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सिद्धेश्वर महादेव की अपनी अलग पहचान
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Sat, 22 Aug 2015 11:47 PM IST
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जिले के प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाने वाला
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सिद्धेश्वर महादेव मंदिर 307 वर्ष पुराना है। इसकी भव्यता और विशालता
दूर-दूर तक विख्यात है। यह मंदिर बिलग्राम तहसील क्षेत्र के अंतर्गत
बिलग्राम-कन्नौज मार्ग पर ग्राम मढ़िया (बाबटमऊ) में स्थित है।
इसमें परमपिता ब्रह्मा, भगवान विष्णु, देवाधिदेव महादेव, माता पार्वती, मां दुर्गा, शिवपुत्र कार्तिकेय व भगवान गणेश समेत कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बाहरी द्वार पर उत्तर की ओर भगवान गणेश जी, पूरब में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के बाहर छज्जे के नीचे और ऊपर 8-8 मूर्तियां शोभायमान हो रही हैं।
आठ सिद्धियों से युक्त अष्ट कोणीय इस मंदिर के घेरे में आठ खंभे, आठ कलश, आठ मूर्तियां हैं। इस मंदिर के अंदर और बाहर दीवारों पर खुदी हुई चित्रकारी व आकर्षक डिजाइनें अद्वितीय है। ज्ञात हो कि मंदिर का निर्माण सन् 1707 मेें कराया गया था। मान्यता के अनुसार क्षेत्र में किसी भी मांगलिक कार्यक्रम से पूर्व यहां शिवालय की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि श्रद्धा व विश्वास से यहां भक्तों द्वारा की जाने वाली प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। वर्ष 07 में इस मंदिर के बाहरी भाग का जीर्णोद्धार शिवराम शुक्ल व उनके भतीजे डा. ईश्वरचंद्र शुक्ल द्वारा कराया गया। उधर, सावन में यहां भक्तों की खासी भीड़ भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करने आ रही है। चारों ओर बम-बम भोले, हर-हर महादेव की गूंज सुनाई दे रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय है।
इसमें परमपिता ब्रह्मा, भगवान विष्णु, देवाधिदेव महादेव, माता पार्वती, मां दुर्गा, शिवपुत्र कार्तिकेय व भगवान गणेश समेत कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बाहरी द्वार पर उत्तर की ओर भगवान गणेश जी, पूरब में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के बाहर छज्जे के नीचे और ऊपर 8-8 मूर्तियां शोभायमान हो रही हैं।
आठ सिद्धियों से युक्त अष्ट कोणीय इस मंदिर के घेरे में आठ खंभे, आठ कलश, आठ मूर्तियां हैं। इस मंदिर के अंदर और बाहर दीवारों पर खुदी हुई चित्रकारी व आकर्षक डिजाइनें अद्वितीय है। ज्ञात हो कि मंदिर का निर्माण सन् 1707 मेें कराया गया था। मान्यता के अनुसार क्षेत्र में किसी भी मांगलिक कार्यक्रम से पूर्व यहां शिवालय की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि श्रद्धा व विश्वास से यहां भक्तों द्वारा की जाने वाली प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। वर्ष 07 में इस मंदिर के बाहरी भाग का जीर्णोद्धार शिवराम शुक्ल व उनके भतीजे डा. ईश्वरचंद्र शुक्ल द्वारा कराया गया। उधर, सावन में यहां भक्तों की खासी भीड़ भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करने आ रही है। चारों ओर बम-बम भोले, हर-हर महादेव की गूंज सुनाई दे रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय है।