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भारी वाहनों की रफ्तार, थर्रा रहीं मकानों की दीवार
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हरदोई। वाहनों की ओवरलोडिंग दशकों से समस्या रही है। ओवरलोडिंग न सिर्फ सड़कों को जख्म दे रही, बल्कि सड़कों के आसपास बने मकानों की दीवारों को भी थर्राने के लिए विवश कर रही है।
साथ ही यातायात व्यवस्था को भी तहस-नहस कर दिया है। ओवरलोडिंग पिछले एक दशक से अनवरत जारी है, लेकिन ओवरलोडिंग के खिलाफ सिस्टम किस कदर लाचार या जिम्मेदार बेखबर नजर आते हैं, यह भी किसी से छिपा नहीं है।
यहां शहर से लेकर गांवों की सड़कों पर ओवरलोड वाहन रफ्तार पकड़े हुए हैं। बड़े और भारी वाहनों की तर्ज पर अब छोटे-छोटे वाहन ओवरलोड का दंश दे रहे हैं। कार्रवाई का कोई खौफ न होने से ई-रिक्शा तक भार वाहन की तरह चलने लगे हैं।
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ओवरलोडिंग इस कदर बढ़ चुकी है कि पुराने भवनों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है।
यूं तो शहर में बड़े वाहनों एवं छोटे वाहनों के हार्न से पड़ने वाला नींद में खलल लंबे अरसे से चला आ रहा, लेकिन पिछले एक दशक से शहर की सड़कों से आवाजाही कर रहे भारी वाहनों की रफ्तार से पुराने भवनों की नींव हिलने लगी हैं।
अक्सर लोग नींद से चौंक कर उठ बैठते हैं कि यह कंपन सा क्या है, कहीं कोई भूकंप तो नहीं, मगर पता चलता है कि रफ्तार से निकलने वाले इन भारी वाहनों की धमक से भवन की दीवारों में होने वाले कंपन से भूकंप का अहसास होने लगता है।
शहर में हो या फिर कस्बे ऐसी रफ्तार, ओवरलोडिंग लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार बेखबर से नजर आते हैं। इसे सिस्टम की लाचारी कहें या फिर ट्रैफिक व्यवस्था में सेंधमारी कि शहर से लेकर पूरे जिले में यातायात व्यवस्था तहस-नहस नजर आती है।
शहर के ये इलाके डर के साये में
दो किमी परिधि में बसे हरदोई शहर की सीमाएं भी इसी दायरे में हैं। लखनऊ चुंगी, बावन चुंगी, सांडी चुंगी, बिलग्राम चुंगी, पिहानी चुंगी, जिंदपीर चौराहा, रेलवेगंज चौकी के आसपास का एरिया पुराना रिहायशी एरिया है।
इनमें भी नुमाइश चौराहा, बड़ा चौराहा, छोटा चौराहा, डॉ. रामदत्त चौराहा, सिनेमा चौराहा, अस्पताल तिराहा सिटी का क्षेत्र है। बुजुर्ग बताते हैं कि नुमाइश चौराहे से शहर से कमोवेश हर प्रमुख मार्ग के लिए जाने वाली सड़कें मिलती हैं।
50 साल से अधिक समय से पहले से ही इन प्रमुख मार्ग, सांडी रोड, बिलग्राम रोड, सिनेमा रोड़, लखनऊ रोड, सीतापुर रोड, पिहानी रोड, शाहजहांपुर रोड के आसपास भवन बनाकर रहने वालों के लिए भारी वाहनों की आवाजाही ने संकट शुरू कर दिया था।
इसको देखते हुए बिलग्राम रोड के लिए एमजी रोड बड़ा चौराहा, सिनेमा रोड, डॉ. रामदत्त चौराहा-सदर बाजार की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद की जा चुकी है,
पर सांडी रोड, सीतापुर रोड, लखनऊ रोड के लिए घंटाघर रोड, सिनेमा चौराहा से लखनऊ चुंगी-पिहानी रोड आदि के लिए कोई दूसरा रोड न होने से भारी वाहनों की आवाजाही अभी भी जारी है।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई भी होती
ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने का प्रावधान है। अब तो ऑनलाइन चालान कटने का भी सिस्टम है।
इसके बाद भी यदि जिले में चालान काटने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो निजी वाहनों की संख्या के मुकाबले कामर्शियल वाहनों की संख्या काफी कम है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर चालान दोपहिया वाहनों के काटे जाते हैं, जबकि बड़े वाहनों को लेकर अक्सर दिखने वाले कुछ इशारे ही कहानी बयां कर रहे हैं।
सरकारी से लेकर निजी बसों में ओवरलोडिंग
सील्ट बेल्ट से लेकर प्रदूषण प्रमाणपत्र एवं हेलमेट आदि को लेकर जगह-जगह लोगों को रोककर भारी तादाद में पुलिस बल चेकिंग करते नजर आते हैं।
कमोवेश हर कोतवाली एवं पुलिस सहायता केंद्रों के सामने सड़कों पर चेकिंग चलती रहती है और कैमरे भी फोटो खींचा करते रहते हैं,
मगर इन जिम्मेदारों को ओवरलोडिंग एवं कामर्शियल वाहनों के नियम तोड़ने के दृश्य नहीं दिखते, जबकि हकीकत यह है कि सरकारी बसों से लेकर निजी बस, टेंपो, ऑटो एवं टैक्सी में चलने वाले वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक क्षमता का भार लेकर रफ्तार पकड़ते रहते हैं।
गन्ना लदे ट्रक, भारी वाहन करते चिरौरी
जिले में सबसे ज्यादा ओवरलोडिंग चीनी मिलों क्षेत्रों में आवाजाही करने वाले ट्रकों एवं शहर से गुजरने वाले वाहनों पर होती है।
ओवरलोड वाहन ट्रैफिक नियमों की चिरौरी करते हुए जिम्मेदारों की बेखबरी की दास्तां बताते हैं, मगर इनके खिलाफ कार्रवाई की पहल करता कोई नहीं दिख रहा।
सूत्रों का कहना है कि जिले में संचालित चीनी मिलों में हरियावां, रूपापुर, लोनी के गन्ना तौल सेंटरों से हर रोज बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग कर ट्रक गन्ना लेकर चीनी मिल पहुंचते हैं।
यह ओवरलोडिंग न तो चीनी मिल प्रबंधन को दिखती और न ही प्रशासन को, जिससे निर्धारित क्षमता से डेढ़ गुना और दो गुना तक गन्ने को लाद कर ट्रक ट्रैफिक सिस्टम को तहस-नहस करते हुए सड़कों को भी जख्म दे रहे हैं।
मामला चीनी मिलों से जुड़ा होने से इस ओर सिस्टम की ढिलाई साफ नजर आती है।
प्रवर्तन दल समय-समय पर इस ओर अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाती है।
- संजीव कुमार, एआरटीओ
बोले एसपी, कसेंगे सिस्टम के पेच
जानकारी करेंगे कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ढिलाई किस स्तर पर हो रही। ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम को प्रभावशाली बनाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
- राजेश द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक
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साथ ही यातायात व्यवस्था को भी तहस-नहस कर दिया है। ओवरलोडिंग पिछले एक दशक से अनवरत जारी है, लेकिन ओवरलोडिंग के खिलाफ सिस्टम किस कदर लाचार या जिम्मेदार बेखबर नजर आते हैं, यह भी किसी से छिपा नहीं है।
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यहां शहर से लेकर गांवों की सड़कों पर ओवरलोड वाहन रफ्तार पकड़े हुए हैं। बड़े और भारी वाहनों की तर्ज पर अब छोटे-छोटे वाहन ओवरलोड का दंश दे रहे हैं। कार्रवाई का कोई खौफ न होने से ई-रिक्शा तक भार वाहन की तरह चलने लगे हैं।
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ओवरलोडिंग इस कदर बढ़ चुकी है कि पुराने भवनों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है।
यूं तो शहर में बड़े वाहनों एवं छोटे वाहनों के हार्न से पड़ने वाला नींद में खलल लंबे अरसे से चला आ रहा, लेकिन पिछले एक दशक से शहर की सड़कों से आवाजाही कर रहे भारी वाहनों की रफ्तार से पुराने भवनों की नींव हिलने लगी हैं।
अक्सर लोग नींद से चौंक कर उठ बैठते हैं कि यह कंपन सा क्या है, कहीं कोई भूकंप तो नहीं, मगर पता चलता है कि रफ्तार से निकलने वाले इन भारी वाहनों की धमक से भवन की दीवारों में होने वाले कंपन से भूकंप का अहसास होने लगता है।
शहर में हो या फिर कस्बे ऐसी रफ्तार, ओवरलोडिंग लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार बेखबर से नजर आते हैं। इसे सिस्टम की लाचारी कहें या फिर ट्रैफिक व्यवस्था में सेंधमारी कि शहर से लेकर पूरे जिले में यातायात व्यवस्था तहस-नहस नजर आती है।
शहर के ये इलाके डर के साये में
दो किमी परिधि में बसे हरदोई शहर की सीमाएं भी इसी दायरे में हैं। लखनऊ चुंगी, बावन चुंगी, सांडी चुंगी, बिलग्राम चुंगी, पिहानी चुंगी, जिंदपीर चौराहा, रेलवेगंज चौकी के आसपास का एरिया पुराना रिहायशी एरिया है।
इनमें भी नुमाइश चौराहा, बड़ा चौराहा, छोटा चौराहा, डॉ. रामदत्त चौराहा, सिनेमा चौराहा, अस्पताल तिराहा सिटी का क्षेत्र है। बुजुर्ग बताते हैं कि नुमाइश चौराहे से शहर से कमोवेश हर प्रमुख मार्ग के लिए जाने वाली सड़कें मिलती हैं।
50 साल से अधिक समय से पहले से ही इन प्रमुख मार्ग, सांडी रोड, बिलग्राम रोड, सिनेमा रोड़, लखनऊ रोड, सीतापुर रोड, पिहानी रोड, शाहजहांपुर रोड के आसपास भवन बनाकर रहने वालों के लिए भारी वाहनों की आवाजाही ने संकट शुरू कर दिया था।
इसको देखते हुए बिलग्राम रोड के लिए एमजी रोड बड़ा चौराहा, सिनेमा रोड, डॉ. रामदत्त चौराहा-सदर बाजार की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद की जा चुकी है,
पर सांडी रोड, सीतापुर रोड, लखनऊ रोड के लिए घंटाघर रोड, सिनेमा चौराहा से लखनऊ चुंगी-पिहानी रोड आदि के लिए कोई दूसरा रोड न होने से भारी वाहनों की आवाजाही अभी भी जारी है।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई भी होती
ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने का प्रावधान है। अब तो ऑनलाइन चालान कटने का भी सिस्टम है।
इसके बाद भी यदि जिले में चालान काटने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो निजी वाहनों की संख्या के मुकाबले कामर्शियल वाहनों की संख्या काफी कम है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर चालान दोपहिया वाहनों के काटे जाते हैं, जबकि बड़े वाहनों को लेकर अक्सर दिखने वाले कुछ इशारे ही कहानी बयां कर रहे हैं।
सरकारी से लेकर निजी बसों में ओवरलोडिंग
सील्ट बेल्ट से लेकर प्रदूषण प्रमाणपत्र एवं हेलमेट आदि को लेकर जगह-जगह लोगों को रोककर भारी तादाद में पुलिस बल चेकिंग करते नजर आते हैं।
कमोवेश हर कोतवाली एवं पुलिस सहायता केंद्रों के सामने सड़कों पर चेकिंग चलती रहती है और कैमरे भी फोटो खींचा करते रहते हैं,
मगर इन जिम्मेदारों को ओवरलोडिंग एवं कामर्शियल वाहनों के नियम तोड़ने के दृश्य नहीं दिखते, जबकि हकीकत यह है कि सरकारी बसों से लेकर निजी बस, टेंपो, ऑटो एवं टैक्सी में चलने वाले वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक क्षमता का भार लेकर रफ्तार पकड़ते रहते हैं।
गन्ना लदे ट्रक, भारी वाहन करते चिरौरी
जिले में सबसे ज्यादा ओवरलोडिंग चीनी मिलों क्षेत्रों में आवाजाही करने वाले ट्रकों एवं शहर से गुजरने वाले वाहनों पर होती है।
ओवरलोड वाहन ट्रैफिक नियमों की चिरौरी करते हुए जिम्मेदारों की बेखबरी की दास्तां बताते हैं, मगर इनके खिलाफ कार्रवाई की पहल करता कोई नहीं दिख रहा।
सूत्रों का कहना है कि जिले में संचालित चीनी मिलों में हरियावां, रूपापुर, लोनी के गन्ना तौल सेंटरों से हर रोज बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग कर ट्रक गन्ना लेकर चीनी मिल पहुंचते हैं।
यह ओवरलोडिंग न तो चीनी मिल प्रबंधन को दिखती और न ही प्रशासन को, जिससे निर्धारित क्षमता से डेढ़ गुना और दो गुना तक गन्ने को लाद कर ट्रक ट्रैफिक सिस्टम को तहस-नहस करते हुए सड़कों को भी जख्म दे रहे हैं।
मामला चीनी मिलों से जुड़ा होने से इस ओर सिस्टम की ढिलाई साफ नजर आती है।
प्रवर्तन दल समय-समय पर इस ओर अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाती है।
- संजीव कुमार, एआरटीओ
बोले एसपी, कसेंगे सिस्टम के पेच
जानकारी करेंगे कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ढिलाई किस स्तर पर हो रही। ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम को प्रभावशाली बनाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
- राजेश द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक