{"_id":"602025a88ebc3ed1b30bdae8","slug":"shehzadi-fatima-jahra-is-ideal-for-women-fariduddin-hardoi-news-knp61049452","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं के लिए आदर्श हैं शहजादी फातिमा जहरा: फरीदुद्दीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं के लिए आदर्श हैं शहजादी फातिमा जहरा: फरीदुद्दीन
विज्ञापन
संडीला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते तहरीक परचमें मोहम्मदी के अध्यक्ष मौलाना फरीउद्दीन?
- फोटो : HARDOI
संडीला। पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी शहजादी सय्यदा फातिमा जहरा के जन्मदिन के अवसर पर नगर में स्थित खानकाह सागरया निजामिया में तहरीक परचम-ए-मोहम्मदी की ओर से शनिवार की रात शान-ए-सय्यदाए कायनात कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।
अध्यक्षता डॉ. जुबैर अहमद नक्शबंदी ने की। मौलाना सरवर जमाल ने कुरआन पढ़कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि तहरीक परचम-ए-मोहम्मदी के अध्यक्ष फरीदउद्दीन ने कहा कि हजरत फातिमा बीबी का जीवन सभी महिलाओं के लिए मिसाल है।
इस्लाम और कायनात में शहजादी फातिमा जहरा पवित्रता और सत्यता की केंद्र हैं। मुस्लिम महिलाओं को पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण करने के बजाय हजरत फातिमा जहरा की शिक्षा को अपनाना चाहिए। दरगाह हजरत सागर मियां के सज्जादानशीन मुईजउद्दीन अहमद सागरी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब के बाद अहलेबैत अतहार का सिलसिला जारी रहा।
विज्ञापन
इसमें रसूल-ए-अकरम समेत हजरत अली, बीबी फातिमा जहरा, इमाम हसन व इमाम हुसैन शामिल हैं। कहा जब कभी पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी उनसे मिलने आती थीं तो वे बेटी के सम्मान में खड़े हो जाते थे।
उन्होंने बेटियों से मोहब्बत करने व उनका सम्मान करने की सीख दी। इस मौके पर शफी अहमद साबरी, मुन्ना साबरी, सूफी एहतेशाम, अनवारुल हक, मसूदूल हसन, फरहान सागरी, फय्याज सागरी, दावर रजा, फरहत महमूद व अन्य शायरों ने कलाम पेश किए। संचालन सूफी इकबाल अहमद नक्शबंदी ने किया।
विज्ञापन
अध्यक्षता डॉ. जुबैर अहमद नक्शबंदी ने की। मौलाना सरवर जमाल ने कुरआन पढ़कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि तहरीक परचम-ए-मोहम्मदी के अध्यक्ष फरीदउद्दीन ने कहा कि हजरत फातिमा बीबी का जीवन सभी महिलाओं के लिए मिसाल है।
विज्ञापन
इस्लाम और कायनात में शहजादी फातिमा जहरा पवित्रता और सत्यता की केंद्र हैं। मुस्लिम महिलाओं को पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण करने के बजाय हजरत फातिमा जहरा की शिक्षा को अपनाना चाहिए। दरगाह हजरत सागर मियां के सज्जादानशीन मुईजउद्दीन अहमद सागरी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब के बाद अहलेबैत अतहार का सिलसिला जारी रहा।
विज्ञापन
इसमें रसूल-ए-अकरम समेत हजरत अली, बीबी फातिमा जहरा, इमाम हसन व इमाम हुसैन शामिल हैं। कहा जब कभी पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी उनसे मिलने आती थीं तो वे बेटी के सम्मान में खड़े हो जाते थे।
उन्होंने बेटियों से मोहब्बत करने व उनका सम्मान करने की सीख दी। इस मौके पर शफी अहमद साबरी, मुन्ना साबरी, सूफी एहतेशाम, अनवारुल हक, मसूदूल हसन, फरहान सागरी, फय्याज सागरी, दावर रजा, फरहत महमूद व अन्य शायरों ने कलाम पेश किए। संचालन सूफी इकबाल अहमद नक्शबंदी ने किया।