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‘संस्कृत भाषा आज भी सर्वोपरि’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Fri, 28 Aug 2015 11:56 PM IST
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स्मृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान मेें संस्कृत दिवस की पूर्व बेला पर
शुक्रवार को आर्य समाज मंदिर में एक विचार गोष्ठी के साथ संस्कृत निबंध और
श्लोक गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि पीसीएस में चयनित सत्यम मिश्र, अध्यक्ष वंशीधर शुक्ल व डा. शिवशरण सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलन व सीमा मिश्रा ने वाणी वंदना की। इस मौके पर मुख्य अतिथि सत्यम मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा का तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक योगदान होने के कारण संस्कृत का स्थान आज के दौर में भी सर्वोपरि है।
वंशीधर शुक्ल ने कहा कि युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी संस्कृति व संस्कृत भाषा को प्रचारित और प्रसारित करें, जिससे हम अपने मानवीय मूल्यों को संरक्षित कर सकें। सकाहा संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शिवशरण सिंह चौहान ने कहा कि संस्कृत जो सभी भाषाओं की जननी है आज उपेक्षित है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को संस्कृत शिक्षा की ओर उन्मुख करें। उन्होंने कहा कि हमारी आदि भाषा का नाम संस्कृत इसलिए है, क्योंकि इसमें संस्कृति निहित है। पुष्पेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम ऊं चे उठें, मगर अपने संस्कारों को कदापि न भूले।
इस मौके पर आयोजित संस्कृत निबंध प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में आयुष मिश्र, प्रणव मिश्रा, प्रदीप राठौर, वरिष्ठ वर्ग में अरविंद कुमार, अंबुज कुमार, अपर्णा दीक्षित क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। संस्कृत श्लोक गायन प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में सिद्धार्थ दीक्षित, अनुराधा पाल, अमित कुमार, वरिष्ठ वर्ग में अंजना पटेल प्रथम, अनामिका क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन महेश मिश्रा व अतिथियों का आभार श्याम त्रिवेदी ने व्यक्त किया। इस मौके पर रामदेव बाजपेयी, आदर्श द्विवेदी, अंकित काव्यांश, मनोज कुमार, बृजराज सिंह तोमर, केपी पांडे, वेद प्रकाश अवस्थी, कृष्ण गोपाल किशन, राजेश मिश्र और अरविंद मिश्र आदि लोग मौजूद थे।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि पीसीएस में चयनित सत्यम मिश्र, अध्यक्ष वंशीधर शुक्ल व डा. शिवशरण सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलन व सीमा मिश्रा ने वाणी वंदना की। इस मौके पर मुख्य अतिथि सत्यम मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा का तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक योगदान होने के कारण संस्कृत का स्थान आज के दौर में भी सर्वोपरि है।
वंशीधर शुक्ल ने कहा कि युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी संस्कृति व संस्कृत भाषा को प्रचारित और प्रसारित करें, जिससे हम अपने मानवीय मूल्यों को संरक्षित कर सकें। सकाहा संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शिवशरण सिंह चौहान ने कहा कि संस्कृत जो सभी भाषाओं की जननी है आज उपेक्षित है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को संस्कृत शिक्षा की ओर उन्मुख करें। उन्होंने कहा कि हमारी आदि भाषा का नाम संस्कृत इसलिए है, क्योंकि इसमें संस्कृति निहित है। पुष्पेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम ऊं चे उठें, मगर अपने संस्कारों को कदापि न भूले।
इस मौके पर आयोजित संस्कृत निबंध प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में आयुष मिश्र, प्रणव मिश्रा, प्रदीप राठौर, वरिष्ठ वर्ग में अरविंद कुमार, अंबुज कुमार, अपर्णा दीक्षित क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। संस्कृत श्लोक गायन प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में सिद्धार्थ दीक्षित, अनुराधा पाल, अमित कुमार, वरिष्ठ वर्ग में अंजना पटेल प्रथम, अनामिका क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन महेश मिश्रा व अतिथियों का आभार श्याम त्रिवेदी ने व्यक्त किया। इस मौके पर रामदेव बाजपेयी, आदर्श द्विवेदी, अंकित काव्यांश, मनोज कुमार, बृजराज सिंह तोमर, केपी पांडे, वेद प्रकाश अवस्थी, कृष्ण गोपाल किशन, राजेश मिश्र और अरविंद मिश्र आदि लोग मौजूद थे।