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Hardoi News: सोशल मीडिया की लत, नींद, एकाग्रता और मानसिक सेहत पर संकट

Fri, 09 Oct 2026 11:25 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:25 PM IST
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Social media addiction: A threat to sleep, concentration, and mental health.
फोटो- 23- मानसिक रोग विभाग में मरीजों को परामर्श देते चिकित्सक डॉ. कुंवर अखिलेश। संवाद
हरदोई। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल लोगों की मानसिक सेहत, नींद और एकाग्रता पर भारी पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार दूसरों की जिंदगी से लगातार तुलना करना, लाइक-कमेंट के जरिए आत्मसम्मान आंकना और ऑनलाइन नकारात्मकता का सामना करना तनाव व चिंता को बढ़ा सकता है। मानसिक रोग विभाग में ऐसे तमाम मामले आते हैं। इनमें युवाओं की संख्या अधिक है।
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सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नई जानकारियां हासिल करने, प्रतिभा दिखाने और लोगों से जुड़ने के अवसर मिलते हैं। परेशानी तब बढ़ती है, जब मोबाइल का इस्तेमाल जरूरत के बजाय आदत बन जाता है। बार-बार नोटिफिकेशन देखना, बिना उद्देश्य स्क्रीन स्क्रॉल करना और देर रात तक ऑनलाइन रहना, दिनचर्या को प्रभावित करने लगता है।
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मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश बताते हैं कि युवाओं में एफओएमओ (फियर ऑफ मिसिंग आउट) यानी दूसरों की गतिविधियों और अनुभवों से पीछे छूट जाने का डर चिंता का कारण बन रहा है। सोशल मीडिया पर दूसरों की खुशहाल जिंदगी देखकर खुद को कमतर आंकने की प्रवृत्ति मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे रोजाना 30 से 35 मरीज आते हैं, जो देर रात तक स्क्रीन पर सक्रिय रहते हैं और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई या काम में ध्यान लगाने में परेशानी का सामना करते हैं।
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डिजिटल संतुलन से सुधरेगी दिनचर्या
डॉ. कुंवर अखिलेश ने बताया कि नियमित दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त नींद लेने और व्यायाम के लिए समय निकालना चाहिए। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करना, गैरजरूरी नोटिफिकेशन बंद करना और पढ़ाई के दौरान फोन को दूर रखना चाहिए। परिवार और दोस्तों के साथ आमने-सामने बातचीत भी जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को डांटने या प्रतिबंध लगाने के बजाय डिजिटल उपयोग के प्रति जागरुक करना चाहिए।

इन संकेतों को न करें नजर अंदाज
- लंबे समय तक उदासी या अत्यधिक चिंता बने रहना।
- नींद में लगातार बदलाव और दिनभर थकान महसूस होना।
- पढ़ाई, काम या एकाग्रता में गिरावट आना।
- परिवार और दोस्तों से दूरी बढ़ने लगना।
- मोबाइल इस्तेमाल पर नियंत्रण न रख पाना।

इन आदतों को अपनाएं
- स्क्रीन टाइम सीमित करें
- नियमित व्यायाम करें
- पर्याप्त नींद लें
- वास्तविक सामाजिक संबंधों को समय दें।
- मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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