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Hardoi News: 30 वार्मर की एसएनसीयू, नवजातों को संभालने के लिए 11 कर्मचारियों का स्टाफ
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में संसाधन होने के बावजूद पर्याप्त स्टाफ की कमी नवजातों की देखभाल पर भारी पड़ रही है। यूनिट में करीब 30 वार्मर लगाए गए हैं, लेकिन स्टाफ नर्स और वार्ड आया को मिलाकर पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसका असर नवजात शिशुओं की देखरेख और निगरानी पर पड़ रहा है। एक साथ दो नवजात बच्चों को एक ही वार्मर पर भर्ती करना पड़ रहा है।
महिला चिकित्सालय में स्पेशल न्यू बॉर्न यूनिट (एसएनसीयू) है। यहां समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों (प्री-मैच्योर) के साथ ही जन्म से ही बीमार बच्चों को रखा जाता है। कम वजन होने, पीलिया होने के कारण भी बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू में वैसे तो 30 वार्मर बेड हैं। लेकिन कई वार्मर खाली होने के बाद भी एक ही वार्मर बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती हैं। इस कारण इनमें एक-दूसरे से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। खास बात यह है कि एसएनसीयू में स्टाफ की कमी लगातार बनी हुई है। यूनिट में स्टाफ नर्स और वार्ड आया को मिलाकर महज 11 कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। ऐसे में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के हिसाब से कर्मचारियों की रोस्टर ड्यूटी लगाई जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर नवजातों की निगरानी पर पड़ रहा है। स्टाफ कम होने की वजह से एक वार्मर पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता है।
एक पर दो बच्चे, संक्रमण का डर
एसएनसीयू में भर्ती होने वाले नवजातों को लगातार निगरानी, नियंत्रित तापमान और विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। वर्तमान में ड्यूटी पर मौजूद नर्स या कर्मचारी को एक साथ दो-दो बच्चों की देखभाल करनी पड़ रही है। संवेदनशील वार्ड में एक कर्मचारी पर अधिक बच्चों की जिम्मेदारी रहने से न केवल देखरेख प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों के बीच संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
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ट्राएज एरिया में पांच वार्मर
यूनिट में कुल 30 वार्मर तो लगाए गए हैं, लेकिन इनमें से पांच वार्मरों को ट्राएज एरिया के लिए अलग रखा गया है। इसके चलते आम नवजातों के लिए इस्तेमाल होने वाले वार्मरों की संख्या और घट जाती है। जब भी अस्पताल में नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ती है, उपलब्ध सीमित वार्मरों और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों पर दबाव बढ़ जाता है।
स्टाफ बढ़े तो बेहतर हो निगरानी
एनबीएसयू यूनिट में नवजातों की देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ की जरूरत है। स्टाफ कम होने के कारण सभी वार्मरों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रत्येक नवजात की बेहतर निगरानी तभी संभव होगी, जब उसके अनुरूप स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। वर्तमान में सीमित कर्मचारियों के सहारे यूनिट का संचालन हो रहा है।
व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रेडिएंट वार्मरों की संख्या बढ़ाई गई थी। अगर स्टाफ की कमी की वजह से सभी वार्मरों पर मरीज भर्ती नहीं हो रहे हैं तो यह गंभीर बात है। महिला अस्पताल के सीएमएस से पूरी जानकारी लेकर स्टाफ बढ़ाया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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महिला चिकित्सालय में स्पेशल न्यू बॉर्न यूनिट (एसएनसीयू) है। यहां समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों (प्री-मैच्योर) के साथ ही जन्म से ही बीमार बच्चों को रखा जाता है। कम वजन होने, पीलिया होने के कारण भी बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू में वैसे तो 30 वार्मर बेड हैं। लेकिन कई वार्मर खाली होने के बाद भी एक ही वार्मर बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती हैं। इस कारण इनमें एक-दूसरे से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। खास बात यह है कि एसएनसीयू में स्टाफ की कमी लगातार बनी हुई है। यूनिट में स्टाफ नर्स और वार्ड आया को मिलाकर महज 11 कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। ऐसे में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के हिसाब से कर्मचारियों की रोस्टर ड्यूटी लगाई जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर नवजातों की निगरानी पर पड़ रहा है। स्टाफ कम होने की वजह से एक वार्मर पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता है।
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एक पर दो बच्चे, संक्रमण का डर
एसएनसीयू में भर्ती होने वाले नवजातों को लगातार निगरानी, नियंत्रित तापमान और विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। वर्तमान में ड्यूटी पर मौजूद नर्स या कर्मचारी को एक साथ दो-दो बच्चों की देखभाल करनी पड़ रही है। संवेदनशील वार्ड में एक कर्मचारी पर अधिक बच्चों की जिम्मेदारी रहने से न केवल देखरेख प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों के बीच संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
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ट्राएज एरिया में पांच वार्मर
यूनिट में कुल 30 वार्मर तो लगाए गए हैं, लेकिन इनमें से पांच वार्मरों को ट्राएज एरिया के लिए अलग रखा गया है। इसके चलते आम नवजातों के लिए इस्तेमाल होने वाले वार्मरों की संख्या और घट जाती है। जब भी अस्पताल में नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ती है, उपलब्ध सीमित वार्मरों और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों पर दबाव बढ़ जाता है।
स्टाफ बढ़े तो बेहतर हो निगरानी
एनबीएसयू यूनिट में नवजातों की देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ की जरूरत है। स्टाफ कम होने के कारण सभी वार्मरों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रत्येक नवजात की बेहतर निगरानी तभी संभव होगी, जब उसके अनुरूप स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। वर्तमान में सीमित कर्मचारियों के सहारे यूनिट का संचालन हो रहा है।
व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रेडिएंट वार्मरों की संख्या बढ़ाई गई थी। अगर स्टाफ की कमी की वजह से सभी वार्मरों पर मरीज भर्ती नहीं हो रहे हैं तो यह गंभीर बात है। महिला अस्पताल के सीएमएस से पूरी जानकारी लेकर स्टाफ बढ़ाया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य