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सई नदी पर बना पुल डूबा, ग्रामीणों को नाव का सहारा
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फोटो-11- उमरसेड़ा पुल के पास नाव के सहारे नदी पार करते लोग। संवाद
- फोटो : HARDOI
पिहानी। सई नदी पर ग्राम उमरसेड़ा के पास बना 58 साल पुराना पुल न सिर्फ जर्जर हो गया है, बल्कि काफी नीचा भी हो गया है। बारिश के मौसम में हर साल नदी उफना जाती है, जिसके चलते पानी पुल के कई फुट ऊपर से बहने लगता है। 14 अगस्त को आई बारिश के बाद नदी का पुल लगभग पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। ऐेसे में लोग नाव में बैठकर इधर से उधर जाने का जोखिम उठाने को मजबूर हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लगातार मांग किए जाने के बाद भी अब तक जिम्मेदारों ने पुल के निर्माण की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किए। आधा दर्जन गांवों की करीब सात हजार की आबादी का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
ग्राम उमरसेड़ा के पास से गुजरी सई नदी के ऊपर बने पुल का निर्माण वर्ष 1962 में गन्ना समिति द्वारा करवाया गया था। तब सड़क भी नीची थी, जिसके चलते निर्माण के समय पुल की ऊंचाई पर्याप्त मानी गई थी। हालांकि वक्त बीतने के साथ ही सड़क का कई बार निर्माण हुआ, जिसके चलते आसपास की सतह व सड़क की ऊंचाई पर्याप्त हो गई, जबकि पुल का दोबारा निर्माण नहीं कराया जा सका। लगभग 58 साल पहले बना पुल जिम्मेदारों की उपेक्षा की चलते जर्जर हो चुका है। हर साल बारिश में नदी उफान पर आ जाती है, जिसके चलते नीचा हो चुका पुल पानी में डूब जाता है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही हैं।
पिछले कई दिनों से पुल पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है, पानी नदी की जद से बाहर बह रहा है, जिसके चलते आस पास की सैकड़ों बीघा धान व गन्ना आदि की फसल डूब चुकी है। यही नहीं सड़क/पुल मार्ग से आवागमन भी पूरी से बाधित है। यह मार्ग/पुल उमरसेड़ा समेत क्षेत्र के ग्राम सबरदा, सरैयां, लेहना, बेला कपूरपुर, देवरिया व फत्तेपुर आदि को कस्बा व शहर जाने वाले मार्ग से जोड़ता है। पुल, सड़क व आसपास खेतों में पानी भरा होने के कारण क्षेत्र के लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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क्षेत्र के वेद प्रकाश, राजेंद्र व श्रीकृष्ण कुशवाहा आदि ने बताया कि पुल व मार्ग के जलमग्न होने के बाद क्षेत्र का कस्बे व मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। जो लोग तैरना जानते हैं। वह तो जैसे तैसे पुल पार करते लेते हैं, लेकिन महिला, बुजुर्गों व बच्चों समेत जो लोग तैरना नहीं जानते हैं उन्हें क्षेत्र के लोगों द्वारा नदी में डाली गई नाव पर बैठकर नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है।
पिहानी। सई के उफान पर होने के कारण उमरसेड़ा गांव के आसपास पानी भर गया है। खेतों मेें पानी भरने के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई है। परेशान किसान पंपिंग सेट व अन्य संसाधनों से खेतों में भरा पानी निकालने की कवायद में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि अगर पानी नहीं निकाला गया तो फसल सड़ कर खराब हो जाएगी।
- उमरसेड़ा गांव निवासी संतोष सिंह ने बताया कि यूं तो पुल और रास्ते के डूबने से सभी को परेशानी होती है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी रोगियों को अस्पताल ले जाने व रोज नौकरी पर जाने वाले लोगों को उठानी पड़ती है। कई बार पानी में सही अंदाजा न लगा पाने के कारण लोग गिरकर चुटहिल भी हो चुके हैं।
- उमरसेड़ा गांव निवासी गुड्डू चौहान ने बताया कि उनकी धान व गन्ने की फसल में पानी भर गया है। ज्यादा पानी भर जाने से गन्ने की फसल पलटने लगी है। धान की फसल के सडने का भी खतरा बढ़ गया है। निजी संसाधनो से खेत में भरा पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि इस बार जो भी चुनाव में वोट मांगने आएगा, उसे इस समस्या के निस्तारण के प्रति अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
- सूबेदार ने बताया कि नदी उफनाने के दौरान सिर्फ पुल पर ही पानी भरने व फसल खराब होने की समस्या नहीं है। यह पानी लोगों के लिए जानलेवा भी है। बताया कि पांच साल के अंदर कई बार हादसे हो चुके हैं। हर बार नेता व अधिकारी जल्द से जल्द पुल बनवाने की बात कहते हैं, लेकिन वक्त बीतने के बाद फिर से बात आई गई हो जाती है।
- उमरसेड़ा के किसान रामआसरे मिश्रा ने बताया कि सई नदी के उफनाने से पुल व आस पास पानी भर जाने की समस्या से दर्जनों गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया कि हर बार चुनाव के समय नेताओं द्वारा पुल बनावाए जाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक बात आश्वासन के आगे नहीं बढ़ सकी।
- प्रधान प्रतिनिधि सुशील गुप्ता ने बताया कि विधायक श्याम प्रकाश को इस समस्या से कई बार अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने पुल का निर्माण कराए जाने का आश्वासन भी दिया है। विधायक व अधिकारियों की ओर से जानकारी मिली है कि पुल का स्टीमेट शासन भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद पुल निर्माण का काम शुरू कराया जाएगा।
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ग्राम उमरसेड़ा के पास से गुजरी सई नदी के ऊपर बने पुल का निर्माण वर्ष 1962 में गन्ना समिति द्वारा करवाया गया था। तब सड़क भी नीची थी, जिसके चलते निर्माण के समय पुल की ऊंचाई पर्याप्त मानी गई थी। हालांकि वक्त बीतने के साथ ही सड़क का कई बार निर्माण हुआ, जिसके चलते आसपास की सतह व सड़क की ऊंचाई पर्याप्त हो गई, जबकि पुल का दोबारा निर्माण नहीं कराया जा सका। लगभग 58 साल पहले बना पुल जिम्मेदारों की उपेक्षा की चलते जर्जर हो चुका है। हर साल बारिश में नदी उफान पर आ जाती है, जिसके चलते नीचा हो चुका पुल पानी में डूब जाता है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही हैं।
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पिछले कई दिनों से पुल पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है, पानी नदी की जद से बाहर बह रहा है, जिसके चलते आस पास की सैकड़ों बीघा धान व गन्ना आदि की फसल डूब चुकी है। यही नहीं सड़क/पुल मार्ग से आवागमन भी पूरी से बाधित है। यह मार्ग/पुल उमरसेड़ा समेत क्षेत्र के ग्राम सबरदा, सरैयां, लेहना, बेला कपूरपुर, देवरिया व फत्तेपुर आदि को कस्बा व शहर जाने वाले मार्ग से जोड़ता है। पुल, सड़क व आसपास खेतों में पानी भरा होने के कारण क्षेत्र के लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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क्षेत्र के वेद प्रकाश, राजेंद्र व श्रीकृष्ण कुशवाहा आदि ने बताया कि पुल व मार्ग के जलमग्न होने के बाद क्षेत्र का कस्बे व मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। जो लोग तैरना जानते हैं। वह तो जैसे तैसे पुल पार करते लेते हैं, लेकिन महिला, बुजुर्गों व बच्चों समेत जो लोग तैरना नहीं जानते हैं उन्हें क्षेत्र के लोगों द्वारा नदी में डाली गई नाव पर बैठकर नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है।
पिहानी। सई के उफान पर होने के कारण उमरसेड़ा गांव के आसपास पानी भर गया है। खेतों मेें पानी भरने के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई है। परेशान किसान पंपिंग सेट व अन्य संसाधनों से खेतों में भरा पानी निकालने की कवायद में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि अगर पानी नहीं निकाला गया तो फसल सड़ कर खराब हो जाएगी।
- उमरसेड़ा गांव निवासी संतोष सिंह ने बताया कि यूं तो पुल और रास्ते के डूबने से सभी को परेशानी होती है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी रोगियों को अस्पताल ले जाने व रोज नौकरी पर जाने वाले लोगों को उठानी पड़ती है। कई बार पानी में सही अंदाजा न लगा पाने के कारण लोग गिरकर चुटहिल भी हो चुके हैं।
- उमरसेड़ा गांव निवासी गुड्डू चौहान ने बताया कि उनकी धान व गन्ने की फसल में पानी भर गया है। ज्यादा पानी भर जाने से गन्ने की फसल पलटने लगी है। धान की फसल के सडने का भी खतरा बढ़ गया है। निजी संसाधनो से खेत में भरा पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि इस बार जो भी चुनाव में वोट मांगने आएगा, उसे इस समस्या के निस्तारण के प्रति अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
- सूबेदार ने बताया कि नदी उफनाने के दौरान सिर्फ पुल पर ही पानी भरने व फसल खराब होने की समस्या नहीं है। यह पानी लोगों के लिए जानलेवा भी है। बताया कि पांच साल के अंदर कई बार हादसे हो चुके हैं। हर बार नेता व अधिकारी जल्द से जल्द पुल बनवाने की बात कहते हैं, लेकिन वक्त बीतने के बाद फिर से बात आई गई हो जाती है।
- उमरसेड़ा के किसान रामआसरे मिश्रा ने बताया कि सई नदी के उफनाने से पुल व आस पास पानी भर जाने की समस्या से दर्जनों गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया कि हर बार चुनाव के समय नेताओं द्वारा पुल बनावाए जाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक बात आश्वासन के आगे नहीं बढ़ सकी।
- प्रधान प्रतिनिधि सुशील गुप्ता ने बताया कि विधायक श्याम प्रकाश को इस समस्या से कई बार अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने पुल का निर्माण कराए जाने का आश्वासन भी दिया है। विधायक व अधिकारियों की ओर से जानकारी मिली है कि पुल का स्टीमेट शासन भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद पुल निर्माण का काम शुरू कराया जाएगा।