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Hardoi News: महिला अस्पताल में एंटीबॉयोटिक, एंटी एलर्जिक दवाओं की कमी
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फाेटोा-15- महिला अस्पताल के दवा काउंटर पर खड़े मरीज। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय में भी मरीजों को पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को आयरन, विटामिन और फोलिक एसिड की दवाएं मिल जाती हैं लेकिन अन्य रोग होने पर मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदनी पड़ती है। आलम यह है कि एंटी एलर्जिक और एंटी बायोटिक दवाओं तक का टोटा है।
जिला अस्पताल भले ही पांच साल पहले स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में तब्दील हो गया है लेकिन दवाओं का मानक अभी तक नहीं बदला। मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार तय मानक के अनुरूप मेडिकल कॉलेज में 735 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए लेकिन जिले में 340 प्रकार की दवाएं ही आती हैं। उस पर भी दवाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर भी दवाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं, अब तो महिला अस्पताल में भी दवाओं की कमी सामने आ रही है। गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली दवाएं मिल जाती हैं लेकिन इसके अलावा ब्लीडिंग रोकने समेत एंटी बायोटिक और एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं। यह सारी दवाइयां महिलाओं को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
केस-1- सिविल लाइन निवासी रेनू अस्वस्थ हैं। चिकित्सक ने देखा और दवाएं लिख दीं। दवाएं अस्पताल की फार्मेसी में थी ही नहीं। दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी।
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केस-2- बनरई चतरखा निवासी रीना पांडेय ने बताया कि चिकित्सक को दिखाया था। आयरन और विटामिन की दवा तो मिल गई लेकिन एक दवा और लिख, जो नहीं मिली।
दवाओं की कमी न हो इसकी पूरी कोशिश हो रही है। बजट आने पर ही दवाएं मंगवाई जा सकती हैं। कई बार बजट आने में देरी हो जाती है। इस वजह से समय लग जाता है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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जिला अस्पताल भले ही पांच साल पहले स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में तब्दील हो गया है लेकिन दवाओं का मानक अभी तक नहीं बदला। मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार तय मानक के अनुरूप मेडिकल कॉलेज में 735 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए लेकिन जिले में 340 प्रकार की दवाएं ही आती हैं। उस पर भी दवाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर भी दवाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं, अब तो महिला अस्पताल में भी दवाओं की कमी सामने आ रही है। गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली दवाएं मिल जाती हैं लेकिन इसके अलावा ब्लीडिंग रोकने समेत एंटी बायोटिक और एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं। यह सारी दवाइयां महिलाओं को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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केस-1- सिविल लाइन निवासी रेनू अस्वस्थ हैं। चिकित्सक ने देखा और दवाएं लिख दीं। दवाएं अस्पताल की फार्मेसी में थी ही नहीं। दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी।
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केस-2- बनरई चतरखा निवासी रीना पांडेय ने बताया कि चिकित्सक को दिखाया था। आयरन और विटामिन की दवा तो मिल गई लेकिन एक दवा और लिख, जो नहीं मिली।
दवाओं की कमी न हो इसकी पूरी कोशिश हो रही है। बजट आने पर ही दवाएं मंगवाई जा सकती हैं। कई बार बजट आने में देरी हो जाती है। इस वजह से समय लग जाता है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज