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Hardoi News: पांच साल से टेक्नीशियन तैनात, एक्सरे मशीन का पता नहीं
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हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की कवायद के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के गृह कस्बे की सीएचसी को ही डिजिटल एक्सरे मशीन नहीं मिल पा रही है। खास बात यह है कि एक्सरे मशीन न होने के बाद भी यहां एक्सरे टेक्नीशियन और सहायक की तैनाती है। पिछले लगभग पांच वर्ष में इन कर्मचारियों के वेतन पर करीब एक करोड़ रुपये भी खर्च किए जा चुके हैं।
मल्लावां में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मल्लावां के ही रहने वाले हैं। मल्लावां सीएचसी में इलाज के लिए न सिर्फ क्षेत्रीय लोग बल्कि उन्नाव और कन्नौज के लोग भी आते हैं। हर रोज औसतन बीस मरीजों को एक्सरे लिखा जाता है, लेकिन सीएचसी में एक्सरे मशीन नहीं है। खास बात यह है कि मशीन भले ही न हो, लेकिन एक्सरे टेक्नीशियन और उसके सहायक की तैनाती पिछले लगभग पांच वर्ष से है। जिन मरीजों को एक्सरे लिखा जाता है उन्हेंं या तो जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है या फिर प्राइवेट एक्सरे सेंटर की। मुफ्त में होने वाला एक्सरे प्राइवेट सेंटर में 500-700 रुपये में होता है।
क्षय रोगियों की भी नहीं हो पाती जांच
वर्ष 2025 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को टीबी से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा है। क्षय रोगियों की समय-समय पर जांच कराई जाती है। बलगम की जांच के साथ ही अधिकांश मरीजों का एक्सरे भी कराया जाता है, लेकिन सीएचसी पर एक्सरे मशीन न होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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... और फिर भी खाली रह गई हरदोई की झोली
लगभग एक पखवाड़ा पहले स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के 58 जनपदों के 370 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए डिजिटल एक्सरे मशीन को मंजूरी दी है। बावजूद इसके हरदोई की झोली खाली रह गई। मल्लावां सीएचसी में एक्सरे मशीन की मांग लंबे समय से की जा रही है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष तक ने इस संबंध में प्रयास किए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली।
लंबे समय से एक्सरे मशीन सीएचसी में नहीं है। एक्सरे टेक्नीशियन और उसके सहायक से स्वास्थ्य विभाग के दूसरे कार्य लिए जाते हैं। मशीन लगवाने के लिए कई बार सीएमओ के माध्यम से पत्राचार शासन से किया जा चुका है। अब तक मशीन नहीं मिली है। एक बार फिर सीएमओ के माध्यम से पत्र शासन को भेजेंगे।
-डा. संजय सिंह, अधीक्षक, मल्लावां सीएचसी
मल्लावां में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मल्लावां के ही रहने वाले हैं। मल्लावां सीएचसी में इलाज के लिए न सिर्फ क्षेत्रीय लोग बल्कि उन्नाव और कन्नौज के लोग भी आते हैं। हर रोज औसतन बीस मरीजों को एक्सरे लिखा जाता है, लेकिन सीएचसी में एक्सरे मशीन नहीं है। खास बात यह है कि मशीन भले ही न हो, लेकिन एक्सरे टेक्नीशियन और उसके सहायक की तैनाती पिछले लगभग पांच वर्ष से है। जिन मरीजों को एक्सरे लिखा जाता है उन्हेंं या तो जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है या फिर प्राइवेट एक्सरे सेंटर की। मुफ्त में होने वाला एक्सरे प्राइवेट सेंटर में 500-700 रुपये में होता है।
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क्षय रोगियों की भी नहीं हो पाती जांच
वर्ष 2025 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को टीबी से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा है। क्षय रोगियों की समय-समय पर जांच कराई जाती है। बलगम की जांच के साथ ही अधिकांश मरीजों का एक्सरे भी कराया जाता है, लेकिन सीएचसी पर एक्सरे मशीन न होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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... और फिर भी खाली रह गई हरदोई की झोली
लगभग एक पखवाड़ा पहले स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के 58 जनपदों के 370 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए डिजिटल एक्सरे मशीन को मंजूरी दी है। बावजूद इसके हरदोई की झोली खाली रह गई। मल्लावां सीएचसी में एक्सरे मशीन की मांग लंबे समय से की जा रही है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष तक ने इस संबंध में प्रयास किए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली।
लंबे समय से एक्सरे मशीन सीएचसी में नहीं है। एक्सरे टेक्नीशियन और उसके सहायक से स्वास्थ्य विभाग के दूसरे कार्य लिए जाते हैं। मशीन लगवाने के लिए कई बार सीएमओ के माध्यम से पत्राचार शासन से किया जा चुका है। अब तक मशीन नहीं मिली है। एक बार फिर सीएमओ के माध्यम से पत्र शासन को भेजेंगे।
-डा. संजय सिंह, अधीक्षक, मल्लावां सीएचसी