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Hardoi News: संदिग्ध मरीजों की अभी शुरू नहीं हुई जांच, सैंपल लेने की व्यवस्था भी नहीं

Sat, 05 Sep 2026 10:55 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 10:55 PM IST
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Testing of suspected patients has not yet begun; arrangements for sample collection are also not in place.
हरदोई। जिले में वायरल और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर सीएचसी-पीएचसी पर स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की अब तक जांच शुरू नहीं हो सकी है। हालत यह है कि संदिग्ध मरीज सामने आने पर उनके सैंपल लेने तक की पुख्ता व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों में संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ रही है।
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पूरे जिले में इन दिनों वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सीएचसी-पीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी मरीजों में बुखार, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वाइन फ्लू की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ऐसे मरीजों को सिर्फ दवाएं और घर पर आराम करने की सलाह दी जा रही है। अभी तक आरटी-पीसीआर जांच और सैंपल लेने के लिए आवश्यक वीटीएम तक की व्यवस्था नहीं की गई हैं।
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ऐसे में बीमारी से बचाव को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सीएचसी पर जांच सैंपल लेने और अलग वार्ड बनाने का दावा किया गया है लेकिन वह भी धरातल पर नहीं दिख रहा है। वहीं संदिग्ध मरीजों की समय से जांच न होने पर बीमारी की वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। संदिग्ध मामलों में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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जांच की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 350 से 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें 170 से 180 मरीज बुखार से पीड़ित होते हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास चंद्रा ने बताया कि वायरल संक्रमण के रोगी बढ़े हैं। स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण के मरीज भी आ रहे हैं। टीबी व चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिवम गुप्ता ने भी बताया कि संदिग्ध मरीजों की जांच आवश्यक है। स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों में कोई गंभीरता नहीं है ऐसे में उन्हें घर पर हर उपचार दिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के पास संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने, सुरक्षित तरीके से भेजने और रिपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी न होने से तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।


केवल कागजी आइसोलेशन

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आइसोलेशन वार्ड को दुरुस्त कर दिया लेकिन यह भी सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित है। आइसोलेशन वार्ड में न तो आवश्यक जीवनरक्षक उपकरण हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ तैनात किया गया है। यही हाल सीएचसी का भी है। आइसोलेशन वार्ड संबंधित कोई तैयारियां नहीं की गई हैं।




संदिग्ध मरीजों की जांच कराने के लिए मेडिकल कॉलेज की तरफ से तैयारियां पूरी की जा रही हैं। आइसोलेशन वार्ड में भी सभी व्यवस्थाएं एक से दो दिन में दुरुस्त कर दी जाएंगी। स्टाफ को भी निर्देशित कर दिया गया है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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