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बंदिशें हजार, लाभ कैसे मिले सरकार
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Sat, 03 Oct 2015 11:56 PM IST
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किसानों को कृषि उर्वरकों, बीजों, यंत्रों आदि पर
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मिलने वाला अनुदान या छूट अब सरकार सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजने की
योजना डीबीटी लागू कर चुकी है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना यानी
डीबीटी के तहत उन्हीं किसानों को लाभ मिलना है, जो कि डीबीटी से संबंधित
पोर्टल/वेबसाइट पर आनलाइन पंजीकृत हैं।
पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर है और अभी तक करीब दस फीसदी किसानों का पंजीकरण हो सका है। डीबीटी में लाभ के लिए पंजीकरण से लेकर बीज आदि की खरीदारी को लेकर बंदिशें भी कम नहीं हैं। ऐसे में शतप्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल पाना सहज नहीं है।
जैसा कि कृषि महकमे के अफसरों का कहना है कि जिले में भूमिधरी किसानों की संख्या पांच लाख 85 हजार है और पंजीकरण करा चुके किसानों की संख्या लगभग 60 हजार है। मतलब साफ है कि 90 फीसदी किसानों का पंजीकरण नहीं हो पाया है, जबकि पिछले एक साल से किसानों का पंजीकरण कार्य चल रहा है।
योजना से संबंधित पोर्टल यूपीएग्रीकल्चरडाटकाम पर रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करने के बाद जिला/विकास खंड/ग्राम पंचायत को सेलेक्ट करने के बाद किसान का नाम पता भरने के बाद बैंक एकाउंट नंबर तथा बैंक का आईएफएस कोड देने के साथ मोबाइल नंबर भर दिया जाता है।
साथ ही खतौनी नंबर एवं पहचान आईडी का नंबर भरने के बाद फसलों के लिए बताना होता है कि किस फसल के लिए बीज चाहिए। अभी उर्वरक एवं कृषि यंत्रों का विकल्प मुहैया नहीं है। एक सीजन में अधिकतम दो फसलों की च्वाइज दी जा सकती है। किसानों द्वारा साइबर कैफे, ग्रामीण सेवा केंद्रों से पंजीकरण कराया जा रहा है।
पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर है और अभी तक करीब दस फीसदी किसानों का पंजीकरण हो सका है। डीबीटी में लाभ के लिए पंजीकरण से लेकर बीज आदि की खरीदारी को लेकर बंदिशें भी कम नहीं हैं। ऐसे में शतप्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल पाना सहज नहीं है।
जैसा कि कृषि महकमे के अफसरों का कहना है कि जिले में भूमिधरी किसानों की संख्या पांच लाख 85 हजार है और पंजीकरण करा चुके किसानों की संख्या लगभग 60 हजार है। मतलब साफ है कि 90 फीसदी किसानों का पंजीकरण नहीं हो पाया है, जबकि पिछले एक साल से किसानों का पंजीकरण कार्य चल रहा है।
योजना से संबंधित पोर्टल यूपीएग्रीकल्चरडाटकाम पर रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करने के बाद जिला/विकास खंड/ग्राम पंचायत को सेलेक्ट करने के बाद किसान का नाम पता भरने के बाद बैंक एकाउंट नंबर तथा बैंक का आईएफएस कोड देने के साथ मोबाइल नंबर भर दिया जाता है।
साथ ही खतौनी नंबर एवं पहचान आईडी का नंबर भरने के बाद फसलों के लिए बताना होता है कि किस फसल के लिए बीज चाहिए। अभी उर्वरक एवं कृषि यंत्रों का विकल्प मुहैया नहीं है। एक सीजन में अधिकतम दो फसलों की च्वाइज दी जा सकती है। किसानों द्वारा साइबर कैफे, ग्रामीण सेवा केंद्रों से पंजीकरण कराया जा रहा है।