताल में मिलती तो खर्च बच जाता।
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केस-2- टड़ियावां के उनौती निवासी सुधाकर मिश्रा ने बताया कि वह चर्म रोग की दवा लेने आए थे, लेकिन दो दवाएं ही मिलीं। ट्यूब नहीं दिया गया। जो दवा नहीं मिली वह निजी मेडिकल स्टोर से लेकर आए। अस्पताल में सस्ती दवाएं मिलती हैं, लेकिन बाहर से दवा लेने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मरीजों के लिए 340 प्रकार की दवाएं, महत्वपूर्ण का टोटा
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में वैसे तो मरीजों के लिए 340 प्रकार की दवाएं सूचीबद्ध हैं, लेकिन महत्वपूर्ण दवाएं ही नदारद चल रही हैं। चिकित्सक से परामर्श के बाद जो दवाएं सबसे अधिक लिखी जा रही हैं। वह काउंटर पर मिलती ही नहीं हैं। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। इनमें से 24 प्रकार की टैबलेट नहीं हैं और आठ प्रकार के सिरप भी नहीं मिल रहे। इसी प्रकार के 15 प्रकार के कैप्सूल सहित कई इंजेक्शनों की अनुपलब्धता बनी हुई है।
दवाओं की कमी बनी हुई है, शासन स्तर से ही दवाएं कम मिल रही हैं। दूसरी ओर वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से बजट की कमी भी चल रही है, जो दवाएं काउंटर पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं। इसकी जानकारी कर दवा की कमी को जल्द पूरा किया जाएगा। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज