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कागजों पर पूरे, जमीन पर अधूरे शौचालय तबेले में तब्दील
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भरावन। पंचायत राज विभाग के अधीन ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में भले ही तेजी दिखाए जाने का दावा किया गया हो, लेकिन शौचालयों की दशा इसकी पोल खोल रही है। भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बकवा में दो सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। एक शौचालय के निर्माण के छह माह के अंदर ही पल्ले तक टूट गए तो दूसरा शौचालय अब भी अधूरा ही पड़ा है। खास बात यह है कि उक्त दोनों ही सामुदायिक शौचालय कागजों पर पूरे हैं और इनका भुगतान भी किया जा चुका है।
यूं तो सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य था, लेकिन भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बकवा में दो सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हुआ। एक सामुदायिक शौचालय ग्राम बकवा में ही बनाया गया तो दूसरा इसके मजरा कड़ेला में बना दिया गया। कड़ेला में बना सामुदायिक शौचालय तबेले सा हो गया है। शौचालय के भीतर लगवाए गए पल्ले छह माह भी नहीं टिके। शौचालय में न तो पानी का कोई इंतजाम है और न ही साफ-सफाई का। सामुदायिक शौचालय में मवेशियों की आवाजाही रहती है। यहां न तो पुताई हुई है और न ही टैंक का निर्माण हुआ है। पानी का कोई इंतजाम नहीं है। इसी तरह बकवा का सामुदायिक शौचालय भी दुर्दशा का शिकार है।
अधूरे शौचालयों पर इतना हो चुका खर्चा
दोनों सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के नाम पर 9,40,479 रुपये सिर्फ सामग्री अंश पर खर्च किए गए। मजदूरी के नाम पर 1,15,200 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इतना ही नहीं इन अधूरे शौचालयों के रखरखाव के नाम पर दो स्वयं सहायता समूहों को 45 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। तिरंगा महिला स्वयं सहायता समूह को ग्राम बकवा में बने शौचालय में केयरटेकर के लिए 18 हजार रुपये का और सफाई सामग्री के लिए नौ हजार रुपये का भुगतान किया गया है। एक अन्य स्वयं सहायता समूह मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह को केयर टेकर के लिए 12 हजार रुपये और सफाई सामग्री के लिए छह हजार रुपये का भुगतान किया गया है।
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जिम्मेदारों की सुनिए
भरावन के खंड विकास अधिकारी राजीव गुप्ता ने कहा कि अब तक यह प्रकरण अब जानकारी में आया है। विस्तृत जांच करा ली जाएगी। शौचालय अगर अधूरे हैं तो इन्हें पूरा कराया जाएगा और लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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यूं तो सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य था, लेकिन भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बकवा में दो सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हुआ। एक सामुदायिक शौचालय ग्राम बकवा में ही बनाया गया तो दूसरा इसके मजरा कड़ेला में बना दिया गया। कड़ेला में बना सामुदायिक शौचालय तबेले सा हो गया है। शौचालय के भीतर लगवाए गए पल्ले छह माह भी नहीं टिके। शौचालय में न तो पानी का कोई इंतजाम है और न ही साफ-सफाई का। सामुदायिक शौचालय में मवेशियों की आवाजाही रहती है। यहां न तो पुताई हुई है और न ही टैंक का निर्माण हुआ है। पानी का कोई इंतजाम नहीं है। इसी तरह बकवा का सामुदायिक शौचालय भी दुर्दशा का शिकार है।
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अधूरे शौचालयों पर इतना हो चुका खर्चा
दोनों सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के नाम पर 9,40,479 रुपये सिर्फ सामग्री अंश पर खर्च किए गए। मजदूरी के नाम पर 1,15,200 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इतना ही नहीं इन अधूरे शौचालयों के रखरखाव के नाम पर दो स्वयं सहायता समूहों को 45 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। तिरंगा महिला स्वयं सहायता समूह को ग्राम बकवा में बने शौचालय में केयरटेकर के लिए 18 हजार रुपये का और सफाई सामग्री के लिए नौ हजार रुपये का भुगतान किया गया है। एक अन्य स्वयं सहायता समूह मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह को केयर टेकर के लिए 12 हजार रुपये और सफाई सामग्री के लिए छह हजार रुपये का भुगतान किया गया है।
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जिम्मेदारों की सुनिए
भरावन के खंड विकास अधिकारी राजीव गुप्ता ने कहा कि अब तक यह प्रकरण अब जानकारी में आया है। विस्तृत जांच करा ली जाएगी। शौचालय अगर अधूरे हैं तो इन्हें पूरा कराया जाएगा और लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।