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सिद्धाश्रम को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 25 May 2015 12:20 AM IST
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तपोवन सिद्धाश्रम धोबिया में स्थित प्राकृतिक जलस्रोत
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के वजूद को बचाए रखने को सेवा भारतीय इकाई हरदोई ने आगे आते हुए यहां
प्लास्टिक के प्रयोग को वर्जित करते हुए थाली और ग्लास आदि उपलब्ध कराएं
हैं।
धोबिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विजय बहादुर, भरत पांडेय, गौरव भदौरिया, नवनीत वाजपेई व अवधेश रस्तोगी आदि ने 84 हजार वैष्णवों की तपस्थली रहे धोबिया आश्रम में प्राकृतिक जलस्रोत को मौजूदा समय में पालीथिन के प्रयोग से खतरे पर चिंता जताई।
वक्ताओं ने कहा कि लगातार प्रदूषण फैलाने से जलस्रोत अपना प्राकृतिक स्वरूप खोता जा रहा है। यदि यहां पालीथिन का प्रयोग यूं जारी रहा तो आश्रम की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला जलस्रोत भी पहचान खो सकता है। इस दौरान संगठन ने आश्रम प्रबंधन को शामिल करते हुए आश्रम पर सफाई अभियान चलाया और श्रद्धालुओं द्वारा पालीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
इकाई की ओर से आश्रम प्रबंधन को इस कार्य के लिए थाली और ग्लास मुहैया कराए गए। हर समय आश्रम पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह थाली-ग्लास मुहैया रहेंगे। इस दौरान सुनीत बाजपेई, ओमप्रकाश सौरभ सिंह, जुल्फिकार, केशवम, प्रतीक, गौरव, आयूष व अतुल राठौर आदि ने श्रमदान करते हुए आश्रम को साफ सुथरा किया और स्वयं भी यहां पर अब से प्लास्टिक सामग्री का प्रयोग नहीं करने का संकल्प लिया।
धोबिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विजय बहादुर, भरत पांडेय, गौरव भदौरिया, नवनीत वाजपेई व अवधेश रस्तोगी आदि ने 84 हजार वैष्णवों की तपस्थली रहे धोबिया आश्रम में प्राकृतिक जलस्रोत को मौजूदा समय में पालीथिन के प्रयोग से खतरे पर चिंता जताई।
वक्ताओं ने कहा कि लगातार प्रदूषण फैलाने से जलस्रोत अपना प्राकृतिक स्वरूप खोता जा रहा है। यदि यहां पालीथिन का प्रयोग यूं जारी रहा तो आश्रम की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला जलस्रोत भी पहचान खो सकता है। इस दौरान संगठन ने आश्रम प्रबंधन को शामिल करते हुए आश्रम पर सफाई अभियान चलाया और श्रद्धालुओं द्वारा पालीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
इकाई की ओर से आश्रम प्रबंधन को इस कार्य के लिए थाली और ग्लास मुहैया कराए गए। हर समय आश्रम पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह थाली-ग्लास मुहैया रहेंगे। इस दौरान सुनीत बाजपेई, ओमप्रकाश सौरभ सिंह, जुल्फिकार, केशवम, प्रतीक, गौरव, आयूष व अतुल राठौर आदि ने श्रमदान करते हुए आश्रम को साफ सुथरा किया और स्वयं भी यहां पर अब से प्लास्टिक सामग्री का प्रयोग नहीं करने का संकल्प लिया।