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मैनुअल पर्चों की मुसीबत : जांच कराने जाओ तो फिर बनवाओ कंप्यूटराइज्ड पर्चा
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फोटो- 42- सेंट्रल लैब के बाहर लगी मरीज और तीमारदारों की भीड़। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की पूरी तरह डिजिटल हो चुकी सेंट्रल लैब में अब मरीजों के मैनुअल पर्चे पर रक्त नमूनों की जांच भी नहीं हो पाती। सर्वर ठप होने या बिजली चली जाने की स्थिति में पंजीकरण काउंटर पर मैनुअल पर्चे बना दिए जाते हैं लेकिन इन पर्चों पर अगर डॉक्टर जांच लिख देते हैं तो मरीज को लैब के पंजीकरण काउंटर से बैरंग होना पड़ता है। पर्चे पर केंद्रीय रजिस्ट्रेशन नंबर (सीआरएन) न होने के कारण मरीजों को दोबारा कंप्यूटराइज्ड पर्चा बनवाना पड़ता है।
मरीजों के रक्त नमूनों के जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो गई है। जांच कराने आने वाले मरीज का पंजीकरण पर्चे पर पड़े सीआरएन नंबर से होता है। इसी नंबर से ही मरीज का पूरा विवरण दिखता है और रक्त नमूनों की जांच रिपोर्ट आती है। यह सीआरएन नंबर मरीज को पर्चा काउंटर पर पंजीकरण करवाने के दौरान कंप्यूटराइज्ड पर्चे पर अंकित मिलता है। यहां तक तो सब सही है लेकिन जब कभी बिजली चली जाती है या फिर सर्वर ठप होता है तब मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
मैनुअल पर्चे पर सीआरएन नंबर नहीं होता है। भीड़ को काबू करने के लिए मैनुअल पर्चा बना दिया जाता है। डॉक्टर जब इन पर पर्चों पर जांच लिख देते हैं तो मरीज को फिर से दोबारा लंबी लाइन में लगकर कंप्यूटराइज्ड पर्चा बनवाना पड़ता है। इस दौरान अगर बिजली नहीं होती है या सर्वर ठप रहता है तो बिना नमूना दिए मेडिकल कॉलेज से आना पड़ता है।
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नहीं है कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था
मरीजों का कहना है कि यदि जांच के लिए सीआरएन अनिवार्य है तो मैनुअल पर्चे जारी करने के साथ ही ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे उन्हें दोबारा लाइन में न लगना पड़े। कई बार सर्वर ठीक होने के बाद भी लंबी कतार लगने से घंटों इंतजार करना पड़ता है जिससे उपचार और जांच दोनों में देरी होती है या फिर प्रशासन को बैकअप व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए ताकि डिजिटल सेवाओं का लाभ वास्तव में मरीजों तक पहुंच सके।
.रारा निवासी कुलदीप ने बताया कि बिजली न होने से मैनुअल पर्चा बनवाया था अब डॉक्टर ने जांच लिख दी है। इस पर सीआरएन नंबर न होने से पैथोलॉजी काउंटर पर मना कर दिया गया। दोबारा से लंबी लाइन में लगने के बाद पर्चा बनवाया है। तब जाकर जांच हो सकी।
.नेवादा की रहने वालीं चिर्रो देवी ने बताया कि डॉक्टर ने इस पर्चे पर जांच लिख दी, जांच कराने पहुंचे तो जांच काउंटर से वापस भेज दिया गया। वहां से बताया गया कि कंप्यूटर से निकलने वाला पर्चा बनवाकर लाओ। बिजली नहीं आ रही है कंप्यूटर वाला पर्चा बन नहीं रहा है। अब कल फिर से आना पड़ेगा।
सर्वर या बिजली बाधित होने की स्थिति में मरीजों की ओपीडी प्रभावित न हो इसलिए मैनुअल पर्चे जारी किए जाते हैं। सर्वर चालू होते ही कंप्यूटराइज्ड पर्चे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मरीजों के रक्त नमूनों के जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो गई है। जांच कराने आने वाले मरीज का पंजीकरण पर्चे पर पड़े सीआरएन नंबर से होता है। इसी नंबर से ही मरीज का पूरा विवरण दिखता है और रक्त नमूनों की जांच रिपोर्ट आती है। यह सीआरएन नंबर मरीज को पर्चा काउंटर पर पंजीकरण करवाने के दौरान कंप्यूटराइज्ड पर्चे पर अंकित मिलता है। यहां तक तो सब सही है लेकिन जब कभी बिजली चली जाती है या फिर सर्वर ठप होता है तब मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
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मैनुअल पर्चे पर सीआरएन नंबर नहीं होता है। भीड़ को काबू करने के लिए मैनुअल पर्चा बना दिया जाता है। डॉक्टर जब इन पर पर्चों पर जांच लिख देते हैं तो मरीज को फिर से दोबारा लंबी लाइन में लगकर कंप्यूटराइज्ड पर्चा बनवाना पड़ता है। इस दौरान अगर बिजली नहीं होती है या सर्वर ठप रहता है तो बिना नमूना दिए मेडिकल कॉलेज से आना पड़ता है।
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नहीं है कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था
मरीजों का कहना है कि यदि जांच के लिए सीआरएन अनिवार्य है तो मैनुअल पर्चे जारी करने के साथ ही ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे उन्हें दोबारा लाइन में न लगना पड़े। कई बार सर्वर ठीक होने के बाद भी लंबी कतार लगने से घंटों इंतजार करना पड़ता है जिससे उपचार और जांच दोनों में देरी होती है या फिर प्रशासन को बैकअप व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए ताकि डिजिटल सेवाओं का लाभ वास्तव में मरीजों तक पहुंच सके।
.रारा निवासी कुलदीप ने बताया कि बिजली न होने से मैनुअल पर्चा बनवाया था अब डॉक्टर ने जांच लिख दी है। इस पर सीआरएन नंबर न होने से पैथोलॉजी काउंटर पर मना कर दिया गया। दोबारा से लंबी लाइन में लगने के बाद पर्चा बनवाया है। तब जाकर जांच हो सकी।
.नेवादा की रहने वालीं चिर्रो देवी ने बताया कि डॉक्टर ने इस पर्चे पर जांच लिख दी, जांच कराने पहुंचे तो जांच काउंटर से वापस भेज दिया गया। वहां से बताया गया कि कंप्यूटर से निकलने वाला पर्चा बनवाकर लाओ। बिजली नहीं आ रही है कंप्यूटर वाला पर्चा बन नहीं रहा है। अब कल फिर से आना पड़ेगा।
सर्वर या बिजली बाधित होने की स्थिति में मरीजों की ओपीडी प्रभावित न हो इसलिए मैनुअल पर्चे जारी किए जाते हैं। सर्वर चालू होते ही कंप्यूटराइज्ड पर्चे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो- 42- सेंट्रल लैब के बाहर लगी मरीज और तीमारदारों की भीड़। संवाद

फोटो- 42- सेंट्रल लैब के बाहर लगी मरीज और तीमारदारों की भीड़। संवाद