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16 कांधों पर निकली परंपरागत हाथी बाबा की शोभा यात्रा
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मल्लावां। राघौपुर में होली के एक दिन बाद से लगने वाला दो दिवसीय ऐतिहासिक हथिया मेला गुरुवार को सकुशल संपन्न हो गया। कमेटी के लोगों की अगुवाई में बुधवार की शाम कंबल से बने हाथी बाबा की शोभा यात्रा राघौपुर गांव क्षेत्र में निकाली गई।
बुधवार को पूजन के बाद राघौपुर गांव में हथिया मेला का शुभारंभ हुआ। इसके बाद प्रतीकात्मक हाथी बनाकर उसका पूजन किया गया। शाम को परंपरागत रूप से 16 कहारों ने प्रतीकात्मक हाथी को कांधे पर उठाकर राघौपुर समेत नेवादा, हजरतपुर, औसानपुर व हर्रैया आदि गांव में यात्रा निकाली। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने हाथी बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। राघौपुर निवासी रत्नेश सिंह व जयपाल सिंह ने बताया कि प्राचीनकाल में बाबा राघौदास इस गांव के राजा हुआ करते थे।
उन्हीं के नाम से गांव का नाम राघौपुर रखा गया। बताया कि एक बार राजा राघौदास बाबा का अपने भाई से किसी बात पर मनमुटाव हो गया। इससे नाराज होकर वह घर छोड़कर चले गए। यहां से जाने के बाद किसी तरह ग्वालियर पहुंचे। बाबा राघौदास ने सामान्य व्यक्ति के रूप में ग्वालियर के राजघराने में जाकर नौकरी कर ली। इधर खोजबीन करते हुए परिजन ग्वालियर पहुंचे तो उन्हें बाबा राघौदास राजघराने में काम करते मिले। रत्नेश सिंह व जयपाल सिंह के मुताबिक जब परिजनों के जरिए ग्वालियर के राजा को यह पता चला कि उनके यहां नौकरी करने वाले राघौदास स्वयं राघौपुर के राजा हैं तो उन्होंने राघौदास को अपने पास बुलाकर उन्हें भेंट देकर विदा करना चाहा, लेकिन राजा राघौदास बाबा ने भेंट लेने से इंकार कर दिया।
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ग्रामीणों के मुताबिक ग्वालियर में होली के बाद दो प्रतीकात्मक हाथी बनाकर उनकी प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से पूजा किए जाने का रिवाज था। राजा राघौदास बाबा ने ग्वालियर के राजा से भेंट स्वरूप उन्हीं दोनों में से एक हाथी मांग लिया। हाथी भेंट में मिलने के बाद राजा राघौदास उसे अपने साथ ले आए। इसके बाद से गांव में प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से हथिया मेला का आयोजन कर प्रतीकात्मक हाथी का पूजन किया जाता है। इस मौके पर जगेंद्र सिंह, जयपाल सिंह, लल्लू सिंह, सुशील श्रीवास्तव, बड़क्के सिंह, मोनू सिंह, शिवकमल सिंह, कमल सिंह, विरेंद्र सिंह, चंदू कश्यप, मुन्ना, मंगलू, जयचंद्र, रामआसरे, सुरेश व लीला आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को पूजन के बाद राघौपुर गांव में हथिया मेला का शुभारंभ हुआ। इसके बाद प्रतीकात्मक हाथी बनाकर उसका पूजन किया गया। शाम को परंपरागत रूप से 16 कहारों ने प्रतीकात्मक हाथी को कांधे पर उठाकर राघौपुर समेत नेवादा, हजरतपुर, औसानपुर व हर्रैया आदि गांव में यात्रा निकाली। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने हाथी बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। राघौपुर निवासी रत्नेश सिंह व जयपाल सिंह ने बताया कि प्राचीनकाल में बाबा राघौदास इस गांव के राजा हुआ करते थे।
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उन्हीं के नाम से गांव का नाम राघौपुर रखा गया। बताया कि एक बार राजा राघौदास बाबा का अपने भाई से किसी बात पर मनमुटाव हो गया। इससे नाराज होकर वह घर छोड़कर चले गए। यहां से जाने के बाद किसी तरह ग्वालियर पहुंचे। बाबा राघौदास ने सामान्य व्यक्ति के रूप में ग्वालियर के राजघराने में जाकर नौकरी कर ली। इधर खोजबीन करते हुए परिजन ग्वालियर पहुंचे तो उन्हें बाबा राघौदास राजघराने में काम करते मिले। रत्नेश सिंह व जयपाल सिंह के मुताबिक जब परिजनों के जरिए ग्वालियर के राजा को यह पता चला कि उनके यहां नौकरी करने वाले राघौदास स्वयं राघौपुर के राजा हैं तो उन्होंने राघौदास को अपने पास बुलाकर उन्हें भेंट देकर विदा करना चाहा, लेकिन राजा राघौदास बाबा ने भेंट लेने से इंकार कर दिया।
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ग्रामीणों के मुताबिक ग्वालियर में होली के बाद दो प्रतीकात्मक हाथी बनाकर उनकी प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से पूजा किए जाने का रिवाज था। राजा राघौदास बाबा ने ग्वालियर के राजा से भेंट स्वरूप उन्हीं दोनों में से एक हाथी मांग लिया। हाथी भेंट में मिलने के बाद राजा राघौदास उसे अपने साथ ले आए। इसके बाद से गांव में प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से हथिया मेला का आयोजन कर प्रतीकात्मक हाथी का पूजन किया जाता है। इस मौके पर जगेंद्र सिंह, जयपाल सिंह, लल्लू सिंह, सुशील श्रीवास्तव, बड़क्के सिंह, मोनू सिंह, शिवकमल सिंह, कमल सिंह, विरेंद्र सिंह, चंदू कश्यप, मुन्ना, मंगलू, जयचंद्र, रामआसरे, सुरेश व लीला आदि मौजूद रहे।