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‘सहाबा के तर्जे जिंदगी पर जीएं मुसलमान’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:57 PM IST
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बीती रात मसजिद इस्लामगंज के पास मौलवी सलामत अली की
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याद में हुए दीनी जलसे में उलमा-ए-कराम ने रसूल और सहाबा के जीवन को अपने
लिए नमूना बनाने की मुसलमानों को सीख दी।
तकरीर करते हुए मौलाना सगीर अहमद कासमी ने कहा कि रसूल सल्ल. ने हमें जो रास्ता दिखाया, वह कामयाबी और जन्नत में ले जाने वाला रास्ता है। रसूल का तर्जे जिंदगी का क्या था ये हमें हजराते सहाबा-ए-कराम की जिंदगी से पता चलेगा। कहा कि सीधे रास्ते पर चलने को हमें देखना चाहिए कि सहाबा किस रास्ते पर चले थे।
मौलाना ने कहा कि रसूल के रास्ते से भटक कर हम परेशानियों और जलालत का शिकार हो रहे हैं। इससे पहले कारी सिराजुद्दीन ने तकरीर में घरों का माहौल बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हमारी मां-बहनों को अपने घर के अंदर का माहौल भी सुधारना चाहिए। जिस घर में तिलावते कुरान नहीं होती, वहां अल्लाह की रहमत और बरकत नहीं आती है।
पांच वक्त की नमाज की पाबंदी से चेहरे पर नूर और जीवन में सुकून पाया जा सकता है। लेनदेन को साफ सुथरा रखें। किसी को नाहक सताने वाले मोमिन नहीं हो सकता। हमारे नबी ने सब्र और शुक्र की तालीम दी थी। आपने गालियां खाकर दुआएं दीं। हमें चाहिए कि नबी की जिंदगी को नमूना बनाकर जीएं।
इससे पहले जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान से हुई। हैरत पिहानवी व फुजैल ने नाते पाक पेश की। इस मौके पर आमिर खां, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद अहमद, दिलशाद, तौसीफ, अफ्फान, उवैस, दिलशाद, जावेद, शुऐब व खालिद आदि मौजूद थे। अंत में देश-दुनिया में शांति स्थापना की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
तकरीर करते हुए मौलाना सगीर अहमद कासमी ने कहा कि रसूल सल्ल. ने हमें जो रास्ता दिखाया, वह कामयाबी और जन्नत में ले जाने वाला रास्ता है। रसूल का तर्जे जिंदगी का क्या था ये हमें हजराते सहाबा-ए-कराम की जिंदगी से पता चलेगा। कहा कि सीधे रास्ते पर चलने को हमें देखना चाहिए कि सहाबा किस रास्ते पर चले थे।
मौलाना ने कहा कि रसूल के रास्ते से भटक कर हम परेशानियों और जलालत का शिकार हो रहे हैं। इससे पहले कारी सिराजुद्दीन ने तकरीर में घरों का माहौल बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हमारी मां-बहनों को अपने घर के अंदर का माहौल भी सुधारना चाहिए। जिस घर में तिलावते कुरान नहीं होती, वहां अल्लाह की रहमत और बरकत नहीं आती है।
पांच वक्त की नमाज की पाबंदी से चेहरे पर नूर और जीवन में सुकून पाया जा सकता है। लेनदेन को साफ सुथरा रखें। किसी को नाहक सताने वाले मोमिन नहीं हो सकता। हमारे नबी ने सब्र और शुक्र की तालीम दी थी। आपने गालियां खाकर दुआएं दीं। हमें चाहिए कि नबी की जिंदगी को नमूना बनाकर जीएं।
इससे पहले जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान से हुई। हैरत पिहानवी व फुजैल ने नाते पाक पेश की। इस मौके पर आमिर खां, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद अहमद, दिलशाद, तौसीफ, अफ्फान, उवैस, दिलशाद, जावेद, शुऐब व खालिद आदि मौजूद थे। अंत में देश-दुनिया में शांति स्थापना की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।