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सबसे बड़े कर्जदार निकले अर्बन बैंक के संस्थापक व उनके पुत्र
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:25 PM IST
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बैंक के अंदर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : amarujala
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भारतीय रिजर्व बैंक से 1995 में लाइसेंस मिलने के बाद शुरू हुई हरदोई अर्बन कोऑपेरटिव बैंक के संस्थापक और उनके पुत्र ने बैंक से करीब एक करोड़ रुपये कर्ज लिया है, लेकिन अब तक लौटाया नहीं है। इसके साथ ही चाहने वालों को भी खूब कर्ज दिलाया है। कर्ज का रुपया जमा न होने पर एनपीए खाते बढ़ने पर रिजर्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। हालांकि बैंक प्रबंधतंत्र सोमवार को वित्त मंत्रालय नई दिल्ली में इस आदेश के खिलाफ रिट दायर करने की तैयारी कर रहा है।
सिनेमा रोड स्थित हरदोई अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 11 अक्टूबर 1995 को रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिलने के बाद हुई थी। बैंक के संस्थापक दिनेश पाल सिंह व उनके पुत्र अनिल सिंह सचिव थे। 22 मार्च 2017 को रामेंद्र सिंह तोमर एडवोकेट ने अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को शिकायत भेजकर गड़बड़ी के आरोप पर संस्थापक व सचिव के साथ शाखा प्रबंधक संजय श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। रिजर्व बैंक के अधिकारियों को भी निरीक्षण में गड़बड़ी मिली, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी देकर बैंक प्रबंधतंत्र को छोड़ दिया। जानकार बताते हैं कि बैंक के 200 कर्जदारों में 50 कर्जदार ऐसे है, जिन्होंने बैंक की नैया डुबो दी। इसमें बैंक के संस्थापक दिनेश पाल सिंह और उनके दूसरे पुत्र शशांक सिंह भी शामिल है। इन्होंने बैंक से एक करोड़ रुपया कर्ज लिया है, जिसे अब तक नहीं लौटाया है। इसी तरह विजय पाल सिंह व शत्रुघन सिंह है, इन पर करीब 50 लाख रुपया बकाया है। यह बैंक के सबसे बड़े बकाएदार है। बैंक का 517.97 लाख रुपये वसूल न हो पाने पर बैंक प्रबंधतंत्र ने इसे एनपीए में डाल दिया। इस पर रिजर्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
ग्राहकों का पाई-पाई सुरक्षित
शाखा प्रबंधक संजय श्रीवास्तव ने ग्राहकों को भरोसा देते हुए बताया कि ग्राहकों की पाई पाई सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि डिपॉजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईजीसी) से ग्राहकों की गाढ़ी कमाई का इंश्योरेंस है। इससे ग्राहकों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने यह भी बताया कि अल्मोड़ा कोऑपरेटिव बैंक से मरजर की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
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एक साल से पैसा निकालने के भटक रहे ग्राहक
पिछले डेढ़ वर्ष से अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की हालत एनपीए खातों के चलते खराब चल रही है, जिसने ग्राहकों की मुसीबत बढ़ा दी है। रिजर्व बैंक ने 2016 में बैंक प्रबंधतंत्र पर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ग्राहकों को एक-एक हजार रुपये लेनदेन किए जाने की अनुमति दी थी। इसके बाद से ग्राहक परेशान है। नयागांव के सकतपुर निवासी भूपेंद्र विक्रम सिंह का 1,25,000, कासिमपुर के मनोज कुमार का 80 हजार और संजय कुमार का 40 हजार रुपये बैंक में जमा है। उन्होंने बताया कि बैंक से पैसा न निकल पाने के चलते उन्हें काफी दिक्कत हो रही है।
सिनेमा रोड स्थित हरदोई अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 11 अक्टूबर 1995 को रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिलने के बाद हुई थी। बैंक के संस्थापक दिनेश पाल सिंह व उनके पुत्र अनिल सिंह सचिव थे। 22 मार्च 2017 को रामेंद्र सिंह तोमर एडवोकेट ने अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को शिकायत भेजकर गड़बड़ी के आरोप पर संस्थापक व सचिव के साथ शाखा प्रबंधक संजय श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। रिजर्व बैंक के अधिकारियों को भी निरीक्षण में गड़बड़ी मिली, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी देकर बैंक प्रबंधतंत्र को छोड़ दिया। जानकार बताते हैं कि बैंक के 200 कर्जदारों में 50 कर्जदार ऐसे है, जिन्होंने बैंक की नैया डुबो दी। इसमें बैंक के संस्थापक दिनेश पाल सिंह और उनके दूसरे पुत्र शशांक सिंह भी शामिल है। इन्होंने बैंक से एक करोड़ रुपया कर्ज लिया है, जिसे अब तक नहीं लौटाया है। इसी तरह विजय पाल सिंह व शत्रुघन सिंह है, इन पर करीब 50 लाख रुपया बकाया है। यह बैंक के सबसे बड़े बकाएदार है। बैंक का 517.97 लाख रुपये वसूल न हो पाने पर बैंक प्रबंधतंत्र ने इसे एनपीए में डाल दिया। इस पर रिजर्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
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ग्राहकों का पाई-पाई सुरक्षित
शाखा प्रबंधक संजय श्रीवास्तव ने ग्राहकों को भरोसा देते हुए बताया कि ग्राहकों की पाई पाई सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि डिपॉजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईजीसी) से ग्राहकों की गाढ़ी कमाई का इंश्योरेंस है। इससे ग्राहकों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने यह भी बताया कि अल्मोड़ा कोऑपरेटिव बैंक से मरजर की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
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एक साल से पैसा निकालने के भटक रहे ग्राहक
पिछले डेढ़ वर्ष से अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की हालत एनपीए खातों के चलते खराब चल रही है, जिसने ग्राहकों की मुसीबत बढ़ा दी है। रिजर्व बैंक ने 2016 में बैंक प्रबंधतंत्र पर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ग्राहकों को एक-एक हजार रुपये लेनदेन किए जाने की अनुमति दी थी। इसके बाद से ग्राहक परेशान है। नयागांव के सकतपुर निवासी भूपेंद्र विक्रम सिंह का 1,25,000, कासिमपुर के मनोज कुमार का 80 हजार और संजय कुमार का 40 हजार रुपये बैंक में जमा है। उन्होंने बताया कि बैंक से पैसा न निकल पाने के चलते उन्हें काफी दिक्कत हो रही है।