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उफनाई गर्रा के पानी में बह गए 10 मकान
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Fri, 05 Aug 2016 10:59 PM IST
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करनपुर गांव के बाहर भरा बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
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शाहाबाद और भरखनी ब्लाकों में गर्रा नदी से कटान तेज हो गया है। शाहाबाद ब्लॉक क्षेत्र के उमरिया कैथानी गांव में रामरतन, माखन, मकरंद, रामकिशुन, रामलडैते और ऋषि कुमार के मकान कटान के कारण नदी में समा गए हैं। इन परिवारों को गांव के प्राथमिक स्कूल में ठहराया गया है। गांव के कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इससे ग्रामीण दहशत में हैं, वह जागकर रात काट रहे हैं। राजस्व निरीक्षक अनिल त्रिपाठी ने बताया कि करीब सात लाख का नुकसान हुआ है।
फिलहाल तहसील की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सवायजपुर क्षेत्र के बाबरपुर गांव में शिवकिशोर, ध्रुव कुमार, विजय कुमार तथा छोटेलाल का मकान भी कटान में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस गांव में सिंचाई विभाग मिट्टी भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयासकर रहा है। डीएम विवेक वार्ष्णेय शुक्रवार दोपहर बाद उमरिया कैथानी गांव पहुंचे और ग्रामीणों का हाल जाना।
इसके बाद कहारकोला पहुंचकर फसलों के नुकसान का जायजा भी लिया। डीएम ने बाबरपुर सहित कई और बाढ़ प्रभावित गांवों का भी भ्रमण किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील भी की। पाली पुल पर गर्रा नदी से हुए कटान को भी देखा। डीएम ने एसडीएम अशोक कुमार शुक्ला और सवायजपुर एसडीएम पीसीलाल श्रीवास्तव को पीड़ितों की तत्कालिक सहायता व क्षेत्र पर नजर रखने के निर्देश दिए।
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डीएम ने कहा कि लेखपालों से सर्वे कराकर जिन लोगों के मकान नदी की कटान मेें बह गए हैं उन्हें आवासीय जमीन के पट्टे दिए जाएं। हरपालपुर प्रतिनिधि के अनुसार कटियारी क्षेत्र मे गंगा,रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ के खतरे से लोग खौफजदा है। वही रामगंगा नदी के किनारे बसे नंदना व चंद्रमपुर,गोरिया गाव में घरों का कटान तेज हो गया है। वहीं सुरजूपुर गांव में रामगंगा नदी खेती का कटान तेजी से कर रही है। जिससे लोग भूमिहीन हो रहे हैं।
करनपुर के संजय पाठक ने कहा कि अभी तक नाव की व्यवस्था भी नही की जा सकी है। छिबरामऊ प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को गंगा का पानी राजघाट जाने वाले रोड के ऊपर से बहने लगा। बाढ़ का पानी कई गांवों के अंदर तक भी पहुंच गया है। क्षेत्र के दनईपुरवा, मोहनपुरवा, सोनारी पुरवा, सिंजू, चिरंजूपुरवा, घासीराम पुरवा, विद्दुइया, शेखनपुरवा, गन्नीपुरवा आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
मोहन पुरवा के रामकरन, गुड्डू, रामआसरे, बालक भइयालाल, मदन पाल, सुंदर ने बताया की उनके खेतों में मक्का, धान, मूंग, मूंगफली आदि की फसलें बर्बाद हो गई हैं। चिंरजूपुरबा के पातीराम, जगमोहन, बलराम, रमेश, अर्जुन, बेदराम, रामेशर, जगदीश, रामविलास रामनाथ, प्रियांशू, भूरा तिवारी और बिद्दुइया के रामलाल, सुरेश, रामदीन, आशीष ने बताया कि इस बार भी 2011 जैसी बाढ़ आने की संबावना है। राजघाटरोड पर जिस तरह से पानी बढ़ रहा है उससे कल तक छिबरामऊ पहुंचना भी कठिन हो जाएगा।
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फिलहाल तहसील की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सवायजपुर क्षेत्र के बाबरपुर गांव में शिवकिशोर, ध्रुव कुमार, विजय कुमार तथा छोटेलाल का मकान भी कटान में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस गांव में सिंचाई विभाग मिट्टी भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयासकर रहा है। डीएम विवेक वार्ष्णेय शुक्रवार दोपहर बाद उमरिया कैथानी गांव पहुंचे और ग्रामीणों का हाल जाना।
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इसके बाद कहारकोला पहुंचकर फसलों के नुकसान का जायजा भी लिया। डीएम ने बाबरपुर सहित कई और बाढ़ प्रभावित गांवों का भी भ्रमण किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील भी की। पाली पुल पर गर्रा नदी से हुए कटान को भी देखा। डीएम ने एसडीएम अशोक कुमार शुक्ला और सवायजपुर एसडीएम पीसीलाल श्रीवास्तव को पीड़ितों की तत्कालिक सहायता व क्षेत्र पर नजर रखने के निर्देश दिए।
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डीएम ने कहा कि लेखपालों से सर्वे कराकर जिन लोगों के मकान नदी की कटान मेें बह गए हैं उन्हें आवासीय जमीन के पट्टे दिए जाएं। हरपालपुर प्रतिनिधि के अनुसार कटियारी क्षेत्र मे गंगा,रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ के खतरे से लोग खौफजदा है। वही रामगंगा नदी के किनारे बसे नंदना व चंद्रमपुर,गोरिया गाव में घरों का कटान तेज हो गया है। वहीं सुरजूपुर गांव में रामगंगा नदी खेती का कटान तेजी से कर रही है। जिससे लोग भूमिहीन हो रहे हैं।
करनपुर के संजय पाठक ने कहा कि अभी तक नाव की व्यवस्था भी नही की जा सकी है। छिबरामऊ प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को गंगा का पानी राजघाट जाने वाले रोड के ऊपर से बहने लगा। बाढ़ का पानी कई गांवों के अंदर तक भी पहुंच गया है। क्षेत्र के दनईपुरवा, मोहनपुरवा, सोनारी पुरवा, सिंजू, चिरंजूपुरवा, घासीराम पुरवा, विद्दुइया, शेखनपुरवा, गन्नीपुरवा आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
मोहन पुरवा के रामकरन, गुड्डू, रामआसरे, बालक भइयालाल, मदन पाल, सुंदर ने बताया की उनके खेतों में मक्का, धान, मूंग, मूंगफली आदि की फसलें बर्बाद हो गई हैं। चिंरजूपुरबा के पातीराम, जगमोहन, बलराम, रमेश, अर्जुन, बेदराम, रामेशर, जगदीश, रामविलास रामनाथ, प्रियांशू, भूरा तिवारी और बिद्दुइया के रामलाल, सुरेश, रामदीन, आशीष ने बताया कि इस बार भी 2011 जैसी बाढ़ आने की संबावना है। राजघाटरोड पर जिस तरह से पानी बढ़ रहा है उससे कल तक छिबरामऊ पहुंचना भी कठिन हो जाएगा।