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चुनावी वादों के करंट से राजस्व वसूली अटकी

Thu, 24 Feb 2022 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 11:23 PM IST
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Revenue recovery stuck due to election promises
हरदोई। विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्रों में किए गए वादों का असर दिखाई पड़ा है।
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चुनावी वादों में शामिल रहे बिजली यूनिट फ्री एवं मुफ्त बिजली देने की बातों का करंट बिजली विभाग को लगा है। बिजली विभाग के बिलों के राजस्व का कलेक्शन अटकने लगा है।
बिजली बिल जमा होने का औसत निकालें तो दो माह में करीब 10 करोड़ रुपये की वसूली कम हुई है। इस तरह से हर माह के औसतन कलेक्शन 30 करोड़ के सापेक्ष जनवरी एवं फरवरी माह के कलेक्शन में 20 फीसदी तक कमी आई है।
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विभागीय अधिकारी इसे भले ही खुलकर इसे चुनावी वादों से उपभोक्ताओं में आने वाली सुस्ती नहीं मान रहे हैं, मगर कर्मचारी इस बात को मानते हैं कि कहीं न कहीं इस ओर चुनावी वादों का असर भी पड़ा है।
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जिले में विद्युत वितरण व्यवस्था के तहत चार खंड कार्य कर रहे हैं। इनमें विद्युत वितरण खंड प्रथम में बिलग्राम, मल्लावां, सांडी के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र आते हैं, जबकि विद्युत वितरण खंड द्वितीय में हरदोई शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र आते हैं।
इसी तरह विद्युत वितरण खंड तृतीय के तहत शाहाबाद, सवायजपुर के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र आते हैं। विद्युत वितरण खंड चतुर्थ में संडीला नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र आते हैं।
इस तरह से जिले की 1,306 ग्राम पंचायतों एवं सात नगर पालिका क्षेत्रों और छह नगर पंचायत क्षेत्र उक्त चारों विद्युत वितरण खंडों में अलग-अलग आते हैं। इन सभी खंडों के करीब करीब सवा पांच लाख बिजली कनेक्शन संचालित हैं।
इनमें नगरीय क्षेत्रों में करीब 80 हजार एवं ग्रामीण क्षेत्रों में करीब पौने पांच लाख बिजली कनेक्शन हैं। इन बिजली कनेक्शनों की साल भर की औसतन मासिक बिलिंग करीब 31 करोड़ है, जिसके सापेक्ष जिले का औसतन कलेक्शन हर माह तीस करोड़ है।
बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर माह में बिजली विभाग ने बिलों के कलेक्शन के रूप में करीब 30 करोड़ रुपये का राजस्व जमा किया था।
जनवरी माह में बिल जारी होने से पहले आई चुनाव आचार संहिता के बाद शुरू हो गए चुनावी वादों के बीच जनवरी में बिजली बिल के राजस्व के रूप में विभाग के पास करीब पौने 20 करोड़ रुपये जमा हुआ। फरवरी माह में अभी तक करीब 18 करोड़ रुपये जमा हुआ है।
लोगों का अनुमान है कि फरवरी माह के शेष दिनों में बिल जमा होने के बाद यह आंकड़े अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकते हैं, क्योंकि कामर्शियल कनेक्शनों का बिल पूरा जमा होने की उम्मीद है।
तीन लाख बिजली कनेक्शनों पर असर
विभागीय आंकड़ों के औसत में जिले में सक्रिय करीब सवा पांच बिजली कनेक्शनों में सौभाग्य योजना सहित कम यूनिट खपत वाले लगभग तीन लाख कनेक्शनों के बिल जमा होने में सुस्ती आई है।
यह सुस्ती चुनावी वादों को लेकर आई है या फिर कोई कारण है। इस पर विभागीय अधिकारी कुछ खुलकर कहने को तैयार नहीं होते हैं, मगर बिजली विभाग के बिलों के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जमा होने की व्यवस्था से जुड़े विभागीय आंकड़े राजस्व कलेक्शन कम पड़ने की गवाही दे रहे हैं।
लोग लगाए हैं राहत मिलने की उम्मीद
बिजली बिलों की यूनिट में छूट आदि से लेकर किसानों के लिए बिजली संबंधी वादे कमोवेश सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने किए हैं। किसी ने चुनावी घोषणा पत्र मेें किए तो किसी ने गांव-गांव चुनाव प्रचार के दौरान लोगों के बीच बातचीत के दौरान किए।
एक गांव के कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वोट मांगने के प्रचार के दौरान कमोवेश ज्यादातर लोगों ने बिजली बिल में राहत मिलने की बातें की।
इस वजह से हमने फिलहाल दो माह से बिल इस उम्मीद पर जमा नहीं किए कि क्या पता बिल माफ हो जाए या फिर कोई छूट ही मिल जाए। लोगों ने कहा कि आप नाम छाप दोगे तो छूट मिले न मिले, मगर बकाया बिल में बिजली जरूर कट जाएगी।
तो बढ़ सकती रिकवरी को लेकर सख्ती
विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में शामिल जिले में मतदान बुधवार को संपन्न हो गया है। चुनाव ड्यूटी आदि में लगे रहे अधिकारी और कर्मचारी अब पूरा समय विभागीय कामकाज को दे सकेंगे।
ऐसा माना जा रहा कि अब बकाया बिजली बिलों को जमा कराने के लिए विभाग सख्ती फिर से शुरू करेगा और बकायेदारी में बिजली कनेक्शनों को काटे जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि मार्च में विभाग इस ओर बड़ा अभियान चला रहा है।
डेढ़ प्रतिशत का विलंब शुल्क पड़ेगा भारी
विभागीय लोगों ने बताया कि जो उपभोक्ता समय पर बिजली का बिल नहीं जमा करते हैं, उनके बिलों में डेढ़ प्रतिशत का विलंब शुल्क लगाया जाता है। ऐसे में जो उपभोक्ता समय पर बिल नहीं जमा करते हैं, उनके ऊपर सरचार्ज का भार बढ़ जाता है।

यह सही है कि दो माह से बिलों के जमा होने में कमी आई है। उपभोक्ताओं को समय से बिल जमा करके विभाग का सहयोग करना चाहिए, ताकि बकाया बिलों के लिए कनेक्शन विच्छेदन की होने वाली कार्रवाई से बचे रहें।
- ओपी पाल, एक्सईएन विद्युत सदर
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